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ओंकारेश्वर: अतिक्रमण नोटिस पर रहवासियों में आक्रोश, सांसद-विधायक के दावों पर उठे सवाल
Tue, 06 Oct 2026 08:56 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ओंकारेश्वर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ओंकारेश्वर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Tue, 06 Oct 2026 08:56 PM IST
ओंकारेश्वर में अतिक्रमण संबंधी नोटिस जारी होने के बाद रहवासियों में चिंता और नाराजगी है। स्थानीय लोगों ने कार्रवाई से पहले सुनवाई और दस्तावेजों की जांच की मांग की। कांग्रेस नेता उत्तम पाल सिंह ने जनप्रतिनिधियों के पुराने दावों पर सवाल उठाए। 8 अक्टूबर को ब्रह्मपुरी में रहवासियों की बैठक होगी।
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नोटिसों के बाद स्थानीय रहवासियों में आक्रोश और चिंता का माहौल दिखाई देने लगा है।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में नगर परिषद एवं तहसील प्रशासन की ओर से अतिक्रमण सहित अन्य मामलों को लेकर जारी किए जा रहे नोटिसों के बाद स्थानीय रहवासियों में आक्रोश और चिंता का माहौल दिखाई देने लगा है। वर्षों से अपने मकानों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों में रह रहे लोगों को अब कार्रवाई की आशंका सताने लगी है। रहवासियों का कहना है कि प्रशासनिक कार्रवाई की स्थिति में उनके सामने रोजी-रोटी और आशियाना बचाने का संकट खड़ा हो सकता है।
रहवासियों का कहना है कि ओंकारेश्वर धार्मिक एवं पर्यटन नगरी है और यहां बड़ी संख्या में परिवार लंबे समय से निवास करते आ रहे हैं। कई लोगों का रोजगार भी इन्हीं मकानों और दुकानों से जुड़ा हुआ है। ऐसे में अतिक्रमण के नाम पर किसी भी प्रकार की कार्रवाई से पहले प्रशासन को प्रत्येक मामले की वास्तविक स्थिति, दस्तावेजों, पुराने निर्माण और लोगों की आजीविका को ध्यान में रखना चाहिए। स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भी नाराजगी है कि नोटिस मिलने के बाद उनके सामने भविष्य को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है। लोगों का कहना है कि प्रशासन को कार्रवाई करने से पहले प्रभावित परिवारों की बात सुननी चाहिए और यदि कोई मामला नियमों के दायरे में आता है तो उसका विधिसम्मत समाधान निकाला जाना चाहिए।
ये भी पढ़ें- बेटे की चाह में मां ने एक दिन की नवजात बेटी का गला घोंटा, अस्पताल के बिस्तर पर की ये हैवानियत
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सांसद-विधायक के दावों पर उठे सवाल
इसी मामले को लेकर स्थानीय लोगों की समस्याएं सुनने के लिए कांग्रेस खंडवा ग्रामीण जिलाध्यक्ष उत्तम पाल सिंह ओंकारेश्वर पहुंचे। सिंह ने जनप्रतिनिधियों के पूर्व में दिए गए बयानों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब ममलेश्वर कॉरिडोर आंदोलन के बाद स्थापना स्थापित किया गया था तब जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन के साथ मिलकर लिखित में दिया कि ममलेश्वर कॉरिडोर अलग बनाया जाएगा। ओंकारेश्वर में बुलडोजर कार्रवाई की बात सामने आई थी, तब जनप्रतिनिधियों की ओर से यह दावा किया गया था कि यदि बुलडोजर चला तो वे सबसे पहले उसके सामने खड़े होंगे। लेकिन अब जब स्थानीय लोगों को नोटिस मिल रहे हैं और कार्रवाई की आशंका से वे परेशान हैं, तब सांसद और विधायक कहां हैं, यह सवाल जनता के बीच उठ रहा है। उत्तम पाल सिंह ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को जनता के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुननी चाहिए। यदि किसी परिवार के सामने मकान और रोजगार बचाने का संकट खड़ा हो रहा है तो जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी बनती है कि वे प्रशासन के सामने लोगों की आवाज मजबूती से रखें।
8 अक्टूबर को ब्रह्मपुरी में होगी बैठक
नोटिसों को लेकर बढ़ती नाराजगी के बीच 8 अक्टूबर को ब्रह्मपुरी क्षेत्र में रहवासियों की बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक में स्थानीय लोगों की समस्याओं पर चर्चा के साथ आगे की रणनीति तय की जाएगी। प्रशासन के स्तर पर यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन का रास्ता अपनाने को लेकर भी निर्णय लिया जा सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे विकास और प्रशासनिक व्यवस्थाओं के विरोध में नहीं हैं, लेकिन कार्रवाई से पहले उन्हें विश्वास में लिया जाना चाहिए। उनका कहना है कि वर्षों से बसे परिवारों के मकानों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को लेकर कोई भी निर्णय जल्दबाजी में नहीं होना चाहिए।
