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हाईकोर्ट : परीक्षा के नियमों का पालन अनिवार्य, उल्लंघन पर नहीं दी जा सकती राहत
Fri, 02 Oct 2026 05:11 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 02 Oct 2026 05:11 PM IST
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि परीक्षा के नियमों का पालन करना अनिवार्य है। इसका उल्लंघन करने वाला अभ्यर्थी राहत हकदार नहीं है।
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court room
- फोटो : ANI
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि परीक्षा के नियमों का पालन करना अनिवार्य है। इसका उल्लंघन करने वाला अभ्यर्थी राहत हकदार नहीं है। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकल पीठ ने कानपुर नगर निवासी गरिमा दिवाकर की ओर से उत्तर पुस्तिका के मैनुअल मूल्यांकन के मांग वाली याचिका खारिज कर दी।
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याची ने शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से आयोजित टीजीटी की परीक्षा दी थी। परीक्षा के दौरान उसने ओएमआर शीट के प्रश्न पुस्तिका नंबर वाले कॉलम में गलती से दो गोले भर दिए थे। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि डिजिटल प्रारूप में प्रश्न पुस्तिका संख्या सही दर्ज की गई थी, लिहाजा, न्यायहित में मामूली सी गलती को नजरंदाज कर ओएमआर शीट का मैनुअल मूल्यांकन कराया जा सकता है।
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हालांकि, कोर्ट ने इस दलील को मानने से इन्कार कर दिया। कहा कि अभ्यर्थियों से अपेक्षा की जाती है कि वे परीक्षा के निर्देशों को ध्यानपूर्वक पढ़ें। उसी के अनुसार ओएमआर शीट भरें। निर्देशों के उल्लंघन के बाद में गलती सुधारने की अनुमति देना परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर सकता है।
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कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का भी हवाला दिया, जिसमें परीक्षा संबंधी अनिवार्य निर्देशों का कड़ाई से पालन जरूरी बताया गया था। कोर्ट ने अपने पूर्व के जय करण सिंह मामले का भी उल्लेख किया, जिसमें गलत रजिस्ट्रेशन नंबर, रोल नंबर, प्रश्न पुस्तिका सीरीज या भाषा भरने वाले अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट का मैनुअल परीक्षण कराने से इनकार किया गया था।
कोर्ट ने कहा कि ओएमआर प्रणाली का उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से उत्तर पुस्तिका का जल्द और पारदर्शी मूल्यांकन करना है। बाद में बड़ी संख्या में ओएमआर शीट की मैनुअल जांच कराने से परिणाम में देरी होगी। साथ ही परीक्षा नियमों की एकरूपता भी प्रभावित होगी। लिहाजा, कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।