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विश्व फेफड़ा दिवस: सीओपीडी के 67% मरीजों में नींद के दौरान रुकती है सांस, बढ़ रहा ओवरलैप सिंड्रोम का खतरा

Fri, 25 Sep 2026 11:01 AM IST
Ankesh Dogra आदित्य सोफत, शिमला।
आदित्य सोफत, शिमला। Published by: Ankesh Dogra Updated Fri, 25 Sep 2026 11:01 AM IST
सार
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World Lung Day 2026: शिमला के आईजीएमसी के पल्मोनरी मेडिसिन और कार्डियोलॉजी विभाग के विशेषज्ञों के अध्ययन में सीओपीडी से पीड़ित मरीजों में नींद के दौरान सांस रुकने की समस्या सामने आई है। अध्ययन के अनुसार 67.3 फीसदी मरीजों में स्लीप एपनिया पाया गया। इनमें 62.2 फीसदी मरीजों में ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया और 5.1 फीसदी में सेंट्रल स्लीप एपनिया की पुष्टि हुई।

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World Lung Cancer Day - फोटो : AI

विस्तार

दिनभर की थकान दूर करने और शरीर को आराम देने वाली रातें सांस से जुड़ी बीमारी से पीड़ित मरीजों के लिए परेशानी बढ़ाने वाली हो सकती हैं। शिमला स्थित इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) के विशेषज्ञों के अध्ययन में सीओपीडी से पीड़ित मरीजों में नींद के दौरान सांस रुकने की समस्या बड़ी संख्या में सामने आई है।

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अध्ययन के अनुसार सीओपीडी के 67.3 फीसदी मरीजों में स्लीप एपनिया की समस्या पाई गई। यानी करीब तीन में से दो मरीज नींद के दौरान सामान्य तरीके से सांस नहीं ले पा रहे थे। नींद में बार-बार सांस रुकने और फिर शुरू होने की स्थिति को स्लीप एपनिया कहा जाता है।
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विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी समस्या को लंबे समय तक नजरअंदाज करने से मरीज की परेशानी बढ़ सकती है। खासकर सीओपीडी और स्लीप एपनिया दोनों एक साथ होने पर इसे ओवरलैप सिंड्रोम कहा जाता है।
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62.2 फीसदी मरीजों में ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया
अध्ययन में अलग-अलग प्रकार के स्लीप एपनिया भी सामने आए। 62.2 फीसदी मरीजों में ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया, जबकि 5.1 फीसदी मरीजों में सेंट्रल स्लीप एपनिया की पुष्टि हुई। ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया में नींद के दौरान सांस की नली में रुकावट के कारण सांस बार-बार रुक सकती है। वहीं सेंट्रल स्लीप एपनिया में सांस लेने की प्रक्रिया को नियंत्रित करने वाले संकेतों में समस्या के कारण सांस रुकने की स्थिति बन सकती है। हैरानी की बात यह भी सामने आई कि केवल गंभीर सांस की बीमारी से जूझ रहे मरीजों में ही नहीं, बल्कि अपेक्षाकृत कम गंभीर सांस रोगियों में भी स्लीप एपनिया की समस्या देखी गई।

58 फीसदी मरीजों में फेफड़ों की धमनियों में बढ़ा रक्तचाप
अध्ययन में सीओपीडी मरीजों में फेफड़ों से जुड़ी एक और महत्वपूर्ण समस्या सामने आई। 58 फीसदी मरीजों में फेफड़ों की धमनियों में उच्च रक्तचाप पाया गया। रात के समय सांस लेने में परेशानी और शरीर में ऑक्सीजन की कमी होने से दिल और फेफड़ों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। यही कारण है कि विशेषज्ञ सांस से जुड़ी पुरानी बीमारी वाले मरीजों में नींद से संबंधित समस्याओं की जांच को महत्वपूर्ण मान रहे हैं।

