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Shimla News: बसों की कमी से जूझ रहे जिले के डिपुओं को भी जल्द मिलेगी राहत
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इलेक्ट्रिक बसें मिलने के बाद निगम ने की तैयारी
शहरी और ग्रामीण डिपो से अन्य डिपो को दी जा सकती हैं बसें
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) में नई खरीदी इलेक्ट्रिक बसों के वितरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन डिपो में रूट और बसों के अनुपात का अध्ययन किया जाएगा जहां नई बसें उपलब्ध करवाई हैं। इसके बाद यदि किसी डिपो में अतिरिक्त और अच्छी हालत वाली बसें मिलती हैं तो उन्हें बसों की कमी से जूझ रहे अन्य डिपो को दिया जाएगा। परिवहन निगम प्रबंधन इसके लिए कार्ययोजना तैयार कर रहा है।
नई इलेक्ट्रिक बसें जिन डिपो को मिली हैं, उन्हीं डिपो से अतिरिक्त बसें अन्य स्थानों पर भेजी जानी हैं। शिमला डिविजन के शिमला शहरी और शिमला ग्रामीण डिपो को सबसे अधिक 25-25 इलेक्ट्रिक बसें मिलनी हैं। इनमें से 15-15 बसें पहुंच चुकी हैं। वहीं, तारादेवी डिपो को अब तक पांच बसें मिली हैं। इसके अलावा नाहन डिपो को 15 और सोलन डिपो को 20 बसें मिली हैं। इन डिपो में सभी इलेक्ट्रिक बसें पहुंचने के बाद रूटों के अनुपात में बसों की उपलब्धता का आकलन किया जाएगा। यदि किसी डिपो में बसें अतिरिक्त पाई जाती हैं तो उन्हें अन्य डिपो को दिया जा सकता है।
शिमला डिविजन में रामपुर, रोहड़ू, रिकांगपिओ, नेरवा, करसोग और परवाणु ऐसे डिपो हैं, जिन्हें नई इलेक्ट्रिक बसें नहीं मिली हैं। इनमें नेरवा डिपो में बसों की सबसे अधिक कमी चल रही है। इसके अलावा तारादेवी सहित अन्य डिपो में पुरानी बसें होने और कुछ बसों के नीलाम किए जाने के कारण रूटों की तुलना में बसों की कमी बनी हुई है। राजधानी के सिटी ऑपरेशन डिपो और शिमला ग्रामीण डिपो को 25-25 इलेक्ट्रिक बसें मिलनी हैं। ऐसे में डीजल बसों को स्पेयर कर अन्य डिपो को देने पर भी विचार किया जा सकता है। वहीं नाहन और सोलन डिपो से भी अतिरिक्त बसें उपलब्ध होने पर उन्हें जरूरत वाले डिपो को भेजा जा सकता है।
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निगम प्रबंधन के स्तर पर होना है फैसला
एचआरटीसी प्रबंधन स्तर पर जिन डिपो को इलेक्ट्रिक बसें मिली हैं, वहां अतिरिक्त बसें उपलब्ध होने पर उन्हें अन्य जरूरत वाले डिपो को देने का अंतिम फैसला लिया जाना बाकी है। इसके लिए पूरी योजना और प्रक्रिया तय की जानी है। यदि अन्य डिपो को बसें दी जाती हैं तो वे केवल अच्छी स्थिति वाली बसें ही होंगी।
-पवन शर्मा, डीएम टेक्निकल, मुख्यालय
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शहरी और ग्रामीण डिपो से अन्य डिपो को दी जा सकती हैं बसें
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) में नई खरीदी इलेक्ट्रिक बसों के वितरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन डिपो में रूट और बसों के अनुपात का अध्ययन किया जाएगा जहां नई बसें उपलब्ध करवाई हैं। इसके बाद यदि किसी डिपो में अतिरिक्त और अच्छी हालत वाली बसें मिलती हैं तो उन्हें बसों की कमी से जूझ रहे अन्य डिपो को दिया जाएगा। परिवहन निगम प्रबंधन इसके लिए कार्ययोजना तैयार कर रहा है।
नई इलेक्ट्रिक बसें जिन डिपो को मिली हैं, उन्हीं डिपो से अतिरिक्त बसें अन्य स्थानों पर भेजी जानी हैं। शिमला डिविजन के शिमला शहरी और शिमला ग्रामीण डिपो को सबसे अधिक 25-25 इलेक्ट्रिक बसें मिलनी हैं। इनमें से 15-15 बसें पहुंच चुकी हैं। वहीं, तारादेवी डिपो को अब तक पांच बसें मिली हैं। इसके अलावा नाहन डिपो को 15 और सोलन डिपो को 20 बसें मिली हैं। इन डिपो में सभी इलेक्ट्रिक बसें पहुंचने के बाद रूटों के अनुपात में बसों की उपलब्धता का आकलन किया जाएगा। यदि किसी डिपो में बसें अतिरिक्त पाई जाती हैं तो उन्हें अन्य डिपो को दिया जा सकता है।
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शिमला डिविजन में रामपुर, रोहड़ू, रिकांगपिओ, नेरवा, करसोग और परवाणु ऐसे डिपो हैं, जिन्हें नई इलेक्ट्रिक बसें नहीं मिली हैं। इनमें नेरवा डिपो में बसों की सबसे अधिक कमी चल रही है। इसके अलावा तारादेवी सहित अन्य डिपो में पुरानी बसें होने और कुछ बसों के नीलाम किए जाने के कारण रूटों की तुलना में बसों की कमी बनी हुई है। राजधानी के सिटी ऑपरेशन डिपो और शिमला ग्रामीण डिपो को 25-25 इलेक्ट्रिक बसें मिलनी हैं। ऐसे में डीजल बसों को स्पेयर कर अन्य डिपो को देने पर भी विचार किया जा सकता है। वहीं नाहन और सोलन डिपो से भी अतिरिक्त बसें उपलब्ध होने पर उन्हें जरूरत वाले डिपो को भेजा जा सकता है।
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निगम प्रबंधन के स्तर पर होना है फैसला
एचआरटीसी प्रबंधन स्तर पर जिन डिपो को इलेक्ट्रिक बसें मिली हैं, वहां अतिरिक्त बसें उपलब्ध होने पर उन्हें अन्य जरूरत वाले डिपो को देने का अंतिम फैसला लिया जाना बाकी है। इसके लिए पूरी योजना और प्रक्रिया तय की जानी है। यदि अन्य डिपो को बसें दी जाती हैं तो वे केवल अच्छी स्थिति वाली बसें ही होंगी।
-पवन शर्मा, डीएम टेक्निकल, मुख्यालय