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Shimla News: हिमालयी क्षेत्र में जलवायु अनुकूल पौधे लगाने पर करना होगा काम
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वन अनुसंधान संस्थान में वक्ताओं ने दी सलाह
टिकाऊ वन प्रणालियां विकसित करना जरूरी : कंचन
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमालयी क्षेत्र में वन उत्पादकता बढ़ाने (हरियाली) और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए वृक्ष सुधार तथा आनुवंशिक संसाधनों पर शोध को बढ़ावा देने की जरूरत है। यह बात वक्ताओं ने हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान शिमला में आयोजित क्षेत्रीय अनुसंधान सम्मेलन में कही। सम्मेलन का आयोजन हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान ने वन अनुसंधान संस्थान देहरादून के सहयोग से किया।
भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद की महानिदेशक कंचन देवी ने कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। उन्होंने कहा कि वृक्ष सुधार का लक्ष्य लचीली और टिकाऊ वन प्रणालियां विकसित करना होना चाहिए। उन्होंने जीनोटाइप और पर्यावरण के बीच संबंधों के अध्ययन पर जोर दिया। साथ ही, हिमालयी प्रजातियों के जनसंख्या स्तर पर अध्ययन को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने जलवायु अनुकूल तकनीकों और दीर्घकालीन वृक्ष प्रजनन कार्यक्रमों को बढ़ावा देने की जरूरत बताई। अनुसंधान और वानिकी के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीकों के इस्तेमाल पर भी जोर दिया। हिमाचल प्रदेश वन विभाग के प्रधान मुख्य वन संरक्षक डॉ. संजय सूद ने जैव विविधता और आनुवंशिक विविधता के संरक्षण को जरूरी बताया। उन्होंने स्थानीय और पारंपरिक प्रजातियों के रोपण को बढ़ावा देने की बात कही। संस्थान की निदेशक डॉ. मनीषा थपलियाल ने हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के समक्ष मौजूद चुनौतियों का उल्लेख किया।
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टिकाऊ वन प्रणालियां विकसित करना जरूरी : कंचन
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमालयी क्षेत्र में वन उत्पादकता बढ़ाने (हरियाली) और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए वृक्ष सुधार तथा आनुवंशिक संसाधनों पर शोध को बढ़ावा देने की जरूरत है। यह बात वक्ताओं ने हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान शिमला में आयोजित क्षेत्रीय अनुसंधान सम्मेलन में कही। सम्मेलन का आयोजन हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान ने वन अनुसंधान संस्थान देहरादून के सहयोग से किया।
भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद की महानिदेशक कंचन देवी ने कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। उन्होंने कहा कि वृक्ष सुधार का लक्ष्य लचीली और टिकाऊ वन प्रणालियां विकसित करना होना चाहिए। उन्होंने जीनोटाइप और पर्यावरण के बीच संबंधों के अध्ययन पर जोर दिया। साथ ही, हिमालयी प्रजातियों के जनसंख्या स्तर पर अध्ययन को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने जलवायु अनुकूल तकनीकों और दीर्घकालीन वृक्ष प्रजनन कार्यक्रमों को बढ़ावा देने की जरूरत बताई। अनुसंधान और वानिकी के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीकों के इस्तेमाल पर भी जोर दिया। हिमाचल प्रदेश वन विभाग के प्रधान मुख्य वन संरक्षक डॉ. संजय सूद ने जैव विविधता और आनुवंशिक विविधता के संरक्षण को जरूरी बताया। उन्होंने स्थानीय और पारंपरिक प्रजातियों के रोपण को बढ़ावा देने की बात कही। संस्थान की निदेशक डॉ. मनीषा थपलियाल ने हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के समक्ष मौजूद चुनौतियों का उल्लेख किया।
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