टेलीकॉम में एआई को लेकर TRAI का बड़ा कदम: कंपनियों को बनानी होगी बोर्ड से मंजूर पॉलिसी, क्या बदल जाएंगे नियम?

कुलदीप शर्मा
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीकुलदीप शर्मा
Fri, 30 Oct 2026 07:02 PM IST
सार

TRAI ने टेलीकॉम सेक्टर में AI के जिम्मेदार इस्तेमाल के लिए नए दिशानिर्देशों का मसौदा जारी किया है। इसके तहत कंपनियों को बोर्ड से मंजूर AI पॉलिसी बनानी होगी, जोखिमों की पहचान करनी होगी और गंभीर घटनाओं की जानकारी TRAI को देनी होगी। सुझाव भेजने की अंतिम तारीख 27 नवंबर है। आइए जानते हैं कि इससे यूजर्स पर क्या असर होगा?

TRAI Releases Draft AI Guidelines for Telecom Sector Seeks Stakeholders Comments by November 27
प्रतीकात्म इमेज - फोटो : Amar Ujala Digital

    विस्तार

    भारत में टेलीकॉम सेवाओं के अंदर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। कॉलिंग, नेटवर्क मैनेजमेंट और डिजिटल सेवाओं में AI की बढ़ती भूमिका को देखते हुए भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने एक नई पहल की है। प्राधिकरण ने टेलीकॉम नेटवर्क और दूरसंचार सेवाओं में AI के जिम्मेदार इस्तेमाल को लेकर दिशानिर्देशों का मसौदा जारी किया है। इसमें टेलीकॉम कंपनियों के लिए AI से जुड़ी नीतियां बनाना, जोखिमों की पहचान करना और गंभीर घटनाओं की जानकारी नियामक को देना जैसे प्रस्ताव शामिल हैं।

    TRAI ने इस मसौदे पर संबंधित पक्षों से सुझाव और टिप्पणियां मांगी हैं। सुझाव भेजने की आखिरी तारीख 27 नवंबर 2026 तय की गई है। प्राधिकरण का कहना है कि इस पहल का मकसद टेलीकॉम सेक्टर में AI के इस्तेमाल को लेकर स्पष्टता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। फिलहाल ये दिशानिर्देश प्रस्ताव के रूप में हैं। हितधारकों से मिले सुझावों पर विचार करने के बाद इन्हें अंतिम रूप दिया जाएगा।

    टेलीकॉम कंपनियों को बनानी होगी AI पॉलिसी

    TRAI के प्रस्तावित ढांचे के मुताबिक, AI का इस्तेमाल करने वाली टेलीकॉम कंपनियों और अन्य अधिकृत संस्थाओं को अपनी एक आंतरिक AI पॉलिसी तैयार करनी होगी। इस पॉलिसी को कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स या संबंधित गवर्निंग बॉडी से मंजूरी लेना जरूरी होगा। इसमें AI सिस्टम के जोखिमों का वर्गीकरण, उनके इस्तेमाल की मंजूरी, घटनाओं से निपटने की प्रक्रिया, मानवीय निगरानी, डेटा प्रबंधन और ग्राहकों की शिकायतों के समाधान से जुड़े नियम शामिल करने होंगे।

    इसके अलावा कंपनियों को AI के संचालन और सुरक्षा की निगरानी के लिए अलग-अलग गवर्नेंस और सेफ्टी कमेटियां बनाने का भी प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि AI सिस्टम का इस्तेमाल तय नियमों और सुरक्षा मानकों के अनुसार हो।

    AI सिस्टम को तीन जोखिम श्रेणियों में बांटना होगा

    मसौदे में AI सिस्टम को उनके प्रभाव और संभावित जोखिम के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटने का प्रस्ताव है। इनमें हाई रिस्क, मीडियम रिस्क और लो रिस्क शामिल हैं। यह वर्गीकरण नेटवर्क के संचालन पर पड़ने वाले प्रभाव, वित्तीय और परिचालन परिणामों के साथ उपभोक्ताओं पर संभावित असर को ध्यान में रखकर किया जाएगा।

    TRAI ने यह भी स्पष्ट किया है कि AI सिस्टम पर उचित मानवीय निगरानी जरूरी होगी। इसके लिए पहले से एक व्यवस्था तय करनी होगी, ताकि जोखिम की स्थिति में इंसानी हस्तक्षेप किया जा सके। कंपनियां AI सिस्टम खुद विकसित करें, किसी तीसरी कंपनी से खरीदें या आउटसोर्स करें, उसकी सेवाओं के नतीजों की जिम्मेदारी संबंधित टेलीकॉम इकाई की ही होगी।

