फिल्म मरजावां की रिलीज के साथ ही अभिनेत्री रकुलप्रीत सिंह ने अपनी अगली फिल्म की शूटिंग अर्जुन कपूर के साथ शुरू कर दी है। दक्षिण भारतीय सिनेमा में बड़ा नाम कमा चुकीं रकुलप्रीत बता रही हैं अपने हिंदी सिनेमा के सफर के बारे में।
मरजावां की 'आरजू' ने अमर उजाला से साझा किए कामयाबी के राज, मां को लेकर कही बड़ी बात
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और, फिर वहीं रम गईं?
नहीं, ऐसा कुछ नहीं कि मुझे साउथ में ही जमना है। मैंने पहली फिल्म के साथ साथ अपनी स्नातक की पढ़ाई पूरी की ताकि कभी जरूरत पड़े तो अभिनय के अलावा भी कुछ काम मिल सके। कन्नड़ फिल्म के बाद ही मैं मुंबई आ गई थी। यहीं आकर मुझे हिंदी की पहली फ़िल्म 'यारियां' मिली। 'यारियां' की शूटिंग खत्म होने के दो दिन पहले ही मेरी एक तेलुगु फिल्म रिलीज हो गई और बहुत बड़ी हिट हो गई। इसी वजह से मैंने तीन-चार फिल्में साइन कर लीं और मैं दक्षिण भारतीय सिनेमा में व्यस्त हो गई।
जब हमने इस अभियान की शुरुआत की तो हमने बहुत से विज्ञापन बनाए जो स्थानीय चैनल्स पर आते हैं। छोटे-छोटे गांवों और शहरों में हमने इसका प्रचार किया। लोगों को सरकार द्वारा चलाई गईं योजनाओं के बारे में जागरूक किया। देश में सबसे बड़ी समस्या है कि लोगों को सरकार की योजनाओं के बारे में पता नहीं होता है। हम सिर्फ शहरों में लोगों को बताएं तो उसका कोई फायदा नहीं है। जिनके यहां टीवी नहीं है, उन्हें भी बताना जरूरी है कि लड़का और लड़की में अंतर मत करो। यही जागरूकता फैलाना हमारा मकसद था।
आमतौर पर लड़कियों को अभिनेत्री बनने के लिए घरवालों का समर्थन नहीं मिलता, लेकिन आपके साथ तो उल्टा हुआ है?
जी हां, असलियत यही है कि मेरे घरवालों ने ही मुझे एक्टर बनाया. मेरी मां ने भी मेरा पूरा साथ दिया। जब मैं छोटी थी तो पापा से बहुत सी चीजें मांगा करती थी। फिर मेरा छोटा भाई आ गया। लोगों का ध्यान उसकी तरफ हो गया तो मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लगता था। मैं अपने भाई को बहुत परेशान करती थी। मेरी मां ही थीं जिन्होंने मुझे एक्टिंग करने के लिए प्रेरित किया। पहले तो मुझे मेरी मां की बात का भरोसा नहीं होता था। मैं सोचती थी कि ऐसे ही बोल रही हैं।
'मरजावां' में आरजू का किरदार स्वीकार करने के पीछे क्या सोच रही?
मैं 'दे दे प्यार दे' की शूटिंग कर रही थी, तब मरजावां के निर्देशक मिलाप झावेरी ने मुझे इस किरदार के बारे में बताया। मुझे इस किरदार की खास बात ये लगी कि पिछले कुछ समय में ऐसा किरदार लिखा नहीं गया। हम ऐसे चरित्र देख देखकर बड़े हुए हैं जैसे जीत और चांदनी बार में तब्बू के किरदार। मैंने सोचा कि लोगों को दिखाने के लिए और मेरे लिए यह कुछ अलग काम हो जाएगा तो बस कर ली। धन्यवाद उन सभी लोगों का जिन्हें ये किरदार पसंद आ रहा है।
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