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पंजाब की सियासत में ‘क्रिमिनल बैकग्राउंड’ की दस्तक: नाभा जेल ब्रेक कांड का आरोपी मांगेगा वोट!
Sat, 22 Aug 2026 01:13 PM IST
Nivedita
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर
Published by: Nivedita
Updated Sat, 22 Aug 2026 01:13 PM IST
पंजाब में फरवरी 2027 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। प्रदेश चुनावी जंग को तैयार है। इसी बीच सियासत में कुछ ऐसे चेहरे भी दिखने वाले हैं जिनका बैकग्राउंड आपराधिक है।
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पंजाब चुनाव
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
पंजाब की राजनीति में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले चेहरों की सक्रियता एक बार फिर चर्चा में है। 2016 के बहुचर्चित नाभा जेल ब्रेक मामले के प्रमुख आरोपी गुरप्रीत सिंह सेखों का नाम इस बहस के केंद्र में है। चर्चा है कि वह चंद दिनों में किसी राजनीतिक दल का दामन थाम सकते हैं। सेखों अब खुद चुनावी राजनीति में उतरने की तैयारी में हैं।
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सेखों ने जेल से बाहर आने के बाद समाजसेवा के जरिये अपनी सार्वजनिक छवि बदलने का प्रयास किया है। इससे पहले उनके परिवार के दो सदस्य फिरोजपुर जिले में जिला परिषद चुनाव जीत चुके हैं। सेखों की संभावित राजनीतिक एंट्री ऐसे समय हो रही है जब पंजाब में अपराध पृष्ठभूमि वाले चेहरों के राजनीति में आने को लेकर बहस तेज है।
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लक्खा सिधाना, जयपाल भुल्लर का परिवार, कुलबीर नरुआना और अमृतपाल बाठ-कंचनप्रीत कौर प्रकरण इसी व्यापक चर्चा के उदाहरण हैं। यह प्रवृत्ति पंजाब के सियासी समीकरणों में बदलाव का संकेत देती है। उनकी एंट्री से आपराधिक पृष्ठभूमि वाले चेहरों की स्वीकार्यता पर नई बहस छिड़ सकती है।
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पहले भी कई अपराधी उतर चुके हैं मैदान में
बठिंडा के पूर्व कबड्डी खिलाड़ी लक्खा सिधाना का नाम अतीत में कई आपराधिक मामलों से जुड़ा रहा। बाद में उन्होंने खुद को सामाजिक कार्यकर्ता और किसान आंदोलन से जुड़े चेहरे के रूप में स्थापित किया। 2022 में उन्होंने मौर विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और दूसरे स्थान पर रहे। 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) के टिकट पर बठिंडा से चुनाव लड़ा।
पंजाब के गैंगस्टर जयपाल भुल्लर की पुलिस मुठभेड़ में मौत के बाद उनके परिवार ने राजनीति का रुख किया। उनके पिता, पंजाब पुलिस के पूर्व इंस्पेक्टर भूपिंदर सिंह भुल्लर ने शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) के टिकट पर फिरोजपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा।
बठिंडा क्षेत्र के कुलबीर नरुआना का नाम भी गंभीर आपराधिक मामलों से जुड़ा था। जेल से बाहर आकर उन्होंने स्थानीय युवाओं में प्रभाव बढ़ाया। वह राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहे और अकाली दल के कुछ धड़ों के साथ मंच भी साझा किया। बाद में उनके एक साथी ने उनकी गोली मारकर हत्या कर दी।
अमृतपाल सिंह बाठ और कंचनप्रीत कौर का नाम भी अपराध और राजनीति के कथित रिश्तों में चर्चा में है। बाठ के खिलाफ हत्या, जबरन वसूली और फर्जी पहचान के कई मामले दर्ज हैं। कंचनप्रीत कौर अकाली नेता प्रिंसिपल सुखविंदर कौर रंधावा की बेटी हैं; तरनतारन उपचुनाव में आम आदमी पार्टी ने इस मुद्दे को उठाया था।
