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जयपुर: दूसरे पुरुष के लिए करवा चौथ व्रत और मेहंदी लगाना व्यभिचार, फैमिली कोर्ट ने 13 साल पुरानी शादी तोड़ी
Tue, 27 Oct 2026 09:39 AM IST
शबाहत हुसैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: शबाहत हुसैन
Updated Tue, 27 Oct 2026 09:39 AM IST
जयपुर फैमिली कोर्ट-2 ने दूसरे पुरुष के लिए करवा चौथ व्रत, उसके नाम की मेहंदी और गोवा में फेरे लेने जैसे आचरण को व्यभिचार और मानसिक क्रूरता मानते हुए पति की तलाक याचिका मंजूर कर ली।
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जयपुर कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
विवाह कायम रहते किसी दूसरे पुरुष के लिए करवा चौथ का व्रत रखना, उसके नाम की मेहंदी लगाना और उसे पति के रूप में स्वीकार करना व्यभिचार और मानसिक क्रूरता है। जयपुर के फैमिली कोर्ट-2 ने इस व्यवहार को मुख्य आधार मानते हुए पति की तलाक की अर्जी मंजूर कर ली और 13 साल पुरानी शादी समाप्त कर दी। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि पत्नी का यह कृत्य सामान्य दोस्ती की सीमा से कहीं आगे का व्यवहार है।
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व्यभिचार और मानसिक क्रूरता
फैमिली कोर्ट के जज विशाल भार्गव ने अपने आदेश में कहा कि पत्नी का ऐसा आचरण पति के प्रति गंभीर मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है। किसी पति को लंबे समय तक दाम्पत्य सहचर्य से वंचित रखना भी मानसिक प्रताड़ना है। किसी शादी के कायम रहते हुए किसी अन्य पुरुष के साथ वैवाहिक संबंध जैसा आचरण करना कानूनी और नैतिक रूप से स्वीकार्य नहीं है। इस आधार पर अदालत ने पति द्वारा प्रस्तुत तलाक की याचिका को पूरी तरह उचित मानते हुए फैसला सुनाया।
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गोवा में फेरे और मेहंदी
सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि पत्नी ने स्वयं दूसरे पुरुष के साथ गोवा में फेरे लेने की बात स्वीकार की है। उसने उस व्यक्ति के साथ वैवाहिक संबंध जैसा आचरण भी किया। इसके अलावा महिला ने उस पुरुष के लिए करवा चौथ का व्रत रखा और अपने हाथों पर उसके नाम की मेहंदी लगाई। अदालत ने माना कि यह पूरा व्यवहार स्पष्ट रूप से व्यभिचार की श्रेणी में आता है। इन साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने 13 साल पुराने विवाह को समाप्त करने का निर्णय लिया।