सपा में आजम खां का जलवा बरकरार है। राज्यसभा के बाद विधान परिषद सदस्यों के चयन में भी उनका पलड़ा भारी दिखा। उनके लिए पार्टी हाईकमान ने गठबंधन को भी दरकिनार करने में गुरेज नहीं किया। एमएलसी चुनाव में 50 फीसदी हिस्सेदारी मुस्लिमों को दी है। इसके जरिए विधानसभा चुनाव के दौरान दिखाई गई एकजुटता का अहसान चुकाया गया है और यह संदेश भी दिया कि अल्पसंख्यक समुदाय का हित सपा के साथ है।
आजम खां का सपा में जलवा बरकरार: गठबंधन दरकिनार, 50 फीसदी मुस्लिमों को हिस्सेदारी देकर अहसान चुकाने का प्रयास
फाजिल नगर से विधानसभा चुनाव हारने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य के जरिए पिछड़े वर्ग को साधा गया है। क्योंकि कई चहेतों को टिकट दिलवाने में असफल होने पर स्वामी प्रसाद मौर्य नाराज थे। वहीं, यह संदेश देने की कोशिश है कि पार्टी में पिछड़ों के हितों की अनदेखी नहीं होगी। दूसरे उम्मीदवार करहल से पूर्व विधायक सोबरन सिंह के बेटे मुकुल यादव हैं। अन्य दोनों उम्मीदवारों के नामों पर कई दिनों तक मशक्कत चली।
सियासी जानकारों का कहना है कि सहारनपुर के शाहनवाज खां और सीतापुर के जासमीर अंसारी को एमएलसी उम्मीदवार बनाकर एक तीर से कई निशाने साधे गए हैं। अल्पसंख्यकों को 50 फीसदी हिस्सेदारी देकर भविष्य की एकजुटता बनाए रखने का संदेश दिया है तो एक खान और दूसरे अंसारी समुदाय के जरिए उनके बीच उठने वाले अगड़े व पिछड़े की खाई भी पाटी गई है। आजमगढ़ लोकसभा क्षेत्र में अंसारी समुदाय की बहुलता का भी ध्यान रखा गया है। अहम बात यह है कि यह दोनों आजम खां के खासमखास हैं। शाहनवाज के पिता सरफराज खां पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं और आजम खां से उनकी दोस्ती जग जाहिर है। पूर्व विधायक जासमीर अंसारी ने आजम खां की सीतापुर जेल में रहने के दौरान सहयोग किया था।
पहली बार चमका अब्दुल्ला का चेहरा
दूसरी बार विधायक चुने गए अब्दुल्ला आजम का चेहरा पहली बार चमकता हुआ नजर आया। वह शपथ ग्रहण करने के बाद अखिलेश से मिले थे और बुधवार सुबह पार्टी कार्यालय पहुंचे। यहां से अखिलेश के साथ विधानसभा पहुंचे और नामांकन के वक्त सपा अध्यक्ष के बगल वाली कुर्सी पर बैठे। वहीं, अन्य विधायक खड़े रहे। ऐसे में संदेश साफ है कि आजम खां की सियासत को अब्दुल्ला आगे बढ़ाते नजर आ रहे हैं।
अधूरी रही गठबंधन दलों की हसरत
सपा गठबंधन में शामिल सुभासपा के ओम प्रकाश राजभर के बेटे का नाम एमएलसी के लिए सुर्खियों में रहा। उन्होंने निरंतर प्रयास किया लेकिन शीर्ष नेतृत्व ने सीटें कम होने का हवाला देकर दरकिनार कर दिया। इसी तरह महान दल और राष्ट्रीय जनवादी पार्टी को भी कोई सीट नहीं दी। ऐसे में सुभासपा ने ट्विटर पर नाराजगी जताई है तो महान दल ने गठबंधन तोड़ लिया है।