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व्यापारियों का दर्द: दुकानों में भर रहा बारिश का पानी, करोड़ों के नुकसान का डर; बारिश बन गई मुसीबत

Wed, 26 Aug 2026 11:56 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Wed, 26 Aug 2026 11:56 AM IST
सार
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आगरा के बिजलीघर और शिवाजी मार्केट में बारिश के दौरान नाला काजीपाड़ा का गंदा पानी दुकानों में भरने से व्यापारियों को हर साल लाखों-करोड़ों रुपये का नुकसान झेलना पड़ रहा है। व्यापारियों ने नाले की तलीझाड़ सफाई कराने के बाद उसे पूरी तरह ढकने की मांग की है, ताकि कचरा और चमड़े की कतरन नाले में न जा सके।
 

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Remove Blindfold Save Traders From Crores Of Loss Due To Waterlogging In Agra
व्यापारियों का दर्द - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 मानसून की बारिश लोगों के लिए सुहाने मौसम के साथ राहत लेकर आती है लेकिन बिजलीघर, शिवाजी मार्केट समेत कई बाजारों के व्यापारियों के लिए आफत बन जाती है। शिवाजी मार्केट और बिजलीघर चौराहे की दुकानों में नाला काजीपाड़ा का गंदा पानी भरने से दुकानदारों को करोड़ों रुपये का नुकसान हो चुका है। बारिश की बूंद पड़ते ही उनके दिल की धड़कनें तेज होने लगती हैं। नुकसान की आशंका परेशान करती है।
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शिवाजी मार्केट एसोसिएशन के व्यापारियों ने नाले ढकने के लिए चलाए जा रहे अमर उजाला के अभियान के साथ अपनी आवाज बुलंद की। कहा कि निगम के सेनेटरी इंस्पेक्टर आंखों पर पट्टी बांधे हुए हैं। पूरा नाला चोक है। सिल्ट और चमड़े की कतरन से भरा हुआ है।
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बारिश में यही सिल्ट दुकानों में भरती है तो तीन दिन सफाई करनी पड़ती है। हर दुकानदार को लाखों रुपये का नुकसान होता है। तीन फीट तक पानी भर जाता है। एसोसिएशन ने कहा कि नाले की तलीझाड़ सफाई के बाद पूरी तरह कवर किया जाए जिससे कोई कचरा, कतरन न डाल सके।
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व्यापारियों का दर्द
शिवाजी मार्केट एसोसिएशन के संरक्षक श्याम भोजवानी ने बताया कि अधिकारियों ने आंखों पर पट्टी बांध ली है। उन्हें व्यापारियों का नुकसान नजर नहीं आता। नाला ढकने से कचरा डालना बंद हो जाएगा।



लक्ष्मण दास छावड़ा ने कहा कि दुकान के तीन तरफ नाले हैं। जलभराव से करोड़ों रुपये का नुकसान हर साल झेल रहे हैं। नाले साफ कराकर ढके जाने चाहिए। 
मनीष कुकरेजा ने बताया कि बिजलीघर शहर का सबसे व्यस्त चौराहा है। बारिश होते ही डर लगता है कि फिर दुकानों में रखा सामान खराब होगा। 

अरुण पारवानी ने बताया कि स्मार्ट सिटी में नाला बनाया गया लेकिन जलभराव का समाधान नहीं हो पाया। तीनों नाले ढक दिए जाएं, जिससे कतरन के बैग न फेंके जा सकें। 
सुनील कुमार ने बताया कि पानी की लाइन उठा दी पर जलभराव से निदान नहीं मिला। तीन फीट तक पानी भर रहा है। 

सुरेंद्र भाटिया ने बताया कि जैसे सीवर लाइन खोलकर पानी निकालते हैं। वैसे ही नालों को ढक दें। कम से कम कचरा तो नहीं फंसेगा। 
हेमंत ने बताया कि काजीपाड़ा नाले में कई लोग गिर चुके हैं। मानसून के बाद सफाई कराकर इसे ढका जाए। 

दिलीप कुमार ने बताया कि रात में बारिश न हो, यही डर लगा रहता है। नगर निगम स्थायी निदान कराए। अब वादों से आजिज आ चुके हैं। 
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