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UP: इलाहाबाद हाईकोर्ट का सिस्टम पर चाबुक, पुलिस पर सख्ती; कहा- वाहवाही के लिए नहीं लगा सकती किसी पर गैंस्टर
Thu, 12 Feb 2026 03:12 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 12 Feb 2026 03:12 AM IST
कोर्ट ने कहा कि केवल पुलिस की छवि सुधारने या आंकड़े बेहतर दिखाने के लिए किसी व्यक्ति को गैंगस्टर घोषित करना कानून की मंशा के विपरीत है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अपनी पीठ थपथपाने व महिमामंडन के लिए पुलिस किसी नागरिक पर गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई नहीं कर सकती। यह एक्ट सामान्य धाराओं की अपग्रेडेड कॉपी नहीं है, जिसे हर मामले में लगा दिया जाए।
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इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति अजय भनोट और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने बस्ती निवासी उस्मान के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के मामले में गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। साथ ही विवेचक और थाना प्रभारी से चार हफ्ते में जवाबी हलफनामा तलब किया है।
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हाईकोर्ट ने कहा कि केवल पुलिस की छवि सुधारने या आंकड़े बेहतर दिखाने के लिए किसी व्यक्ति को गैंगस्टर घोषित करना कानून की मंशा के विपरीत है। गैंगस्टर एक्ट अत्यंत कठोर कानून है, जिसका प्रयोग सोच-समझकर और ठोस साक्ष्यों के आधार पर ही किया जाना चाहिए। यही कारण है कि गैंगस्टर के तहत कार्यवाही की विस्तृत प्रक्रिया बनाई गई है, जिसका पालन अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए।
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दलील...पुलिस ने केवल आंकड़े सुधारने के लिए लगाया गैंगस्टर
मामला पुरानी बस्ती थाना क्षेत्र का है। पुलिस ने याची पर पहले से दर्ज एक केस के आधार पर गैंगस्टर का मुकदमा दर्ज कर दिया था। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि पूर्व में दर्ज मुकदमे में याची जमानत पर है। इसके बावजूद पुलिस ने केवल आंकड़ों को सुधारने व उपलब्धियां दिखाने के लिए गैंगस्टर एक्ट लगा दिया। एफआईआर दर्ज करने से पहले गैंगस्टर एक्ट के अनिवार्य नियमों का पालन नहीं किया। कार्रवाई पूरी तरह दुर्भावना से प्रेरित है।