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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Pitru Paksha Begins Today: 16 Shradhs in 15 Days Avoid These 8 Things

पितृपक्ष आज से शुरू: इस बार 15 दिन में 16 श्राद्ध, तिथियां कर लें नोट; इन दिनों भूल से भी न करें ये 8 काम

Sat, 26 Sep 2026 09:14 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Sat, 26 Sep 2026 09:14 AM IST
सार
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पितृपक्ष 26 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्तूबर को सर्व पितृ अमावस्या के साथ समाप्त होगा। इस बार तिथि क्षय के कारण 15 दिनों में 16 श्राद्ध होंगे। 30 सितंबर को चतुर्थी और पंचमी का श्राद्ध एक ही दिन होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दौरान कुछ कार्यों और वस्तुओं से परहेज किया जाता है।
 

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Pitru Paksha Begins Today: 16 Shradhs in 15 Days Avoid These 8 Things
पितृपक्ष 2026 - फोटो : adobe stock

विस्तार

पूर्वजों के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और पितृ ऋण से जुड़ा पितृपक्ष 26 सितंबर से शुरू होगा। इस बार 15 दिनों में 16 श्राद्ध होंगे। 10 अक्तूबर को सर्व पितृ अमावस्या के साथ समापन होगा। तिथि क्षय के कारण 30 सितंबर को चतुर्थी और पंचमी दोनों तिथियों का श्राद्ध एक ही दिन किया जाएगा। ज्योतिषाचार्य वेद प्रकाश प्रचेता ने बताया कि पितृपक्ष में पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध करने की परंपरा है। जिन पूर्वजों की मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होती, उनका श्राद्ध सर्व पितृ अमावस्या के दिन किया जाता है।
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यह रहेंगी श्राद्ध की तिथियां
26 सितंबर : पूर्णिमा
27 सितंबर : प्रतिपदा
28 सितंबर : द्वितीया
29 सितंबर : तृतीया श्राद्ध, महाभरणी
30 सितंबर : चतुर्थी-पंचमी
1 अक्तूबर : षष्ठी
2 अक्तूबर : सप्तमी
3 अक्तूबर : अष्टमी
4 अक्तूबर : नवमी, मातृ नवमी
5 अक्तूबर : दशमी
6 अक्तूबर : एकादशी
7 अक्तूबर : द्वादशी, मघा श्राद्ध
8 अक्तूबर : त्रयोदशी
9 अक्तूबर: चतुर्दशी
10 अक्तूबर : सर्व पितृ अमावस्या

 
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तर्पण और पिंडदान की परंपरा
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि पितृपक्ष में स्नान के बाद दक्षिण दिशा की ओर मुख कर काले तिल, जौ, कुश और गंगाजल से पितरों का तर्पण किया जाता है। इसके बाद पके चावल, काले तिल और शहद से पिंड बनाकर पिंडदान करने की परंपरा है। भोजन तैयार होने पर पंचबलि के तहत गाय, कुत्ते, कौवे, देवता और चींटी के लिए अंश निकाला जाता है। इसके बाद ब्राह्मण को भोजन कराकर दक्षिणा देने की परंपरा है। पितृपक्ष के दौरान घर में सात्विक माहौल रखने, पीपल के वृक्ष पर तिल मिला जल अर्पित करने और गीता के सातवें अध्याय का पाठ करने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्यों से परहेज किया जाता है।


 
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इन कामों को न करें
1- श्राद्ध कर्म करने वाले व्यक्ति को न तो पान खाना चाहिए और ना ही शरीर पर तेल लगाना चाहिए।
 

2- श्राद्ध पक्ष के दौरान और खासतौर पर अंतिम दिन दूसरे शहर की यात्रा नहीं करनी चाहिए। इसके अलावा न तो गुस्सा करना चाहिए।
 

3- श्राद्ध पक्ष में अपने पितरों को तर्पण करते हुए हमेशा आपका मुंह दक्षिण दिशा की ओर होना चाहिए।
 

4- श्राद्ध में किसी प्रकार की तामसिक वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए और न ही नशे का सेवन करना चाहिए।
 

5- श्राद्ध में चना, मसूर, उड़द, सत्तू, मूली, काला जीरा, खीरा, काला नमक, काला उड़द, बासी या अपवित्र फल या अन्न उपयोग नहीं किया जाता।
 

6- बिना संकल्प के कभी भी श्राद्ध पूरा नहीं माना जाता इसलिए श्राद्ध के अंतिम दिन हाथ में अक्षत, चंदन,फूल और तिल लेकर पितरों का तर्पण करें।
 

7- पितरों की कृपा पाने के लिए श्राद्ध के अंतिम दिन ब्राह्मणों और गरीबों को भोजन कराने का खास नियम है। इसके अलावा पितृदोषों से मुक्ति के लिए दान जरूर करना चाहिए।
 

8- श्राद्ध कर्म में तिल और कुशा का होना जरूरी है। साथ ही भोजन बनाने में किसी प्रकार के लोहे के बर्तनों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
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