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Shimla News: कहीं भाइयों ने छीना अधिकार, तो कहीं ससुराल वालों ने नहीं दिया हिस्सा
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एकल महिलाओं के भूमि अधिकार पर समरहिल के सांगटी में हुई गोष्ठी, महिलाओं ने सुनाई आपबीती
विशेषज्ञों ने दी अधिकारों की जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के समरहिल के सांगटी क्षेत्र स्थित एसीएसआईटी में सोसायटी फॉर रूरल डेवलपमेंट एंड एक्शन की ओर से बुधवार को एकल महिलाओं के भूमि अधिकारों को लेकर गोष्ठी आयोजित की गई। महिलाओं ने अपनी आपबीती सुनाई। एक महिला ने बताया कि उसने सारा जीवन अपने माता-पिता की सेवा की, लेकिन बाद में उसके भाइयों ने उसके साथ धोखाधड़ी कर न केवल उसकी, बल्कि उसकी बहनों की जमीन भीअपने नाम करवा ली। इस पर पैनल में मौजूद विशेषज्ञों ने मौके पर ही उन्हें समाधान के उपाय बताए। इसी तरह कई अन्य महिलाओं ने बताया कि उनके ससुराल पक्ष ने उनके साथ धोखाधड़ी की और उनके बच्चों का हक भी छीन लिया। इस दौरान पैनलिस्टों ने बताया कि हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम 2005 के तहत बेटी को भी बेटे के बराबर पैतृक संपत्ति में समान अधिकार प्राप्त है। पिता की स्वअर्जित संपत्ति में भी बेटी का हक है। हिमाचल प्रदेश भू-राजस्व अधिनियम के तहत भी महिलाओं के नाम जमीन का इंतकाल और कब्जा सुनिश्चित किया गया है। वहीं विधवा महिला को पति की संपत्ति में हिस्सा और बच्चों के भरण-पोषण का अधिकार है। उन्होंने बताया कि यदि किसी महिला के साथ धोखाधड़ी कर जमीन हड़पी गई है तो वह राजस्व अदालत, लोक अदालत और महिला आयोग में शिकायत कर सकती है। इसके लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से मुफ्त कानूनी सहायता भी उपलब्ध है। गोष्ठी में राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष विद्या नेगी और एकल नारी शक्ति संगठन की प्रदेशाध्यक्ष निर्मल चंदेल, लॉ ऑफिसर सहित कई पैनलिस्ट मौजूद रहे। पैनलिस्टों ने महिलाओं को उनके अधिकारों से अवगत करवाया और भूमि पर महिलाओं के लिए मौजूद कानूनी प्रावधानों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस दौरान पेनल में एसआरडीए के प्रबंध निदेशक अमर सिंह कौंडल, हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता संजय गांधी, महिला एवं बाल विकाल विभाग से मीना, हाईकोर्ट की अधिवक्ता अंबिका कोतवाल, कृषि विभाग से उदय वर्मा, प्रोजेक्ट समन्वयक संध्या गौतम, ज्योत्सना, सुखदेव विश्वप्रेमी, राजस्व विभाग से पटवारी नरेश कुमार मौजूद रहे।
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विशेषज्ञों ने दी अधिकारों की जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के समरहिल के सांगटी क्षेत्र स्थित एसीएसआईटी में सोसायटी फॉर रूरल डेवलपमेंट एंड एक्शन की ओर से बुधवार को एकल महिलाओं के भूमि अधिकारों को लेकर गोष्ठी आयोजित की गई। महिलाओं ने अपनी आपबीती सुनाई। एक महिला ने बताया कि उसने सारा जीवन अपने माता-पिता की सेवा की, लेकिन बाद में उसके भाइयों ने उसके साथ धोखाधड़ी कर न केवल उसकी, बल्कि उसकी बहनों की जमीन भीअपने नाम करवा ली। इस पर पैनल में मौजूद विशेषज्ञों ने मौके पर ही उन्हें समाधान के उपाय बताए। इसी तरह कई अन्य महिलाओं ने बताया कि उनके ससुराल पक्ष ने उनके साथ धोखाधड़ी की और उनके बच्चों का हक भी छीन लिया। इस दौरान पैनलिस्टों ने बताया कि हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम 2005 के तहत बेटी को भी बेटे के बराबर पैतृक संपत्ति में समान अधिकार प्राप्त है। पिता की स्वअर्जित संपत्ति में भी बेटी का हक है। हिमाचल प्रदेश भू-राजस्व अधिनियम के तहत भी महिलाओं के नाम जमीन का इंतकाल और कब्जा सुनिश्चित किया गया है। वहीं विधवा महिला को पति की संपत्ति में हिस्सा और बच्चों के भरण-पोषण का अधिकार है। उन्होंने बताया कि यदि किसी महिला के साथ धोखाधड़ी कर जमीन हड़पी गई है तो वह राजस्व अदालत, लोक अदालत और महिला आयोग में शिकायत कर सकती है। इसके लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से मुफ्त कानूनी सहायता भी उपलब्ध है। गोष्ठी में राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष विद्या नेगी और एकल नारी शक्ति संगठन की प्रदेशाध्यक्ष निर्मल चंदेल, लॉ ऑफिसर सहित कई पैनलिस्ट मौजूद रहे। पैनलिस्टों ने महिलाओं को उनके अधिकारों से अवगत करवाया और भूमि पर महिलाओं के लिए मौजूद कानूनी प्रावधानों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस दौरान पेनल में एसआरडीए के प्रबंध निदेशक अमर सिंह कौंडल, हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता संजय गांधी, महिला एवं बाल विकाल विभाग से मीना, हाईकोर्ट की अधिवक्ता अंबिका कोतवाल, कृषि विभाग से उदय वर्मा, प्रोजेक्ट समन्वयक संध्या गौतम, ज्योत्सना, सुखदेव विश्वप्रेमी, राजस्व विभाग से पटवारी नरेश कुमार मौजूद रहे।