जीवन में कई तरह के मित्र होते हैं, जैसे कुछ दूर तक साथ चलने वाले, तो कुछ रास्ते में ही साथ छोड़कर चले जाने वाले, तो कुछ मुसीबत के समय डटकर साथ खड़े रहने वाले दोस्त। जीवन में हमेशा हमें ऐसे ही सच्चे दोस्त की तलाश रहती है। दुनिया के तमाम रिश्ते जहां जन्म लेते ही हमसे जुड़ जाते हैं, वहीं मित्र को हम खुद चुनते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर जीवन में किस तरह के दोस्तों से करनी चाहिए और किनसे भूलकर भी नहीं —
दुश्मन से भी ज्यादा खतरनाक होते हैं ऐसे दोस्त, भूलकर भी न करें ऐसे लोगों से मित्रता
2.
गोस्वामी तुलसीदास जी ने कहा है कि —
सेवक सठ नृप कुपन कुनारी,
कपटी मित्र सूल समचारी।
सखा सोच त्यागहु बल मोरें,
सब बिधि घटब काज में तौरें।।
अर्थात् मूर्ख नौकर, कपटी राजा, चरित्रहीन नारी और दुष्ट मित्र उस तीर के समान होते हैं, जो चुभने पर सिर्फ और सिर्फ कष्ट देता है, इसलिए ऐसे लोगों से दोस्ती करने की भूल न करें।
3.
अवलिपतेषु मूर्खेषु रौद्रसाहसिकेषु च।
तथैवापेतर्मेषु न मैत्रीमाचरेद् बुध:।।
महात्मा विदुर के अनुसार एक विद्वान पुरुष को कभी भी अभिमानी, मूर्ख, क्रोधी, साहसिक और धर्महीन पुरुषों के साथ दोस्ती नहीं करनी चाहिए। ऐसे लोग हमेशा दु:ख का कारण बनते हैं, इसलिए इनसे हमेशा बचकर रहना चाहिए।
4.
आगे कह मृदु बचन बनाई,
पाछे अनहित मन कुटिलाई।
जाकर चित्त अहि गति सम भाई,
अस कुमित्र परिहरेहिं भलाई।।
संत तुलसीदास जी के अनुसार जो मित्र आपके सामने आपकी तारीफ और आपके पीठ पीछे बुराई करते हैं, वह सांप की चाल के समान टेढ़े होते हैं। ऐसे मित्रों से हमेशा दूरी बनाए रखना ही भला होता है।