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Software : अधिवक्ता ‘सुप्रीम टुडे एआई’ के जरिये तुरंत खोज सकेंगे जजमेंट, अनुवाद की भी सुविधा
Fri, 06 Sep 2024 11:29 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 06 Sep 2024 11:29 AM IST
इसके जरिये किसी भी विषय पर या विधिक मुद्दे पर सर्च करते ही उससे संबंधित पक्ष व विपक्ष में पारित आदेश एवं संबंधित कानून, नियम व धाराएं उपलब्ध हो जाएंगी। इससे अधिवक्ताओं को अपने मुकदमों को तैयार करने में मदद मिलेगी। साथ इससे किसी भी ऑर्डर को हिंदी से अंग्रेजी व अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद किया जा सकता है।
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- फोटो : ANI
विस्तार
अब अधिवक्ता एक क्लिक करते ही सुप्रीम व हाईकोर्ट के नए-नए जजमेंट आसानी से प्राप्त कर सकेंगे। अभी इसके ट्रायल के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की लाइब्रेरी हॉल के एक कंप्यूटर में ‘सुप्रीम टुडे एआई’ सॉफ्टवेयर इंस्टॉल किया गया है। इसका वार्षिक सब्सक्रिप्शन 30 हजार रुपये है। हालांकि, बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं के लिए यह सुविधा निशुल्क है।
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इसके जरिये किसी भी विषय पर या विधिक मुद्दे पर सर्च करते ही उससे संबंधित पक्ष व विपक्ष में पारित आदेश एवं संबंधित कानून, नियम व धाराएं उपलब्ध हो जाएंगी। इससे अधिवक्ताओं को अपने मुकदमों को तैयार करने में मदद मिलेगी। साथ इससे किसी भी ऑर्डर को हिंदी से अंग्रेजी व अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद किया जा सकता है। किसी भी टॉपिक व जजमेंट का इस तकनीक से सारांश बना सकते हैं।
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अभी इस सॉफ्टवेयर को एक कंप्यूटर में ट्रायल के रूप में निशुल्क इंस्टॉल किया गया है। इसका वार्षिक सब्सक्रिप्शन 30 हजार रुपये है। आने वाले दिनों में कार्यकारिणी से बात कर अन्य कंप्यूटरों में इस सॉफ्टवेयर को इंस्टॉल कराने की योजना है। - संयुक्त सचिव लाइब्रेरी अभिजीत कुमार पांडेय
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ला फाइंडर एप भी उपलब्ध कराया जाएगा
संयुक्त सचिव लाइब्रेरी ने बताया कि अधिवक्ताओं को ला फाइंडर एप निशुल्क उपलब्ध कराने की योजना है। इस संबंध में कार्यकारिणी से बात की जाएगी। सहमति मिलने के बाद जल्द अधिवक्ताओं के मोबाइल में यह एप इंस्टॉल करा दिया जाएगा। खास बात यह है कि एप सिर्फ हाईकोर्ट परिसर में काम करेगा। घर पर प्रयोग करने के लिए सब्सक्रिप्शन लेना पड़ेगा। एप के जरिये हाईकोर्ट परिसर में कहीं भी बैठकर सुप्रीम व सभी हाईकोर्ट के जजमेंट आसानी से निकाल सकेंगे। साथ ही नए जजमेंट के नोटिफिकेशन भी आते रहेंगे। हाईकोर्ट प्रशासन से भी इसके लिए जरूरी अनुमति ली जाएगी।