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Himachal News : हिमाचल के सभी जिला मुख्यालयों तक शुरू होंगी हेलिकॉप्टर सेवाएं, सीएम सुक्खू का बड़ा एलान
Mon, 20 Jul 2026 09:46 AM IST
Ankesh Dogra
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Mon, 20 Jul 2026 09:46 AM IST
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने घोषणा की कि भविष्य में हिमाचल प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों को हेलिकॉप्टर सेवाओं से जोड़ा जाएगा। उन्होंने नई औद्योगिक नीति, कांगड़ा एयरपोर्ट विस्तार, चंडीगढ़-बद्दी रेललाइन, पंजाब को बिजली आपूर्ति और कंडाघाट आईटी पार्क जैसी योजनाओं की जानकारी दी। साथ ही बताया कि भारतनेट के तहत 705 पंचायतों को डिजिटल नेटवर्क से जोड़ा जा चुका है।
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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में हेलीपोर्ट का निर्माण कर रही है। भविष्य में सभी जिला मुख्यालयों के लिए हेलिकॉप्टर सेवाएं शुरू की जाएंगी। पर्यटन और निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कांगड़ा हवाई अड्डे का विस्तार किया जा रहा है। इससे पर्यटकों और औद्योगिक क्षेत्र दोनों को लाभ मिलेगा। सुक्खू ने चंडीगढ़ में लीडरशिप कॉन्क्लेव में निवेशकों को हिमाचल प्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल में नई औद्योगिक नीति लाई जा रही है। इसमें निवेशकों को राहत दी जाएगी।
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सस्ती बिजली, पानी के अलावा और अन्य मूलभूत सुविधाएं समय पर उपलब्ध होंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश चंडीगढ़ में अपने 7.19 प्रतिशत हिस्से को प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है और इस विषय पर लगातार संवाद जारी है। चंडीगढ़ से बद्दी तक रेललाइन का निर्माण किया जा रहा है, इसमें भूमि अधिग्रहण और निर्माण लागत का 50 प्रतिशत व्यय राज्य सरकार की ओर से वहन किया जा रहा है। इस परियोजना के आगामी तीन वर्षों में पूर्ण होने की संभावना है। पंजाब को हिमाचल का बड़ा भाई बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह समझौता पंजाब के साथ हमारे रिश्ते को और सुदृढ़ करेगा।
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हिमाचल प्रदेश को पावर सरप्लस राज्य के रूप में रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब को बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए तीन वर्षों का पावर परचेज एग्रीमेंट किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश आईटी क्षेत्र को विस्तार प्रदान करने के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान कर रहा है। इसके अतिरिक्त सोलन जिले के कंडाघाट में आईटी पार्क विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने से पूर्व प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों से राज्य को लगभग 4,000 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होता था, लेकिन जीएसटी लागू होने के बाद यह घटकर लगभग 150 से 200 करोड़ रुपये रह गया है। प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार अपनी औद्योगिक नीतियों में आवश्यक संशोधन कर रही है।
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जनजातीय क्षेत्रों में डिजिटल गति भारत नेट से जुड़ीं 705 पंचायतें
हिमाचल प्रदेश सरकार ने जनजातीय क्षेत्रों में डिजिटल कनेक्टिविटी, कृषि, स्वरोजगार और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने रविवार को कहा कि सरकार जनजातीय विकास के लिए निर्धारित ट्राइबल सब-प्लान (एसटीपी) के माध्यम से इन क्षेत्रों में डिजिटल और आर्थिक परिवर्तन को गति दे रही है, ताकि दुर्गम इलाकों के लोगों को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।
मुख्यमंत्री ने बताया कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले जनजातीय क्षेत्रों में भारतनेट परियोजना को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। इसके तहत अब तक 3,793 किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर बिछाया जा चुका है, जिससे 705 ग्राम पंचायतें डिजिटल नेटवर्क से जुड़ गई हैं। उन्होंने कहा कि इससे ई-गवर्नेंस, टेलीमेडिसिन और अन्य ऑनलाइन सेवाओं का लाभ अब दूरस्थ गांवों तक पहुंच रहा है।
बर्फबारी के दौरान भी संचार और सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने में यह परियोजना अहम भूमिका निभाएगी। आर्थिक सशक्तीकरण के लिए सरकार ने पांगी घाटी को प्रदेश का पहला प्राकृतिक खेती उपमंडल घोषित किया है। पारंपरिक फसलों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से पांगी में जौ का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 80 रुपये प्रति किलोग्राम निर्धारित किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की आय में वृद्धि होगी।
हिमाचल प्रदेश सरकार ने जनजातीय क्षेत्रों में डिजिटल कनेक्टिविटी, कृषि, स्वरोजगार और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने रविवार को कहा कि सरकार जनजातीय विकास के लिए निर्धारित ट्राइबल सब-प्लान (एसटीपी) के माध्यम से इन क्षेत्रों में डिजिटल और आर्थिक परिवर्तन को गति दे रही है, ताकि दुर्गम इलाकों के लोगों को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।
मुख्यमंत्री ने बताया कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले जनजातीय क्षेत्रों में भारतनेट परियोजना को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। इसके तहत अब तक 3,793 किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर बिछाया जा चुका है, जिससे 705 ग्राम पंचायतें डिजिटल नेटवर्क से जुड़ गई हैं। उन्होंने कहा कि इससे ई-गवर्नेंस, टेलीमेडिसिन और अन्य ऑनलाइन सेवाओं का लाभ अब दूरस्थ गांवों तक पहुंच रहा है।
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