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Chhath Puja 2021: छठ पर्व आज, सीखें लाइफ मैनेजमेंट के सूत्र
Wed, 10 Nov 2021 07:22 AM IST
श्वेता सिंह
धर्म डेस्क, अमरउजाला
धर्म डेस्क, अमरउजाला
Published by: श्वेता सिंह
Updated Wed, 10 Nov 2021 07:22 AM IST
धर्म ग्रंथों के अनुसार सूर्यदेव पूरे संसार का संचार करते हैं। मान्यता के अनुसार सूर्य देव 7 घोड़ों के रथ पर सवार होते हैं। सूर्यदेव के ये 7 रथ सात दिनों का प्रतीक हैं। सूर्य एक प्रत्यक्ष देव के रूप में हम सबके समक्ष रहते हैं और छठ पर्व के अवसर पर हुमएन सूर्य उपासना का मौका मिलता है। आइए आज हम छठ पर्व से जीवन प्रबंधन की कला सीखने का प्रयास करते हैं। आइए जानते हैं क्या हैं वो लाइफ मैनेजमेंट के वो सूत्र जो हमें जीवन जीने की कला सिखाते हैं।
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छठ पर्व पर लाइफ मैनेजमेंट सूत्र
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कार्तिक मास कि शुक्ल पक्ष कि षष्ठी को छठ पर्व मनाया जाएगा। हालांकि छठ पर्व आरंभ हो चुका है। लेकिन मुख्य पर्व 10 नवंबर को मनाया जाएगा। षष्ठी के दिन सूर्य को अर्घ्य देने का विधान है। धर्म ग्रंथों के अनुसार सूर्यदेव पूरे संसार का संचार करते हैं। मान्यता के अनुसार सूर्य देव 7 घोड़ों के रथ पर सवार होते हैं। सूर्यदेव के ये 7 रथ सात दिनों का प्रतीक हैं। सूर्य एक प्रत्यक्ष देव के रूप में हम सबके समक्ष रहते हैं और छठ पर्व के अवसर पर हमें सूर्य उपासना का मौका मिलता है। आइए आज हम छठ पर्व से जीवन प्रबंधन की कला सीखने का प्रयास करते हैं। आइए जानते हैं क्या हैं वो लाइफ मैनेजमेंट के वो सूत्र जो हमें जीवन जीने की कला सिखाते हैं।
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पहला सूत्र स्वच्छता
लोकास्था के महापर्व छठ में स्वच्छता का महत्व उतना ही है जितना महत्व इस पर्व पर आपकी आस्था का है। साफ-सफाई और व्रत का माहौल हमारे जीवन को एक नया आयाम देता है। लाइफ मैनेजमेंट का ये सूत्र हमें सिखाता है कि इस मौके पर हमें अपने अंदर की बुराइयों को नष्ट करने की कोशिश करनी चाहिए। यही इस त्योहार का मूल अर्थ है।
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दूसरा सूत्र समर्पण
हम किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करना चाहते हैं लेकिन उसके लिए बिना संपूर्ण समर्पण के लक्ष्य हासिल कर पाना असंभव है। छठ व्रत सूर्य के प्रति आस्था और सृजनकर्ता के समक्ष समर्पण का ही भाव रखता है । जब हम किसी शक्ति के प्रति समर्पित हो जाते हैं और सीधे ईश्वर से जुड़ जाते हैं और वहीं शक्ति जीवन में हमारा कल्याण भी करती है। तो इस प्रकार का समर्पण हमारे जीवन का एक बहुमूल्य सूत्र है।
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तीसरा सूत्र है सहृदयता
सहृदयता यानि खुले दिल से किसी चीज को स्वीकारना या बांटना। छठ लोकास्था का महापर्व है। इस पर्व में दान का बहुत महत्व है और यह दान खुले दिल से होता। मतलब आप समझ लीजिए कि छठ में इस्तेमाल की जाने वाली किसी भी चीज का खुले दिल से दान किया जाता है या बांटा जाता है। जो लोग असक्षम हैं या जो जरूरतमंद हैं उनकी दिल से मदद करना ही सहृदयता हैं। और यह सहृदयी सूत्र पर्व के माध्यम से हम एक दूसरे से जोड़ता है।
चौथा सूत्र है सत्विकता
कार्तिक मास शुरू होते ही खाने-पीने से लेकर पहनने और सोने तक में सात्विकता रहती है। व्रत के चार दिन पहले से इसमें खास सतर्कता बरती जाती है। इस व्रत में खाने-पीने के साथ ही जीवन शैली में सात्विकता लाने का प्रयास किया जाता है। यही सात्विकता हमें परमेश्वर से जोड़ती है। जीवन में भी हमें ऐसे ही सात्विक सूत्र अपनाने चाहिए।
पांचवां और अंतिम सूत्र है संयम
हम सभी जानते हैं छठ व्रत में संयम कितना जरूरी है। इंद्रियों को संयमित करने की प्रक्रिया तो व्रती पहले से शुरू कर देते हैं। चार दिन का यह पर्व व्रत के दौरान संयमित जीवन का ही संदेश देता है। ये व्रत बिना संयम के संभव ही नहीं है। जो व्यक्ति अपनी इंद्रियों को संयमित कर सकता है, वही अपने जीवन में आगे बढ़कर कुछ कर सकता है।