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सरसों की बुवाई में न करें देरी: अक्तूबर के ये तीन सप्ताह बेहद अहम, किसान अपनाएं ये तरीका तो बढ़ेगी पैदावार
Tue, 06 Oct 2026 11:17 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Tue, 06 Oct 2026 11:17 AM IST
कृषि विशेषज्ञ ने किसानों को अक्तूबर के प्रथम से तृतीय सप्ताह तक सरसों की बुवाई पूरी करने की सलाह दी है। समय पर बुवाई, उन्नत बीज, बीज उपचार और संतुलित खाद-पानी प्रबंधन से फसल की पैदावार बेहतर की जा सकती है।
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सरसों की फसल
विस्तार
आरबीएस कॉलेज के शस्य विज्ञान विभाग के प्रो. राजवीर सिंह ने किसानों को अक्तूबर के प्रथम से तृतीय सप्ताह तक सरसों की बुवाई करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि समय पर बुवाई, उन्नत किस्मों का चयन और संतुलित पोषण से फसल की पैदावार बढ़ाई जा सकती है। प्रति हेक्टेयर 5 से 6 किलो बीज की जरूरत होती है। बुवाई 30 से 45 सेंटीमीटर पंक्ति दूरी और 2.5 से 3 सेंटीमीटर गहराई पर करें।
प्रो. सिंह के अनुसार बीजजनित रोगों से बचाव के लिए बुवाई से पहले प्रति किलो बीज को बाविस्टीन दो ग्राम या थीरम 2.5 ग्राम की दर से उपचारित करना चाहिए। मृदा परीक्षण के आधार पर खाद का प्रयोग करना बेहतर है। सामान्य स्थिति में प्रति हेक्टेयर 15 से 20 टन सड़ी गोबर की खाद, 80 किलो नाइट्रोजन, 60 किलो फॉस्फोरस, 40 किलो पोटाश और 30 किलो सल्फर देने की सलाह दी है। नाइट्रोजन की शेष मात्रा पहली सिंचाई के समय दें।
वहीं, खरपतवार नियंत्रण के लिए बुवाई के 20 से 25 दिन बाद निराई-गुड़ाई करनी चाहिए। सामान्य परिस्थितियों में दो सिंचाइयां पर्याप्त रहती हैं। पहली सिंचाई बुवाई के 30 से 35 दिन बाद और दूसरी फलियों में दाना बनने की अवस्था में करने की सलाह दी गई है।
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ये हैं उन्नत किस्में
प्रो. राजवीर सिंह ने बताया, समय से बुवाई के लिए पूसा सरसों-21, पूसा सरसों-22, पूसा सरसों-24, एनआरसीएचबी-506, कोरल-432, कोरल-437, पीएसी-432 और आरएलसी-3 उपयुक्त हैं। पछेती बुवाई के लिए पूसा सरसों-28, आरजीएन-145 और नव गोल्ड की सलाह दी गई है।
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प्रो. सिंह के अनुसार बीजजनित रोगों से बचाव के लिए बुवाई से पहले प्रति किलो बीज को बाविस्टीन दो ग्राम या थीरम 2.5 ग्राम की दर से उपचारित करना चाहिए। मृदा परीक्षण के आधार पर खाद का प्रयोग करना बेहतर है। सामान्य स्थिति में प्रति हेक्टेयर 15 से 20 टन सड़ी गोबर की खाद, 80 किलो नाइट्रोजन, 60 किलो फॉस्फोरस, 40 किलो पोटाश और 30 किलो सल्फर देने की सलाह दी है। नाइट्रोजन की शेष मात्रा पहली सिंचाई के समय दें।
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वहीं, खरपतवार नियंत्रण के लिए बुवाई के 20 से 25 दिन बाद निराई-गुड़ाई करनी चाहिए। सामान्य परिस्थितियों में दो सिंचाइयां पर्याप्त रहती हैं। पहली सिंचाई बुवाई के 30 से 35 दिन बाद और दूसरी फलियों में दाना बनने की अवस्था में करने की सलाह दी गई है।
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ये हैं उन्नत किस्में
प्रो. राजवीर सिंह ने बताया, समय से बुवाई के लिए पूसा सरसों-21, पूसा सरसों-22, पूसा सरसों-24, एनआरसीएचबी-506, कोरल-432, कोरल-437, पीएसी-432 और आरएलसी-3 उपयुक्त हैं। पछेती बुवाई के लिए पूसा सरसों-28, आरजीएन-145 और नव गोल्ड की सलाह दी गई है।