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Himachal News: 15 साल बाद भी पूरी तरह लागू नहीं हुआ हिमाचल का सर्विस गारंटी एक्ट, जानें इसके बारे विस्तार से
Sun, 19 Jul 2026 10:32 AM IST
Ankesh Dogra
सुरेश शांडिल्य, शिमला।
सुरेश शांडिल्य, शिमला।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Sun, 19 Jul 2026 10:32 AM IST
Himachal Public Service Guarantee Act: हिमाचल प्रदेश में 2011 में लागू पब्लिक सर्विस गारंटी एक्ट 15 साल बाद भी पूरी तरह प्रभावी नहीं हो पाया है। कई विभाग नई डिजिटल सेवाओं को अधिनियम के तहत अधिसूचित नहीं कर पाए हैं। सरकार अगस्त तक सभी विभागों के सेवा पोर्टलों को ऑटोमेटेड करने की तैयारी में है, जिससे तय समय में सेवाएं न मिलने पर शिकायत स्वतः दर्ज हो सकेगी।
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हिमाचल में 15 साल बाद भी सर्विस गारंटी एक्ट अधूरा।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
वर्ष 2011 में धूमल सरकार के कार्यकाल में लागू हिमाचल प्रदेश पब्लिक सर्विस गारंटी एक्ट करीब 15 वर्ष बाद भी पूरी तरह धरातल पर नहीं उतर पाया है। आम लोगों को तय समयसीमा में सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए बनाए गए इस कानून के तहत अधिकांश विभागों ने वर्षों से सेवाओं को अपडेट नहीं किया है। सूचना प्रौद्योगिकी के दौर में अधिकांश सेवाओं के ऑनलाइन होने के बावजूद कई विभाग नई सेवाओं को अधिसूचित करने में पीछे हैं। अधिनियम के तहत सभी विभागों को अपनी सेवाएं अधिसूचित कर उनके लिए समयसीमा निर्धारित करनी थी।
शुरुआती वर्षों में राजस्व, परिवहन, नगर निकाय, पंचायती राज, ग्रामीण विकास, उद्योग, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, बिजली, जल शक्ति, स्वास्थ्य और शिक्षा समेत कई विभागों ने अपनी सेवाएं अधिसूचित कीं। इनमें आय, जाति, हिमाचली बोनाफाइड, चरित्र प्रमाणपत्र, जन्म एवं मृत्यु प्रमाणपत्र, ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन संबंधी सेवाएं, बिजली व पेयजल कनेक्शन, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, राशन कार्ड, उद्योगों से जुड़ी मंजूरियां और विभिन्न विभागों की एनओसी जैसी सेवाएं शामिल हैं। इन सेवाओं के लिए निर्धारित समयसीमा तय की गई, जिससे लोगों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।
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शुरुआती वर्षों में राजस्व, परिवहन, नगर निकाय, पंचायती राज, ग्रामीण विकास, उद्योग, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, बिजली, जल शक्ति, स्वास्थ्य और शिक्षा समेत कई विभागों ने अपनी सेवाएं अधिसूचित कीं। इनमें आय, जाति, हिमाचली बोनाफाइड, चरित्र प्रमाणपत्र, जन्म एवं मृत्यु प्रमाणपत्र, ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन संबंधी सेवाएं, बिजली व पेयजल कनेक्शन, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, राशन कार्ड, उद्योगों से जुड़ी मंजूरियां और विभिन्न विभागों की एनओसी जैसी सेवाएं शामिल हैं। इन सेवाओं के लिए निर्धारित समयसीमा तय की गई, जिससे लोगों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।
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हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में अधिकांश विभागों ने नई ऑनलाइन सेवाओं को अधिनियम के दायरे में शामिल नहीं किया है। कई विभागों की अधिसूचित सेवाओं की सूची वर्षों पुरानी है, जबकि अब बड़ी संख्या में सेवाएं डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही हैं। पब्लिक सर्विस गारंटी एक्ट के तहत द्वितीय अपील का अधिकार राज्य मुख्य सूचना आयुक्त और राज्य सूचना आयुक्तों के पास है। इन पदों के लंबे समय से रिक्त रहने और सूचना आयोग में पहले से लंबित आरटीआई अपीलों के कारण अपीलों के निस्तारण की व्यवस्था भी प्रभावित हुई है।
अगस्त तक सभी विभागों को इस प्रणाली से जोड़ने का लक्ष्य
सभी विभागों के सेवा पोर्टलों को ऑटोमेटेड बनाया जा रहा है। उद्योग विभाग में यह व्यवस्था शुरू हो चुकी है। लक्ष्य है कि अगस्त तक सभी विभाग इस प्रणाली से जुड़ जाएं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद यदि किसी सेवा का निस्तारण निर्धारित समयसीमा में नहीं होगा तो संबंधित शिकायत स्वतः पोर्टल पर दर्ज हो जाएगी। नई प्रणाली लागू होने के बाद पब्लिक सर्विस गारंटी एक्ट का प्रभावी क्रियान्वयन संभव होगा और सेवाओं की जवाबदेही भी बढ़ेगी। दूसरी बार की अपीलों की सुनवाई के लिए राज्य मुख्य सूचना आयुक्त व सूचना आयुक्त के पद भी भरे जा रहे हैं। -ए. शाइनामोल, सचिव प्रशासनिक सुधार एवं प्रशिक्षण विभाग
अगस्त तक सभी विभागों को इस प्रणाली से जोड़ने का लक्ष्य
सभी विभागों के सेवा पोर्टलों को ऑटोमेटेड बनाया जा रहा है। उद्योग विभाग में यह व्यवस्था शुरू हो चुकी है। लक्ष्य है कि अगस्त तक सभी विभाग इस प्रणाली से जुड़ जाएं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद यदि किसी सेवा का निस्तारण निर्धारित समयसीमा में नहीं होगा तो संबंधित शिकायत स्वतः पोर्टल पर दर्ज हो जाएगी। नई प्रणाली लागू होने के बाद पब्लिक सर्विस गारंटी एक्ट का प्रभावी क्रियान्वयन संभव होगा और सेवाओं की जवाबदेही भी बढ़ेगी। दूसरी बार की अपीलों की सुनवाई के लिए राज्य मुख्य सूचना आयुक्त व सूचना आयुक्त के पद भी भरे जा रहे हैं। -ए. शाइनामोल, सचिव प्रशासनिक सुधार एवं प्रशिक्षण विभाग