Live Location: क्या सिर्फ फोन नंबर से कोई जान सकता है आपका लाइव लोकेशन? जानें इंटरनेट पर फैले दावों का पूरा सच

जागृति
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीजागृति
Tue, 21 Jul 2026 04:10 PM IST
सार

Mobile Number Tracking:

आजकल इंटरनेट पर कई वेबसाइट्स और एप्स दावा करते हैं कि वे सिर्फ मोबाइल नंबर से ही किसी व्यक्ति की लाइव लोकेशन दिखा सकती हैं, लेकिन क्या यह सच में संभव है? या सिर्फ लोगों काे फंसाने का तरीका है? और अगर यह संभव नहीं है, ताे पुलिस किसी व्यक्ति की लोकेशन कैसे ट्रैक कर लेती हैं? जानिए इस लेख में विस्तार से...

Someone Really Track Location Using Just Your Mobile Number?
मोबाइल नंबर से लाइव लोकेशन ट्रैक करें - फोटो : एआई जनरेटेड

    Mobile Number Location

    : गूगल या एआई पर Track Live Location by Mobile Number सर्च करते ही ऐसी सैकड़ों वेबसाइट्स और एप्स दिखाई देते हैं, जो दावा करते हैं कि बस मोबाइल नंबर डालते ही वह एक क्लिक में किसी की भी लाइव लोकेशन बता देंगी। हमें रील्स या शॉर्ट्स स्क्रॉल करते समय भी ऐसी तमाम वीडियो दिख जाती है, लेकिन असल मे भी ऐसा होता है या नहीं, जानिए पूरी सच्चाई।

    प्रतीकात्मक तस्वीर
    प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : freepik

    क्या सिर्फ मोबाइल नंबर से लाइव लोकेशन ट्रैक की जा सकती है?

    नहीं...इसका एकदम स्पष्ट जवाब न है। केवल किसी को मोबाइल नंबर होने से उनकी लाइव लोकेशन का पता नहीं लगाया जा सकता है। मोबाइल नंबर सिर्फ कार्ड की पहचान होता है। इससे यह जानकारी नहीं मिलती कि फोन और वह व्यक्ति इस समय कहां मौजूद है, जबतक सामने वाला खुद लोकेशन न भेजें।

    दरअसल, फोन की लोकेशन जीपीएस, मोबाइल टावर, वाई-फाई नेटवर्क और अन्य सेंसर की मदद से तय होती है। इन जानकारियों तक पहुंच केवल यूजर की अनुमति या कानूनी प्रक्रिया के तहत ही संभव होती है।

    मोबाइल नंबर से लाइव लोकेशन ट्रैक करें
    मोबाइल नंबर से लाइव लोकेशन ट्रैक करें - फोटो : freepik

    ऑनलाइन एक क्लिक में लोकेशन ट्रैकिंग का दावा क्यों किया जाता है?

    • फर्जी सर्वे और भुगतान: लोकेशन का रिजल्ट दिखाने के नाम पर आपसे कोई एप डाउनलोड करने, ऑनलाइन सर्वे पूरा करने या कुछ पैसे चुकाने को कहा जाता है।
    • पर्सनल डेटा की चोरी: कई बार ये साइट्स यूजर से उनका मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, ओटीपी (OTP) या बैंक डिटेल्स मांग लेती हैं, जिसका इस्तेमाल बाद में फिशिंग और वित्तीय ठगी में किया जाता है।
    • पुराना रिकॉर्ड: कुछ वेबसाइट्स केवल सिम कार्ड के शुरुआती कोड के आधार पर फोन किस राज्य या शहर का है, उसका अनुमान दिखा देती हैं। इसका यूजर की लाइव लोकेशन से कोई लेना-देना नहीं होता।