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हिमाचल में आएगी पहली पोषण नीति: मिलावटखोरों पर कसेगा शिकंजा, दूध उत्पादकों को छह रुपये प्रति लीटर प्रोत्साहन

Sun, 11 Oct 2026 12:09 PM IST
Ankesh Dogra अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Ankesh Dogra Updated Sun, 11 Oct 2026 12:09 PM IST
सार
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हिमाचल प्रदेश सरकार पहली पोषण नीति लाने की तैयारी कर रही है, जिसके तहत खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांच और मिलावट पर कार्रवाई सख्त करने पर जोर रहेगा। 

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Himachal Nutrition Policy Milk Incentive Hike Cabinet Decisions
हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में लोगों को शुद्ध, सुरक्षित और पौष्टिक भोजन उपलब्ध करवाने के लिए पहली बार पोषण नीति बनाई जाएगी। राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इस संबंध में विस्तृत प्रस्तुति दी गई है। अब सरकार इसके आधार पर नीति का मसौदा तैयार करेगी। प्रस्ताव को विधानसभा के आगामी शीतकालीन सत्र में लाया जाएगा। इसके पारित होने के बाद इसे पूरे प्रदेश में लागू करने की योजना है।  इस नीति का मुख्य उद्देश्य खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकना और घटिया व अस्वस्थ खाद्य उत्पादों की बिक्री पर अंकुश लगाना है।  इसके लिए खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांचने वाली प्रयोगशालाओं और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर रहेगा। मिलावट करने वालों और सड़े-गले खाद्य पदार्थ बेचने वालों के खिलाफ कड़े जुर्माने और कानूनी कार्रवाई के मानक तय करने की भी योजना है। 

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सरकारी योजनाओं के तहत मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता पर भी नजर रखी जाएगी। मिड-डे मील, आंगनबाड़ी और राशन डिपो में वितरित होने वाले खाद्यान्नों के पोषण स्तर की सख्त निगरानी होगी।  पैकेट में बिकने वाले खाद्य पदार्थों में नमक, चीनी और ट्रांस फैट की निर्धारित सीमा का पालन सुनिश्चित करने पर भी ध्यान दिया जाएगा। नीति लागू होने से दूध, तेल, मसालों और मिठाइयों में मिलावट रोकने में मदद मिलने की उम्मीद है।  दूषित भोजन से होने वाली पेट संबंधी बीमारियों और फूड प्वॉइजनिंग के खतरे को कम करने के साथ मोटापा, मधुमेह और हृदय रोगों से बचाव पर भी जोर रहेगा। बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को बेहतर पोषण उपलब्ध करवाकर कुपोषण और एनीमिया जैसी समस्याओं से निपटने का लक्ष्य है।

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सोलन में 603 करोड़ की अतिरिक्त धनराशि मंजूर : राज्य मंत्रिमंडल की इस बैठक में सोलन जिला में सतत विकास एवं जलवायु अनुकूल वर्षा आधारित कृषि के लिए संचालित एकीकृत विकास परियोजना के तहत वर्तमान में कार्यरत ग्राम पंचायतों, आसपास की अतिरिक्त ग्राम पंचायतों में परियोजना गतिविधियों को जारी रखने और विस्तारित करने के लिए 603 करोड़ रुपये की अतिरिक्त धनराशि को स्वीकृति दी। 
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एकीकृत विकास परियोजना के तहत 603 करोड़ रुपये मंजूर 
दूध उत्पादकों को राहत देते हुए मंत्रिमंडल ने दूध प्रोत्साहन योजना के तहत दी जाने वाली राशि तीन रुपये से बढ़ाकर छह रुपये प्रति लीटर कर दी। इससे हजारों किसानों को लाभ मिलेगा। सरकारी विभागों को अपनी जरूरत का दूध और दुग्ध उत्पाद मिल्कफेड से खरीदने के निर्देश देने को भी मंजूरी दी गई। इससे दुग्ध उत्पादकों को बाजार उपलब्ध कराने व उनकी उपज की बिक्री सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी। सोलन में वर्षा आधारित कृषि को जलवायु परिवर्तन के अनुकूल और टिकाऊ बनाने के लिए चल रही एकीकृत विकास परियोजना के तहत 603 करोड़ की अतिरिक्त धनराशि मंजूर की गई। यह परियोजना और इसके दायरे को बढ़ाने के लिए खर्च होगी। इसमें वर्तमान ग्राम पंचायतों के साथ आसपास की अतिरिक्त ग्राम पंचायतों में भी परियोजना के कार्यों का विस्तार किया जाएगा।

मोटर वाहन निरीक्षक और जेओए-आईटी के पद भरेंगे
निर्वाचन विभाग में 13 निर्वाचन कानूनगो के पद भरे जाएंगे। फोरेंसिक सेवा निदेशालय में विभिन्न श्रेणियों के पांच पद सृजित किए जाएंगे। कोषागार, लेखा एवं लॉटरी निदेशालय में सात पद सृजित कर भरे जाएंगे। अलग भर्ती निदेशालय के पहले चरण में विभिन्न श्रेणियों के 14 पद सृजित कर भरे जाएंगे। वन विभाग में सहायक वन रक्षकों की भर्ती के लिए अलग नीति को भी मंजूरी दी गई। कांगड़ा जिले के देहरा स्थित क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय के लिए एक मोटर वाहन निरीक्षक और एक जेओए-आईटी का पद भरा जाएगा। शिमला जिले के कुपवी में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए एक जेओए-आईटी और एक बहुउद्देश्यीय कर्मचारी की नियुक्ति होगी।

जलाशयों के मछुआरों को 100 रुपये किलो एमएसपी
मंत्रिमंडल ने मुख्यमंत्री मछुआरा सहायता योजना शुरू करने का निर्णय लिया। इसके तहत जलाशयों में मछली पकड़ने वाले मछुआरों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य दिलाने के लिए 100 रुपये प्रति किलो न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया जाएगा। यदि नीलामी में मछली की कीमत 100 रुपये प्रति किलो से कम रहती है तो राज्य सरकार अधिकतम 20 रुपये प्रति किलो तक सब्सिडी देगी। ट्राउट मछली पालकों को प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए एक करोड़ रुपये के बजट वाली ट्राउट जोखिम निधि योजना लागू करने को भी मंजूरी दी गई।
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