बठिंडा के पूर्व कबड्डी खिलाड़ी लक्खा सिधाना का नाम अतीत में कई आपराधिक मामलों से जुड़ा रहा। बाद में उन्होंने खुद को सामाजिक कार्यकर्ता और किसान आंदोलन से जुड़े चेहरे के रूप में स्थापित किया। 2022 में उन्होंने मौर विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और दूसरे स्थान पर रहे। 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) के टिकट पर बठिंडा से चुनाव लड़ा।
पंजाब के गैंगस्टर जयपाल भुल्लर की पुलिस मुठभेड़ में मौत के बाद उनके परिवार ने राजनीति का रुख किया। उनके पिता, पंजाब पुलिस के पूर्व इंस्पेक्टर भूपिंदर सिंह भुल्लर ने शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) के टिकट पर फिरोजपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा।
बठिंडा क्षेत्र के कुलबीर नरुआना का नाम भी गंभीर आपराधिक मामलों से जुड़ा था। जेल से बाहर आकर उन्होंने स्थानीय युवाओं में प्रभाव बढ़ाया। वह राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहे और अकाली दल के कुछ धड़ों के साथ मंच भी साझा किया। बाद में उनके एक साथी ने उनकी गोली मारकर हत्या कर दी।
अमृतपाल सिंह बाठ और कंचनप्रीत कौर का नाम भी अपराध और राजनीति के कथित रिश्तों में चर्चा में है। बाठ के खिलाफ हत्या, जबरन वसूली और फर्जी पहचान के कई मामले दर्ज हैं। कंचनप्रीत कौर अकाली नेता प्रिंसिपल सुखविंदर कौर रंधावा की बेटी हैं; तरनतारन उपचुनाव में आम आदमी पार्टी ने इस मुद्दे को उठाया था।
रॉकी फाजिल्का भी लड़ चुके चुनाव
पंजाब में गैंगस्टर और राजनीति के रिश्ते का एक पुराना उदाहरण जसविंदर सिंह उर्फ रॉकी फाजिल्का हैं। आपराधिक पृष्ठभूमि वाले रॉकी ने 2012 में फाजिल्का विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा। उन्होंने करीब 39 हजार वोट हासिल किए और भाजपा नेता सुरजीत कुमार ज्याणी को कड़ी टक्कर दी, हालांकि वह लगभग 1,600 वोटों के अंतर से चुनाव हार गए।
2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने अकाली दल के नेता शेर सिंह घुबाया के लिए काम किया। गुरप्रीत सेखों की संभावित राजनीतिक एंट्री इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वह पहले परिवार के जरिये स्थानीय राजनीतिक आधार तैयार कर रहे हैं। उनकी एंट्री पंजाब की राजनीति में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले चेहरों की स्वीकार्यता पर नई बहस को जन्म देगी।
पंजाब में गैंगस्टर और राजनीति के रिश्ते का एक पुराना उदाहरण जसविंदर सिंह उर्फ रॉकी फाजिल्का हैं। आपराधिक पृष्ठभूमि वाले रॉकी ने 2012 में फाजिल्का विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा। उन्होंने करीब 39 हजार वोट हासिल किए और भाजपा नेता सुरजीत कुमार ज्याणी को कड़ी टक्कर दी, हालांकि वह लगभग 1,600 वोटों के अंतर से चुनाव हार गए।
2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने अकाली दल के नेता शेर सिंह घुबाया के लिए काम किया। गुरप्रीत सेखों की संभावित राजनीतिक एंट्री इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वह पहले परिवार के जरिये स्थानीय राजनीतिक आधार तैयार कर रहे हैं। उनकी एंट्री पंजाब की राजनीति में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले चेहरों की स्वीकार्यता पर नई बहस को जन्म देगी।