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सिंहस्थ 2028: चिंतामन-नईखेड़ी नई रेल लाइन, जमीन अधिग्रहण के लिए अधिसूचना जारी, ग्रामीणों ने आरोप लगाए

Thu, 28 May 2026 05:03 PM IST
उज्जैन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: उज्जैन ब्यूरो Updated Thu, 28 May 2026 05:03 PM IST
सार
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सिंहस्थ 2028 की तैयारी के तहत रेलवे चिंतामन से नईखेड़ी तक 8.60 किमी लंबी बायपास रेल लाइन बनाएगा, जिससे उज्जैन स्टेशन पर ट्रैफिक दबाव कम होगा। परियोजना के लिए 85 सर्वे नंबरों की जमीन अधिग्रहित की जा रही है। अलाइनमेंट और मुआवजे को लेकर किसानों ने विरोध शुरू कर कानूनी लड़ाई की तैयारी की है। 

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Simhasth 2028 Rail Bypass: Land Acquisition Notice Issued, Farmers Allege Alignment Bias
यहां हो रहा नई योजना पर काम

विस्तार

सिंहस्थ 2028 को लेकर रेलवे ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। महाकाल की नगरी में ट्रेनों का दबाव कम करने और इंदौर-नागदा रूट को सीधे जोड़ने के लिए चिंतामन से नईखेड़ी तक 8.60 किलोमीटर लंबी नई रेल बायपास लाइन बिछाने का काम प्रस्तावित है। इस परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया अब औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। रेल मंत्रालय ने 22 मई को अधिसूचना जारी कर चार गांवों के 85 सर्वे नंबरों की जमीन अधिगृहीत करने की घोषणा की है। लेकिन अधिसूचना जारी होते ही विवाद भी खड़ा हो गया है। प्रभावित किसानों ने अलाइनमेंट को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं और रेलवे जनरल मैनेजर तक शिकायत पहुंचा दी है। ग्रामीण अब कानूनी लड़ाई की तैयारी में जुट गए हैं।

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कहां से गुजरेगी नई रेल लाइन, क्या है योजना?
सिंहस्थ महापर्व के दौरान उज्जैन रेलवे स्टेशन पर यात्री और ट्रेनों का भारी दबाव रहता है। 2028 में 100 से ज्यादा स्पेशल ट्रेनें चलाने का अनुमान है। ऐसे में इंदौर से नागदा जाने वाली और नागदा से इंदौर आने वाली ट्रेनों को इंजन बदलने या रिवर्सल की जरूरत पड़ती है। इससे समय और संसाधन दोनों बर्बाद होते हैं। इसी समस्या से निपटने के लिए पश्चिम रेलवे निर्माण संगठन ने 189.04 करोड़ रुपये की लागत से चिंतामन से नईखेड़ी तक नया रेल बायपास बनाने का प्लान तैयार किया। यह 8.60 किमी की लाइन चिंतामन जवासिया स्टेशन के पास से शुरू होकर नईखेड़ी के पास नागदा रूट से जुड़ जाएगी। इसके बनने के बाद इंदौर-नागदा रूट की गाड़ियां बिना उज्जैन आए सीधे डायवर्ट हो सकेंगी। इससे सिंहस्थ के दौरान उज्जैन स्टेशन पर ट्रैफिक लोड करीब 30% तक कम होने की उम्मीद है।
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अधिसूचना जारी, 85 सर्वे नंबर शामिल
रेल मंत्रालय द्वारा 22 मई 2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार, इस परियोजना के लिए चार गांवों की जमीन ली जाएगी। अधिसूचना में जिन गांवों के सर्वे नंबर शामिल हैं, जिसमें ग्राम दाउदखेड़ी: 15 सर्वे नंबर, ग्राम चिंतामन: 11 सर्वे नंबर, ग्राम मोहनपुरा: 22 सर्वे नंबर, ग्राम मंगरोला: 37 सर्वे नंबर कुल मिलाकर 85 सर्वे नंबरों की जमीन अधिग्रहण के दायरे में आई है। रेलवे ने दावे-आपत्ति दर्ज कराने के लिए 30 दिन का समय दिया है।

