हिमाचल में नए जिलों की कवायद तेज: सरकार ने गठित किया चार सदस्यीय आयोग, छह महीने में आएगी रिपोर्ट
हिमाचल प्रदेश में प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव को लेकर सरकार ने चार सदस्यीय आयोग का गठन किया है। आयोग की अध्यक्षता हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश धर्म चंद चौधरी करेंगे। आयोग जिलों, उपमंडलों, तहसीलों, उपतहसीलों और विकास खंडों की मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा करेगा। उसे छह महीने के भीतर सरकार को रिपोर्ट देनी होगी। हालांकि, अभी नए जिले बनाने का कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
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हिमाचल प्रदेश में नए जिले बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य सरकार ने बुधवार को प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश धर्मचंद चौधरी की अध्यक्षता में चार सदस्यीय आयोग का गठन किया है। आयोग छह महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा। इसी रिपोर्ट के आधार पर नए जिले बनाने और मौजूदा प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन पर फैसला लिया जाएगा। मुख्य सचिव केके पंत ने आयोग के गठन की अधिसूचना जारी कर दी है। आयोग में अधिवक्ता विशाल पंवार और सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी राजेश शर्मा को सदस्य बनाया गया है, जबकि निदेशक भू-अभिलेख सदस्य सचिव होंगे।
आयोग जिलों के साथ उपमंडलों, तहसीलों, उपतहसीलों, विकास खंडों और विभिन्न विभागों की अन्य प्रशासनिक इकाइयों की मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा करेगा। इसके बाद नई इकाइयां बनाने, मौजूदा इकाइयों के विलय, विभाजन या पुनर्गठन की जरूरत का आकलन किया जाएगा। आयोग जनसंख्या, भौगोलिक परिस्थितियों, प्रशासनिक दक्षता और जनसुविधा को ध्यान में रखकर अपनी सिफारिशें तैयार करेगा। इसके लिए जनप्रतिनिधियों, संबंधित विभागों और अन्य पक्षों से विचार-विमर्श भी किया जाएगा। साथ ही नए जिलों और अन्य प्रशासनिक इकाइयों के गठन पर भवन, कार्यालय, कर्मचारियों और बुनियादी सुविधाओं के लिए होने वाले खर्च का अनुमान भी लगाया जाएगा।
शिमला में रहेगा आयोग का मुख्यालय
आयोग का मुख्यालय शिमला में होगा। राजस्व विभाग और संबंधित जिलों के उपायुक्त आयोग को जरूरी दस्तावेज और जनसंख्या संबंधी आंकड़े उपलब्ध करवाएंगे। सामान्य प्रशासन विभाग कार्यालय, मंत्रालयी स्टाफ, वाहन और अन्य आवश्यक सुविधाएं मुहैया करवाएगा। छह महीने के भीतर रिपोर्ट सौंपने के बाद सरकार प्रशासनिक पुनर्गठन पर अगला निर्णय लेगी। नए जिले या अन्य प्रशासनिक इकाइयां बनने से दूरदराज के क्षेत्रों के लोगों को जिला मुख्यालय और सरकारी कार्यालयों तक पहुंचने में सुविधा मिल सकती है। इससे प्रशासनिक और राजस्व संबंधी कार्यों के लिए लोगों की दूरी और समय कम होने की संभावना है।
देहरा, नूरपुर, पालमपुर और सुंदरनगर सहित कई क्षेत्रों की चर्चा
हिमाचल में लंबे समय से देहरा, नूरपुर, पालमपुर, सुंदरनगर, रामपुर, महासू और करसोग को जिला बनाने की मांग और चर्चा होती रही है। जनसंख्या, विधानसभा क्षेत्रों और प्रशासनिक विस्तार के लिहाज से बड़े जिला कांगड़ा से देहरा और नूरपुर को अलग कर जिले बनाए जा सकते हैं। इसी तरह मंडी जिले के सुंदरनगर और शिमला जिले के रामपुर को अलग जिला बनाने की मांग भी समय-समय पर उठती रही है। हालांकि, इन क्षेत्रों को जिला बनाने पर अंतिम फैसला आयोग की सिफारिशों और सरकार के निर्णय के बाद ही होगा। बता दें कि प्रदेश में अभी 12 जिले हैं।
नए जिले बनने से खर्च भी बढ़ेगा
जनता की जरूरतों के अनुसार जिलों का गठन और प्रशासनिक पुनर्गठन अच्छा कदम है। इससे जिला मुख्यालयों से दूर रहने वाले लोगों को सुविधा मिलेगी। हालांकि, नए जिले बनाने से प्रशासनिक खर्च भी बढ़ेगा। हिमाचल की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है। इससे पहले भी नए जिले बनाने के प्रयास हुए, लेकिन वे सिरे नहीं चढ़ सके। डॉ. श्रीकांत बाल्दी, पूर्व मुख्य सचिव, हिमाचल सरकार