{"_id":"6a8925548b38434aee0659eb","slug":"baba-mankameshwar-nath-to-appear-on-silver-swing-during-sawan-2026-08-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"अलौकिक दर्शन को रहें तैयार: रजत हिंडोले पर विराजेंगे बाबा मनःकामेश्वरनाथ, सर्पों के सिंहासन पर होगा शृंगार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अलौकिक दर्शन को रहें तैयार: रजत हिंडोले पर विराजेंगे बाबा मनःकामेश्वरनाथ, सर्पों के सिंहासन पर होगा शृंगार
Sat, 22 Aug 2026 09:58 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Sat, 22 Aug 2026 09:58 AM IST
सावन की एकादशी और द्वादशी पर बाबा मनःकामेश्वरनाथ रजत हिंडोले पर विराजमान होकर श्रद्धालुओं को विशेष दर्शन देंगे। यह प्राचीन झूला उत्सव 23 और 24 अगस्त को मंदिर में आयोजित होगा।
विज्ञापन
बाबा मनःकामेश्वरनाथ
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सावन मास की एकादशी और द्वादशी पर शिवनगरी आगरा में बाबा मनःकामेश्वरनाथ के रजत हिंडोला उत्सव की प्राचीन परंपरा फिर जीवंत होगी। 23 और 24 अगस्त को बाबा मनःकामेश्वरनाथ रजत हिंडोले पर विराजमान होकर श्रद्धालुओं को अलौकिक दर्शन देंगे। वर्ष में केवल दो दिन होने वाले इस विशेष दर्शन के लिए मंदिर में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
महंत योगेश पुरी ने बताया कि ब्रज क्षेत्र में सावन आते ही झूला उत्सव की परंपरा जीवंत हो जाती है। इसकी आध्यात्मिक छटा शिवनगरी में भी देखने को मिलती है। सावन की एकादशी और द्वादशी पर बाबा मनःकामेश्वरनाथ रजत हिंडोले में विराजमान होकर श्रद्धालुओं को दर्शन देते हैं। भगवान शिव के हिंडोले में विराजने की यह परंपरा शिव और शक्ति, प्रकृति और परमात्मा के बीच आनंदमय संबंध का प्रतीक भी मानी जाती है।
मठ मंदिर प्रशासक हरिहर पुरी ने बताया कि रजत हिंडोले के दोनों ओर भगवान शिव के प्रिय गण कालभैरव और वीरभद्र रजत स्वरूप में विराजमान रहेंगे। बाबा का विशेष शृंगार सर्पों के मुकुट और सर्पों के सिंहासन के साथ किया जाएगा। हिंडोले में सर्प और बिच्छुओं की आकृतियां भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगी। बताया कि 23 अगस्त रविवार को शाम 7 बजे से रात 10:30 बजे तक श्रद्धालु बाबा के रजत हिंडोला दर्शन कर सकेंगे। वहीं 24 अगस्त सोमवार को सुबह से रात 12 बजे तक दर्शन का क्रम चलेगा।
विज्ञापन
वर्ष 1978-79 में तैयार हुआ था रजत हिंडोला
महंत योगेश पुरी ने बताया कि बाबा मनःकामेश्वरनाथ के रजत हिंडोले का वर्ष 1978-79 में पूर्व महंत उद्धव पुरी महाराज ने निर्माण कराया था। तभी से यह परंपरा चली आ रही है। वर्ष में दो दिन श्रद्धालुओं को इस रजत हिंडोले के दर्शन का सौभाग्य मिलता है।
विज्ञापन
महंत योगेश पुरी ने बताया कि ब्रज क्षेत्र में सावन आते ही झूला उत्सव की परंपरा जीवंत हो जाती है। इसकी आध्यात्मिक छटा शिवनगरी में भी देखने को मिलती है। सावन की एकादशी और द्वादशी पर बाबा मनःकामेश्वरनाथ रजत हिंडोले में विराजमान होकर श्रद्धालुओं को दर्शन देते हैं। भगवान शिव के हिंडोले में विराजने की यह परंपरा शिव और शक्ति, प्रकृति और परमात्मा के बीच आनंदमय संबंध का प्रतीक भी मानी जाती है।
विज्ञापन
मठ मंदिर प्रशासक हरिहर पुरी ने बताया कि रजत हिंडोले के दोनों ओर भगवान शिव के प्रिय गण कालभैरव और वीरभद्र रजत स्वरूप में विराजमान रहेंगे। बाबा का विशेष शृंगार सर्पों के मुकुट और सर्पों के सिंहासन के साथ किया जाएगा। हिंडोले में सर्प और बिच्छुओं की आकृतियां भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगी। बताया कि 23 अगस्त रविवार को शाम 7 बजे से रात 10:30 बजे तक श्रद्धालु बाबा के रजत हिंडोला दर्शन कर सकेंगे। वहीं 24 अगस्त सोमवार को सुबह से रात 12 बजे तक दर्शन का क्रम चलेगा।
विज्ञापन
वर्ष 1978-79 में तैयार हुआ था रजत हिंडोला
महंत योगेश पुरी ने बताया कि बाबा मनःकामेश्वरनाथ के रजत हिंडोले का वर्ष 1978-79 में पूर्व महंत उद्धव पुरी महाराज ने निर्माण कराया था। तभी से यह परंपरा चली आ रही है। वर्ष में दो दिन श्रद्धालुओं को इस रजत हिंडोले के दर्शन का सौभाग्य मिलता है।