साल का पहला सूर्य ग्रहण आज लग रहा है। सूर्य ग्रहण के 12 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है। सूतक काल शनिवार रात 10 बजकर पांच मिनट से शुरू हो गया और आज ग्रहण की समाप्ति पर खत्म होगा। सूतक काल से ग्रहण के समाप्ति तक मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे। इस दौरान मंदिरों में पूजा-अर्चना नहीं होगी।
क्या होता है सूतक काल
पंडित राकेश पांडे ने बताया कि सूतक काल के दौरान किसी भी तरह के शुभ कार्य, पूजा-पाठ, धार्मिक आयोजन नहीं किए जाते हैं। मंदिर के कपाट भी बंद कर दिए जाते हैं, जिससे भगवान तक भी ग्रहण का अशुभ प्रभाव न पहुंच सके। सूतक काल का समय अशुभ होता है क्योंकि इस दौरान सूर्य और चंद्रमा का राहु ग्रास कर लेते हैं। माना जाता है ग्रहण के दौरान सबसे ज्यादा नकारात्मक ऊर्जा प्रभावी रहती है।
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सूर्य ग्रहण
- फोटो : अमर उजाला
सूतक काल के दौरान क्या न करें
पंडित देवेंद्र प्रताप मिश्र ने बताया कि सूतक काल के दौरान किसी भी प्रकार के खाद्य पदार्थ का सेवन न करें। किसी भी तरह का नया काम शुरू नहीं करना चाहिए। कैंची और चाकू का प्रयोग भी न करें। भगवान की मूर्तियों को हाथ से न छुएं। बालों में कंघी करना भी अशुभ माना जाता है। सूतक के दौरान भगवान का ध्यान करना चाहिए ताकि नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव न पड़े। सूतक काल के दौरान धार्मिक पुस्तकों का अध्ययन किया जा सकता है।
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solar eclipse
- फोटो : अमर उजाला।
गर्भवती महिलाएं रखें विशेष ध्यान
पंडित शरद चंद्र मिश्र ने बताया कि गर्भवती महिलाओं को सूतक काल के दौरान चाकू और कैंची का प्रयोग नहीं करना चाहिए। उनको ग्रहण की घटना को देखने से भी बचना चाहिए। हो सके तो ग्रहण के दौरान घर से बाहर न निकलें।
अगर गर्भवती महिलाएं ग्रहण देखती हैं तो गर्भ में पल रहे बच्चे को शारीरिक या मानसिक परेशानियां हो सकती हैं। इससे गर्भपात की संभावना भी बढ़ जाती है, इसलिए ग्रहण के दौरान सतर्क रहें।