1500 से 3000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों के मरीज शामिल
आईजीएमसी के पल्मोनरी मेडिसिन और कार्डियोलॉजी विभाग के विशेषज्ञों ने हिमाचल के अलग-अलग ऊंचाई वाले क्षेत्रों के मरीजों से संबंधित आंकड़ों का विश्लेषण किया। इसमें 1500 मीटर से लेकर 3000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों के मरीजों को शामिल किया गया। अध्ययन में ऊंचाई के आधार पर स्लीप एपनिया की दर में बड़ा अंतर दर्ज नहीं हुआ। हालांकि अध्ययन में यह भी उल्लेख किया गया है कि पहाड़ी क्षेत्रों में ठंड और लकड़ी के तंदूर या अन्य स्रोतों के धुएं के संपर्क के कारण ऑक्सीजन का स्तर प्रभावित हो सकता है, जिससे सांस के मरीजों के लिए जोखिम बढ़ सकता है।

स्लीप एपनिया के इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
विशेषज्ञों के अनुसार सांस के मरीजों को रात और दिन के समय दिखाई देने वाले कुछ लक्षणों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

  • रात में तेज खर्राटे आना।
  • सोते समय अचानक सांस रुकने से नींद खुलना।
  • सुबह उठने पर सिरदर्द या थकान महसूस होना।
  • दिन के समय अत्यधिक सुस्ती या नींद आना।
  • थोड़ी दूरी चलने पर भी ज्यादा सांस फूलना।
  • पैरों में सूजन आना।
  • गर्दन की नसों में फुलाव दिखाई देना।
  • समय पर स्लीप स्टडी से हो सकती है पहचान


आईजीएमसी के विशेषज्ञ डॉ. सिद्धार्थ तोमर, डॉ. सुनील शर्मा, डॉ. आरएस नेगी, डॉ. सुरभि जग्गी और डॉ. अरविंद कंदोरिया ने बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों में सीओपीडी के मरीजों में स्लीप एपनिया की समस्या को कई बार नजरअंदाज कर दिया जाता है। यदि सांस के मरीज को रात में तेज खर्राटे आते हैं, नींद बार-बार टूटती है या दिन में अत्यधिक सुस्ती रहती है, तो चिकित्सकीय सलाह लेकर पॉलीसोम्नोग्राफी यानी स्लीप स्टडी करवाई जा सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार बीमारी की पहचान शुरुआती चरण में होने पर मरीज की जीवन गुणवत्ता में सुधार के लिए उचित उपचार किया जा सकता है और संबंधित जटिलताओं के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।

धूम्रपान और लकड़ी के धुएं से बचाव जरूरी
विशेषज्ञों ने सांस के मरीजों को धूम्रपान से बचने के साथ-साथ लकड़ी के तंदूर और अंगीठी के धुएं से भी दूरी बनाए रखने की सलाह दी है। सीओपीडी से पीड़ित मरीज चिकित्सक की सलाह के अनुसार नींद की जांच करवा सकते हैं।

यदि ओवरलैप सिंड्रोम की पुष्टि होती है तो चिकित्सक की सलाह के अनुसार रात में सीपीएपी मशीन या ऑक्सीजन सपोर्ट का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा इन्फ्लूएंजा और निमोनिया से बचाव के लिए टीकाकरण की सलाह भी दी गई है।

अध्ययन जुलाई 2026 में अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित
आईजीएमसी विशेषज्ञों का यह अध्ययन अस्पताल में भर्ती और ओपीडी में आने वाले सीओपीडी मरीजों से संबंधित जानकारी के आधार पर किया गया। अध्ययन जुलाई 2026 में अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल ‘स्लीप एंड विजिलेंस’ में प्रकाशित हुआ। अध्ययन ने खास तौर पर पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले सीओपीडी मरीजों में नींद के दौरान सांस रुकने की समस्या और उससे जुड़ी स्वास्थ्य जटिलताओं पर ध्यान आकर्षित किया है।
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