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राजस्थान: सांभर झील में अतिक्रमण और बोरवेल के आरोपों पर एनजीटी सख्त, चार सदस्यीय समिति करेगी जांच

Wed, 30 Sep 2026 03:07 PM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: Sourabh Bhatt Updated Wed, 30 Sep 2026 03:07 PM IST
सार
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सांभर झील में अतिक्रमण, नमक की क्यारियों और बोरवेल के आरोपों पर एनजीटी ने नोटिस जारी किए। चार सदस्यीय समिति मौके की जांच कर छह सप्ताह में रिपोर्ट देगी।

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NGT Orders Probe Into Encroachment, Borewells at Sambhar Lake
सांभर झील में पानी की किल्लत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजस्थान की सांभर झील में अवैध अतिक्रमण, नमक की क्यारियों और बड़ी संख्या में बोरवेल के जरिए भूजल व खारे पानी के दोहन के आरोपों पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाया है। एनजीटी की भोपाल स्थित मध्य क्षेत्र पीठ ने केंद्र सरकार समेत प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय संयुक्त समिति भी गठित की गई है।

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जस्टिस शेओ कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने 28 सितंबर को रशीद नूर खान एवं अन्य की ओर से दायर मूल आवेदन पर सुनवाई की। याचिका में सांभर झील के संरक्षण में संबंधित प्राधिकरणों की कथित लापरवाही और झील के पारिस्थितिक तंत्र को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों का मुद्दा उठाया गया है।

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झील में नमक की क्यारियां और बोरवेल का आरोप

याचिका में आरोप लगाया गया है कि झील की सीमा में अनधिकृत नमक की क्यारियां बनाई जा रही हैं। झील की भूमि पर अतिक्रमण के साथ वेटलैंड क्षेत्र में बड़ी संख्या में बोरवेल लगाए गए हैं। इनके जरिए ब्राइन और भूजल की निकासी किए जाने का भी दावा किया गया है।

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आवेदन में भारी मशीनरी, पाइपलाइन और अन्य अनधिकृत ढांचों के इस्तेमाल का आरोप भी लगाया गया है। साथ ही कैचमेंट क्षेत्र में अवैध बांध, एनीकट और सिंचाई गतिविधियों के कारण बारिश का पानी झील तक पहुंचने में बाधा आने की बात कही गई है।

याचिका के अनुसार इन गतिविधियों से भूजल स्तर और झील की लवणता प्रभावित हो रही है। इससे झील के सिकुड़ने, अत्यधिक खारेपन और पानी की गुणवत्ता पर प्रतिकूल असर पड़ने का भी दावा किया गया है।

चार सदस्यीय समिति मौके पर करेगी जांच

एनजीटी ने मामले की वास्तविक स्थिति जानने के लिए चार सदस्यीय संयुक्त समिति गठित की है। इसमें जयपुर जिला कलेक्टर का प्रतिनिधि, राजस्थान राज्य वेटलैंड प्राधिकरण का प्रतिनिधि, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) का प्रतिनिधि और राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (RSPCB) का प्रतिनिधि शामिल होगा।

समिति सांभर झील क्षेत्र का मौके पर निरीक्षण कर छह सप्ताह में तथ्यात्मक और कार्रवाई संबंधी रिपोर्ट एनजीटी को सौंपेगी। समिति के समन्वय और जरूरी व्यवस्थाओं के लिए राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोडल एजेंसी बनाया गया है।

छह सप्ताह में जवाब दाखिल करना होगा

एनजीटी ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर छह सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। अधिकरण ने मामले में पर्यावरण से जुड़ा महत्वपूर्ण सवाल उठना माना है।

हालांकि, एनजीटी ने अभी याचिका में लगाए गए आरोपों पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। अतिक्रमण, बोरवेल, नमक की क्यारियों और फीडर धाराओं में बाधा से जुड़े दावों की वास्तविक स्थिति अब संयुक्त समिति की जांच और संबंधित पक्षों के जवाब से सामने आएगी।

9 दिसंबर को अगली सुनवाई

सांभर झील को रामसर वेटलैंड का दर्जा प्राप्त है और यह प्रवासी पक्षियों के महत्वपूर्ण आवास के रूप में जानी जाती है। याचिका में झील के पारिस्थितिक संतुलन पर इन गतिविधियों के असर की आशंका जताई गई है। मामले की अगली सुनवाई 9 दिसंबर 2026 को होगी।

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