सरकार का दावा: सोशल मीडिया पर कोई सेंसरशिप नहीं, सिर्फ 'डीपफेक' और फेक न्यूज पर हो रही है कार्रवाई

Suyash Pandey
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीSuyash Pandey
Tue, 09 Jun 2026 10:10 PM IST
सार

Ashwini Vaishnaw On Deepfake Content:

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोशल मीडिया पर सेंसरशिप लगाए जाने के आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि सरकार का उद्देश्य केवल डीपफेक और भ्रामक कंटेंट को हटाना है, न कि असली और तथ्यात्मक सामग्री बनाने वाले क्रिएटर्स की अभिव्यक्ति पर रोक लगाना।

Ashwini Vaishnaw Clarifies No Ban on Genuine Creators, Only Deepfakes Being Removed
अश्विनी वैष्णव - फोटो : amarujala.com

    विस्तार

    केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने साफ किया है कि सरकार सोशल मीडिया पर सिर्फ डीपफेक और भ्रामक कंटेंट को ही हटा रही है। असली और सही कंटेंट बनाने वाले क्रिएटर्स पर कोई पाबंदी नहीं है। उन्होंने इंटरनेट पर सेंसरशिप लगाए जाने के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।

    क्या है पूरा मामला और क्यों उठ रहे थे सवाल?

    हाल ही में, यूट्यूब और अन्य प्लेटफॉर्म्स से कई वीडियो हटाए जाने की खबरें सामने आई थीं। कॉकरोच जनता पार्टी के नेता अभिजीत दिपके ने दावा किया था कि CBSE के गलत मूल्यांकन के शिकार एक छात्र के समर्थन में बनाया गया उनका वीडियो सरकार के कहने पर हटा दिया गया। इस घटना के बाद से ही इंटरनेट पर सरकार के जरिए सेंसरशिप लगाए जाने को लेकर बहस छिड़ गई थी।

    आईटी मंत्री ने आरोपों पर क्या जवाब दिया?

    सेंसरशिप और विरोध की आवाज दबाने के दावों को गलत बताते हुए आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, "यह बिल्कुल सच नहीं है। अगर कोई डीपफेक वीडियो झूठी खबरें फैला रहा है, तो उसे हटाना सरकार का फर्ज और जिम्मेदारी है।" उन्होंने कहा कि समाज का आधार संस्थाओं पर विश्वास से बनता है।

    इंटरनेट यूजर्स जो कुछ भी ऑनलाइन देखते हैं, उस पर उनका भरोसा बना रहना चाहिए। सरकार अलग-अलग तकनीकी तरीकों से इसी भरोसे को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। मंत्री ने यह भी बताया कि रोजाना इंटरनेट पर बनने वाले कुल कंटेंट में से डीपफेक और नुकसानदायक कंटेंट का हिस्सा बहुत ही मामूली है, लेकिन इसे हटाना जरूरी है।

    फेक न्यूज के लिए आएगा नया कानून

    अश्विनी वैष्णव ने यह भी जानकारी दी कि सरकार भ्रामक और झूठी जानकारियों से निपटने के लिए एक नए कानून की जरूरत महसूस कर रही है। इसके लिए सरकार जल्द ही टेक इंडस्ट्री के साथ मिलकर काम करेगी।

    आईटी नियमों में संशोधन पर सरकार का रुख

    आईटी नियमों में प्रस्तावित बदलावों पर बात करते हुए वैष्णव ने कहा कि फेक न्यूज चाहे कोई भी फैलाए, उसे इंटरनेट से हटाया जाना चाहिए। इन नए संशोधनों के तहत सूचना और प्रसारण मंत्रालय के पास यह अधिकार होगा कि वह उन आम यूजर्स के कंटेंट को भी ब्लॉक कर सके, जो रजिस्टर्ड न्यूज पब्लिशर नहीं हैं, लेकिन ऑनलाइन खबरें शेयर करते हैं।

    उन्होंने अपनी बात खत्म करते हुए कहा, "सवाल बहुत सीधा है- क्या फेक न्यूज को सोशल मीडिया पर रहने दिया जाना चाहिए या नहीं? फेक न्यूज किसने बनाई, यह कभी मुद्दा था ही नहीं। अगर कोई खबर झूठी है, चाहे वह किसी अखबार ने छापी हो या किसी आम इंसान ने पोस्ट की हो, उसे हटाया ही जाना चाहिए।"

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