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आईआईटी मंडी की नई तकनीक: खोपड़ी के एक्सरे और तस्वीर से चेहरा तलाशेगा एआई मॉडल

Sat, 10 Oct 2026 05:31 AM IST
Krishan Singh राकेश राणा, संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी।
राकेश राणा, संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी। Published by: Krishan Singh Updated Sat, 10 Oct 2026 05:31 AM IST
सार
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भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी के शोधकर्ता ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की मदद से नई तकनीक विकसित की है। यह तकनीक खोपड़ी के एक्सरे और चेहरे की तस्वीरों की तुलना कर संभावित पहचान वाले चेहरों की सूची तैयार कर सकती है। 

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IIT Mandi's new technology: AI model to identify faces using skull X-rays and photographs.
आईआईटी मंडी। - फोटो : संवाद

विस्तार

देश में हर साल करीब 50 हजार शवों की पहचान नहीं हो पाने की चुनौती के बीच भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी के शोधकर्ता ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की मदद से नई तकनीक विकसित की है। यह तकनीक खोपड़ी के एक्सरे और चेहरे की तस्वीरों की तुलना कर संभावित पहचान वाले चेहरों की सूची तैयार कर सकती है। इससे पुलिस और फॉरेंसिक विशेषज्ञों को अज्ञात शवों की पहचान के लिए जांच का दायरा सीमित करने में मदद मिल सकती है। इस शोध का नाम स्पॉट फेस मॉडल है। इसे आईआईटी मंडी के स्कूल ऑफ कंप्यूटिंग एंड इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के विजन इंटेलिजेंस एवं मशीन लर्निंग समूह में पीएचडी शोधार्थी रवि शंकर प्रसाद ने सहायक प्रोफेसर डॉ. दिनेश सिंह के मार्गदर्शन में किया है। स्पॉट फेस शोधपत्र अंतरराष्ट्रीय पैटर्न रिकग्निशन सम्मेलन (आईसीपीआर) 2026 की शोध कार्यवाही में प्रकाशित हुआ है।

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शोध पर काम अगस्त 2023 में शुरू हुआ था
शोधपत्र का प्रारंभिक संस्करण 14 जनवरी 2026 को आर्काइव पर जारी किया गया था। इस शोध पर काम अगस्त 2023 में शुरू हुआ था। अब शोधकर्ता मॉडल की सटीकता बढ़ाने और बड़े डेटासेट पर इसका परीक्षण करने में जुटे हैं। एआई मॉडल को खोपड़ी की एक्सरे और संबंधित चेहरे की तस्वीरों के उदाहरणों से प्रशिक्षित किया गया है। यह तस्वीरों को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर उनके आकार, बनावट और आपसी संबंधों का विश्लेषण करता है। इसके बाद दोनों तरह की तस्वीरों में समानताएं तलाशकर संभावित चेहरों को प्राथमिकता के क्रम में रखता है। इस तकनीक में ग्राफ न्यूरल नेटवर्क और दो विशेष प्रक्रियाओं का इस्तेमाल किया गया है, जिन्हें क्रॉस-अटेंशन और ऑप्टिमल ट्रांसपोर्ट कहा जाता है। इनका काम खोपड़ी और चेहरे की तस्वीरों में मौजूद संबंधित विशेषताओं को आपस में जोड़कर तुलना बेहतर बनाना है। पारंपरिक तरीके में फॉरेंसिक विशेषज्ञ खोपड़ी के आधार पर मिट्टी से चेहरे की आकृति तैयार कर सकते हैं।

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भारतीय खोपड़ी और चेहरे की 102 जोड़ियों पर परीक्षण
आईआईटी मंडी के भारतीय खोपड़ी-चेहरा डेटासेट में 102 जोड़ियां शामिल हैं। इनमें खोपड़ी की एक्सरे और संबंधित चेहरे की तस्वीरें हैं। परीक्षण में मॉडल ने 50 प्रतिशत मामलों में सही चेहरे को पहली रैंक पर रखा। वहीं, 72 प्रतिशत मामलों में सही चेहरा शीर्ष पांच संभावित विकल्पों में शामिल था। शोधकर्ताओं ने चीनी चेहरे के स्केच और तस्वीरों के 188 जोड़ों वाले डेटासेट पर भी परीक्षण किया। इसमें सही चेहरे को पहली रैंक पर रखने की दर 88.4 प्रतिशत और शीर्ष पांच में सही चेहरा मिलने की दर 89 प्रतिशत रही। दोनों डेटासेट के परिणामों में अंतर से पता चलता है कि खोपड़ी और चेहरे के बीच मिलान करना स्केच और चेहरे की तुलना से अधिक चुनौतीपूर्ण है।

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कोट बड़े डेटासेट पर होगा परीक्षण
भारत की आबादी में विविधता को देखते हुए भारतीय लोगों की खोपड़ी और चेहरे से जुड़े बड़े डेटासेट तैयार करना महत्वपूर्ण है। आगे मॉडल की सटीकता सुधारने और अधिक विविध आंकड़ों पर इसकी जांच करने पर काम किया जा रहा है। फिलहाल इसका परीक्षण शोध के स्तर पर डेटासेट के माध्यम से हुआ है। वास्तविक आपराधिक मामलों में इसकी उपयोगिता और विश्वसनीयता साबित करने के लिए आगे परीक्षण जरूरी हैं। -डॉ. दिनेश सिंह, सहायक प्रोफेसर आईआईटी मंडी

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