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क्या फिर बढ़ेंगी बृजभूषण शरण सिंह की मुश्किलें?: महिला पहलवानों ने दी बरी होने के फैसले को चुनौती, जानिए मामला
Fri, 25 Sep 2026 03:31 PM IST
मयंक त्रिपाठी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: मयंक त्रिपाठी
Updated Fri, 25 Sep 2026 03:31 PM IST
बृजभूषण शरण सिंह के उत्पीड़न मामले में बरी होने के फैसले को चार महिला पहलवानों ने सेशन कोर्ट में चुनौती दी है। महिला पहलवानों ने आरोप लगाया है कि निचली अदालत ने सबूतों का गलत आकलन किया और फैसले में पीड़िताओं के व्यवहार को लेकर रूढ़िवादी सोच का सहारा लिया।
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बृजभूषण शरण सिंह
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को उत्पीड़न मामले में बरी किए जाने के फैसले को महिला पहलवानों ने चुनौती दी है। चार महिला पहलवानों ने दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में अपील दाखिल कर तीन अगस्त को दिए गए बरी करने के आदेश को चुनौती दी है। इस अपील में मामले के सह-आरोपी और डब्ल्यूएफआई के पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर को बरी किए जाने के फैसले को भी चुनौती दी गई है।
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शनिवार को हो सकती है सुनवाई
मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए मामलों) दिग विनय सिंह की अदालत में शनिवार यानी 26 सितंबर को होने की संभावना है। महिला पहलवानों ने अपनी अपील में ट्रायल कोर्ट के फैसले को कानून की नजर में टिकाऊ नहीं बताते हुए कहा है कि मामले में उपलब्ध सबूतों का गलत और चुनिंदा तरीके से आकलन किया गया।
मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए मामलों) दिग विनय सिंह की अदालत में शनिवार यानी 26 सितंबर को होने की संभावना है। महिला पहलवानों ने अपनी अपील में ट्रायल कोर्ट के फैसले को कानून की नजर में टिकाऊ नहीं बताते हुए कहा है कि मामले में उपलब्ध सबूतों का गलत और चुनिंदा तरीके से आकलन किया गया।
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फैसले पर उठाए सवाल
अपील में कहा गया है कि निचली अदालत का आदेश अनुमान और अटकलों पर आधारित है और इसमें स्थापित कानूनी सिद्धांतों को सही तरीके से लागू नहीं किया गया। महिला पहलवानों की ओर से यह भी दावा किया गया है कि फैसले के कुछ हिस्सों में यौन उत्पीड़न की पीड़िताओं के व्यवहार को लेकर पुरानी और रूढ़िवादी धारणाओं को आधार बनाया गया। महिला पहलवानों ने अदालत से अपील पर विचार करने और बृजभूषण शरण सिंह तथा विनोद तोमर को बरी किए जाने के आदेश को चुनौती देने की मांग की है।
अपील में कहा गया है कि निचली अदालत का आदेश अनुमान और अटकलों पर आधारित है और इसमें स्थापित कानूनी सिद्धांतों को सही तरीके से लागू नहीं किया गया। महिला पहलवानों की ओर से यह भी दावा किया गया है कि फैसले के कुछ हिस्सों में यौन उत्पीड़न की पीड़िताओं के व्यवहार को लेकर पुरानी और रूढ़िवादी धारणाओं को आधार बनाया गया। महिला पहलवानों ने अदालत से अपील पर विचार करने और बृजभूषण शरण सिंह तथा विनोद तोमर को बरी किए जाने के आदेश को चुनौती देने की मांग की है।
तीन अगस्त को कोर्ट ने किया था बरी
राउज एवेन्यू कोर्ट की एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार की अदालत ने तीन अगस्त 2026 को बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को मामले में बरी कर दिया था। यह मामला छह महिला पहलवानों की शिकायतों से जुड़ा था। अदालत के फैसले के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने इसे अपने लिए बड़ी राहत बताया था। उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि उन्होंने खुद को कभी अपराधी नहीं माना।
राउज एवेन्यू कोर्ट की एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार की अदालत ने तीन अगस्त 2026 को बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को मामले में बरी कर दिया था। यह मामला छह महिला पहलवानों की शिकायतों से जुड़ा था। अदालत के फैसले के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने इसे अपने लिए बड़ी राहत बताया था। उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि उन्होंने खुद को कभी अपराधी नहीं माना।
2023 में शुरू हुआ था विवाद
बृजभूषण शरण सिंह और महिला पहलवानों से जुड़ा यह मामला वर्ष 2023 में उस समय सुर्खियों में आया था, जब देश की कई नामी महिला पहलवानों ने उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। पहलवानों ने आरोप लगाया था कि 2016 से 2022 के बीच राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं, ट्रेनिंग कैंप, डब्ल्यूएफआई कार्यालय और अन्य स्थानों पर उनके साथ अनुचित व्यवहार और उत्पीड़न किया गया। मामले में बृजभूषण शरण सिंह ने आरोपों से लगातार इनकार किया है। अब महिला पहलवानों की ओर से बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दिए जाने के बाद यह मामला एक बार फिर अदालत में पहुंच गया है।
बृजभूषण शरण सिंह और महिला पहलवानों से जुड़ा यह मामला वर्ष 2023 में उस समय सुर्खियों में आया था, जब देश की कई नामी महिला पहलवानों ने उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। पहलवानों ने आरोप लगाया था कि 2016 से 2022 के बीच राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं, ट्रेनिंग कैंप, डब्ल्यूएफआई कार्यालय और अन्य स्थानों पर उनके साथ अनुचित व्यवहार और उत्पीड़न किया गया। मामले में बृजभूषण शरण सिंह ने आरोपों से लगातार इनकार किया है। अब महिला पहलवानों की ओर से बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दिए जाने के बाद यह मामला एक बार फिर अदालत में पहुंच गया है।