अब प्रशासन के रुख पर नजर
अतिक्रमण नोटिसों को लेकर स्थानीय स्तर पर बढ़ते आक्रोश के बीच अब लोगों की नजर प्रशासन के अगले कदम पर है। रहवासी चाहते हैं कि प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुने और प्रत्येक प्रकरण की अलग-अलग जांच के बाद ही कोई निर्णय लिया जाए। फिलहाल 8 अक्टूबर की बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस बैठक में रहवासी अपनी समस्याओं को एकजुट होकर सामने रखेंगे और आगे की रणनीति तय करेंगे। वहीं, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर से इस पूरे मामले में क्या रुख अपनाया जाता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
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रहवासियों का कहना है कि ओंकारेश्वर धार्मिक एवं पर्यटन नगरी है और यहां बड़ी संख्या में परिवार लंबे समय से निवास करते आ रहे हैं। कई लोगों का रोजगार भी इन्हीं मकानों और दुकानों से जुड़ा हुआ है। ऐसे में अतिक्रमण के नाम पर किसी भी प्रकार की कार्रवाई से पहले प्रशासन को प्रत्येक मामले की वास्तविक स्थिति, दस्तावेजों, पुराने निर्माण और लोगों की आजीविका को ध्यान में रखना चाहिए। स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भी नाराजगी है कि नोटिस मिलने के बाद उनके सामने भविष्य को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है। लोगों का कहना है कि प्रशासन को कार्रवाई करने से पहले प्रभावित परिवारों की बात सुननी चाहिए और यदि कोई मामला नियमों के दायरे में आता है तो उसका विधिसम्मत समाधान निकाला जाना चाहिए।
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सांसद-विधायक के दावों पर उठे सवाल
इसी मामले को लेकर स्थानीय लोगों की समस्याएं सुनने के लिए कांग्रेस खंडवा ग्रामीण जिलाध्यक्ष उत्तम पाल सिंह ओंकारेश्वर पहुंचे। सिंह ने जनप्रतिनिधियों के पूर्व में दिए गए बयानों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब ममलेश्वर कॉरिडोर आंदोलन के बाद स्थापना स्थापित किया गया था तब जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन के साथ मिलकर लिखित में दिया कि ममलेश्वर कॉरिडोर अलग बनाया जाएगा। ओंकारेश्वर में बुलडोजर कार्रवाई की बात सामने आई थी, तब जनप्रतिनिधियों की ओर से यह दावा किया गया था कि यदि बुलडोजर चला तो वे सबसे पहले उसके सामने खड़े होंगे। लेकिन अब जब स्थानीय लोगों को नोटिस मिल रहे हैं और कार्रवाई की आशंका से वे परेशान हैं, तब सांसद और विधायक कहां हैं, यह सवाल जनता के बीच उठ रहा है। उत्तम पाल सिंह ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को जनता के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुननी चाहिए। यदि किसी परिवार के सामने मकान और रोजगार बचाने का संकट खड़ा हो रहा है तो जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी बनती है कि वे प्रशासन के सामने लोगों की आवाज मजबूती से रखें।
8 अक्टूबर को ब्रह्मपुरी में होगी बैठक
नोटिसों को लेकर बढ़ती नाराजगी के बीच 8 अक्टूबर को ब्रह्मपुरी क्षेत्र में रहवासियों की बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक में स्थानीय लोगों की समस्याओं पर चर्चा के साथ आगे की रणनीति तय की जाएगी। प्रशासन के स्तर पर यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन का रास्ता अपनाने को लेकर भी निर्णय लिया जा सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे विकास और प्रशासनिक व्यवस्थाओं के विरोध में नहीं हैं, लेकिन कार्रवाई से पहले उन्हें विश्वास में लिया जाना चाहिए। उनका कहना है कि वर्षों से बसे परिवारों के मकानों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को लेकर कोई भी निर्णय जल्दबाजी में नहीं होना चाहिए।
अब प्रशासन के रुख पर नजर
अतिक्रमण नोटिसों को लेकर स्थानीय स्तर पर बढ़ते आक्रोश के बीच अब लोगों की नजर प्रशासन के अगले कदम पर है। रहवासी चाहते हैं कि प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुने और प्रत्येक प्रकरण की अलग-अलग जांच के बाद ही कोई निर्णय लिया जाए। फिलहाल 8 अक्टूबर की बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस बैठक में रहवासी अपनी समस्याओं को एकजुट होकर सामने रखेंगे और आगे की रणनीति तय करेंगे। वहीं, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर से इस पूरे मामले में क्या रुख अपनाया जाता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
