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Jaipur News: जेन-G को भारतीय संस्कृति से जोड़ने के लिए वैदिक संस्कार शिविर, संस्कृत अकादमी ने चलाई मुहिम
Sat, 22 Aug 2026 04:05 PM IST
प्रिया वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: प्रिया वर्मा
Updated Sat, 22 Aug 2026 04:05 PM IST
नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने के लिए राजस्थान संस्कृत अकादमी ने एक अभियान शुरू किया है। इसके तहत 25 अगस्त से प्रदेशभर में वैदिक संस्कार शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, जहां युवाओं को भारतीय संस्कारों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
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राजस्थान संस्कृत अकादमी
- फोटो : अमर उजाला
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राजस्थान संस्कृत अकादमी ने नई पीढ़ी (जेन-जी) को भारतीय संस्कृति से जोड़ने के मकसद से 'एक कदम भारतीय संस्कृति की ओर' अभियान शुरू किया है। अभियान के तहत अकादमी पूरे प्रदेश में 25 अगस्त से सात-दिवसीय वैदिक संस्कार शिविरों का आयोजन कर रही है। शिविरों में सभी जाति और समुदाय के युवा बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं और भारतीय संस्कृति को आत्मसात कर रहे हैं। अकादमी शिविरों के माध्यम से युवाओं में नैतिक और सांस्कृतिक मूल्यों का बीजारोपण कर रही है।
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अकादमी ने शिविरार्थियों के प्रशिक्षण के लिए विशेष पाठ्यक्रम तैयार किया है। इसके तहत गणपति पूजन, भूमि पूजन, पंच देव पूजन, दुर्गा सप्तशती पाठ, तर्पण प्रयोग, रुद्राभिषेक, शास्त्रीय विधि से यज्ञ और पंचांग परिसर की जानकारी दी जा रही है। विशेषज्ञ इन विषयों का सैद्धांतिक अध्ययन कराने के साथ-साथ प्रायोगिक शिक्षण भी दे रहे हैं। अकादमी अब तक प्रतापगढ़, डूंगरपुर, जोधपुर और जैसलमेर सहित कई अन्य जिलों में शिविरों का संचालन कर चुकी है। शिविर के समापन से पूर्व अकादमी सभी शिविरार्थियों का टेस्ट लेती है और इसमें पास होने वाले प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र जारी करती है।
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अकादमी ने युवाओं की बदलती भाषा शैली और आचरण को ध्यान में रखते हुए पाठ्यक्रम की रूपरेखा बनाई है। युवा पीढ़ी तकनीक और सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय है, परंतु हाल के दिनों में युवाओं द्वारा सार्वजनिक स्थानों पर अमर्यादित भाषा बोलने तथा अभद्र शब्दों के साथ वीडियो या रील बनाकर वायरल करने की घटनाओं में वृद्धि हुई है। अकादमी इन प्रवृत्तियों में सुधार लाने और युवाओं को अपनी गौरवशाली संस्कृति से परिचित कराने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। अकादमी शिविरों को सरकारी और निजी विद्यालयों, महाविद्यालयों तथा विश्वविद्यालयों में आयोजित कर रही है।
राजस्थान संस्कृत अकादमी की निदेशक डॉ. लता श्रीमाली ने बताया कि अकादमी युवाओं को भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति से जोड़ने के लिए प्रतिबद्धता से काम कर रही है। शिविरों में समाज के सभी वर्गों की भागीदारी से उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं। अकादमी वेद, संस्कृत, संस्कृति और सभ्यता के संरक्षण तथा संवर्धन के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रही है।