उज्जैन कस्बा क्षेत्र गायब, ग्रामीणों में संशय
अधिसूचना सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल उज्जैन कस्बा क्षेत्र को लेकर उठ रहा है। चिंतामन रोड के दूसरी तरफ उज्जैन कस्बा क्षेत्र के कई सर्वे नंबर भी इस अलाइनमेंट की जद में आ रहे हैं, लेकिन रेल मंत्रालय की अधिसूचना में उनका जिक्र नहीं है।

ग्राम चिंतामन के किसान जीतसिंह फौजी ने आरोप लगाया कि रेलवे अफसर पूरी प्रक्रिया को गोपनीय रख रहे हैं। अधिसूचना में सिर्फ चार गांवों के नाम डाले हैं। उज्जैन कस्बा क्षेत्र की जमीन के बारे में कुछ नहीं बताया। हमसे जानकारी छुपाई जा रही है। पहले कहा गया था कि अलाइनमेंट फाइनल नहीं है, अब अचानक अलाइनमेंट अधिसूचना जारी कर दी, ग्रामीणों का दावा है कि उज्जैन कस्बा क्षेत्र को शामिल करने पर प्रभावित सर्वे नंबरों की संख्या 120 के पार पहुंच जाएगी। इससे सैकड़ों किसान प्रभावित होंगे। किसानों ने इस संबंध में पश्चिम रेलवे के जनरल मैनेजर को लिखित शिकायत भेजी है। शिकायत में अलाइनमेंट की दोबारा जांच, सर्वे रिपोर्ट सार्वजनिक करने और भ्रष्टाचार की आशंका पर उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई है।


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कोर्ट जाएंगे किसान
अधिसूचना पर 30 दिन में आपत्ति दर्ज कराने का समय मिलने के बाद किसान संगठन सक्रिय हो गए हैं। दाउदखेड़ी के किसान संघ ने बैठक कर तय किया है कि सभी प्रभावित किसान एक साथ आपत्ति दर्ज कराएंगे। इसके लिए वकीलों से सलाह ली जा रही है। जीतसिंह फौजी ने कहा कि हम पहले रेलवे को आपत्ति देंगे। अगर सुनवाई नहीं हुई तो हाईकोर्ट में याचिका दायर करेंगे। हमारी मांग है कि या तो अलाइनमेंट पुराने सर्वे के हिसाब से किया जाए, या फिर बाजार दर से चार गुना मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को नौकरी दी जाए। किसानों का कहना है कि उनकी जमीन तीन फसल वाली है और परिवारों की आजीविका इसी पर टिकी है। अधिग्रहण से कई परिवार भूमिहीन हो जाएंगे।

क्या कहते हैं रेलवे अधिकारी?
इस मामले में पश्चिम रेलवे निर्माण संगठन के अधिकारियों ने फिलहाल कैमरे पर बोलने से इनकार कर दिया। नाम न छापने के अनुरोध पर एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अलाइनमेंट तकनीकी सर्वे और इंजीनियरिंग के आधार पर तय किया गया है। सिंहस्थ को देखते हुए कम से कम घुमाव और ऊंचाई वाले रूट को प्राथमिकता दी गई है। जहां तक उज्जैन कस्बा क्षेत्र का सवाल है, उसकी अलग से अधिसूचना जारी होगी। यह पूरी परियोजना फेज में हो रही है। अधिकारी ने भ्रष्टाचार के आरोपों को सिरे से खारिज किया। कहा कि हर सर्वे की सैटेलाइट इमेज और ड्रोन मैपिंग है। अलाइनमेंट बदलने का कोई सवाल ही नहीं। आपत्तियां आएंगी तो नियमानुसार सुनवाई होगी।

यहां हो रहा नई योजना पर काम

यहां हो रहा नई योजना पर काम

 

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