    AI से जुड़ी गंभीर घटनाओं की TRAI को देनी होगी जानकारी

    प्रस्तावित दिशानिर्देशों में AI से जुड़ी घटनाओं को गंभीरता के आधार पर चार श्रेणियों में बांटने की बात कही गई है। इनमें क्रिटिकल, हाई, मॉडरेट और लो सीवियरिटी शामिल हैं। क्रिटिकल और हाई सीवियरिटी वाली घटनाओं की जानकारी निर्धारित फॉर्मेट, तरीके और समयसीमा के भीतर TRAI को देना अनिवार्य करने का प्रस्ताव है।

    इसके साथ ही टेलीकॉम कंपनियों को AI से जुड़ी घटनाओं और उपभोक्ताओं को हुए नुकसान की शिकायतों का रिकॉर्ड रखने के लिए केंद्रीय डेटाबेस तैयार करना होगा। इसमें घटनाओं की जांच, नुकसान को कम करने और शिकायतों का समाधान करने की व्यवस्था भी शामिल होगी।

    टेलीकॉम सेक्टर में AI के लिए क्यों जरूरी हैं दिशानिर्देश?

    आज टेलीकॉम सेक्टर केवल फोन कॉल और इंटरनेट तक सीमित नहीं है। सरकारी सेवाओं, ऑनलाइन कारोबार, डिजिटल भुगतान और जरूरी सूचनाओं के आदान-प्रदान में भी इसकी अहम भूमिका है। देश की महत्वपूर्ण डिजिटल सेवाएं और आपातकालीन संचार व्यवस्था भी दूरसंचार नेटवर्क पर निर्भर करती हैं। ऐसे में नेटवर्क और सेवाओं में AI का इस्तेमाल बढ़ने के साथ यह जरूरी हो जाता है कि तकनीक का उपयोग सुरक्षित और जिम्मेदारी से किया जाए।

    TRAI के मुताबिक इन दिशानिर्देशों के जरिए टेलीकॉम क्षेत्र में AI के इस्तेमाल को लेकर स्पष्टता और जवाबदेही बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। इसका उद्देश्य कंपनियों के लिए एक ऐसा ढांचा तैयार करना है, जिससे AI के फायदे उठाने के साथ उससे जुड़े संभावित जोखिमों को भी नियंत्रित किया जा सके।

    भारत की AI गवर्नेंस गाइडलाइंस से जुड़ी है पहल

    केंद्र सरकार ने फरवरी 2026 में 'इंडिया AI गवर्नेंस गाइडलाइंस' जारी की थीं। इनका उद्देश्य AI की क्षमता का इस्तेमाल देश के विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने के लिए करना है। साथ ही AI से लोगों और समाज को होने वाले संभावित नुकसान से जुड़े जोखिमों पर ध्यान देना भी इसका हिस्सा है।

    इन दिशानिर्देशों में सात प्रमुख सिद्धांतों पर जोर दिया गया है। इनमें भरोसा, लोगों को प्राथमिकता, नवाचार को बढ़ावा, निष्पक्षता, जवाबदेही, तकनीक को समझने योग्य बनाना और सुरक्षा, मजबूती व स्थिरता शामिल हैं। TRAI का नया मसौदा इन्हीं व्यापक सिद्धांतों को टेलीकॉम सेक्टर में लागू करने और AI के जिम्मेदार इस्तेमाल के लिए स्पष्ट व्यवस्था बनाने की दिशा में उठाया गया कदम है।

    27 नवंबर तक ऐसे भेज सकते हैं सुझाव

    • सुझाव भेजने का तरीका:संबंधित पक्ष अपने सुझाव और टिप्पणियां ईमेल के जरिए TRAI को भेज सकते हैं।
    • ईमेल एड्रेस:advmn@trai.gov.in पर अपनी राय भेजें।
    • संपर्क नंबर:जानकारी या स्पष्टीकरण के लिए +91-11-20907758 पर संपर्क किया जा सकता है।
    • आखिरी तारीख:मसौदा दिशानिर्देशों पर सुझाव भेजने की अंतिम तारीख 27 नवंबर 2026 है।

    यूजर्स पर क्या होगा असर?

    TRAI के इन प्रस्तावों का असर भविष्य में फोन और इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले लोगों पर पड़ सकता है। टेलीकॉम कंपनियां AI का उपयोग नेटवर्क की गुणवत्ता सुधारने, सेवाओं को बेहतर बनाने और ग्राहकों की समस्याओं का समाधान करने में करती हैं। नए दिशानिर्देश लागू होने पर कंपनियों को AI से जुड़े जोखिमों, सुरक्षा और ग्राहकों की शिकायतों पर अधिक जवाबदेह होना पड़ेगा। गंभीर गड़बड़ियों की जानकारी नियामक को देने और AI के फैसलों पर मानवीय निगरानी रखने की व्यवस्था भी बन सकती है। हालांकि, फिलहाल ये केवल मसौदा दिशानिर्देश हैं, इसलिए यूजर्स पर तत्काल किसी बदलाव का असर नहीं होगा।