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Indore News: झमाझम बारिश के लिए तरस रहा इंदौर, इंद्रेश्वर महादेव के बाद अब खजराना गणेश से की जाएगी प्रार्थना
Fri, 21 Aug 2026 01:43 PM IST
Arjun Richhariya
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Arjun Richhariya
Updated Fri, 21 Aug 2026 01:43 PM IST
Indore News: इंदौर में बारिश का कोटा पूरा होने में 20 इंच की जरूरत है। अभी जो हालात हैं उसमें लग रहा है कि शहर में पानी की भारी कमी हो सकती है।
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खजराना गणेश मंदिर
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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विस्तार
मालवा निमाड़ समेत मध्य भारत का सबसे समृद्ध शहर इंदोर बारिश की कमी से जूझ रहा है। इंदौर में बारिश का आंकड़ा कुल कोटे से अभी 20 इंच दूर है और अगस्त आधे से अधिक निकल चुका है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार अगर स्थिति ऐसी ही बनी रही तो आने वाले समय में शहर में गंभीर जल संकट पैदा हो सकता है। हाल ही में खजराना मंदिर प्रबंध समिति की बैठक हुई और उसमें भी यह मुद्दा उठा। शहर को स्वच्छता में नंबर 1 बनाने के लिए की गई प्रार्थना की तर्ज पर अब बारिश के लिए भी भगवान गणेश से प्रार्थना की जाएगी। इससे पहले पूर्व सांसद सुमित्रा महाजन ने पंढरीनाथ के समीप प्राचीन इंद्रेश्वर महादेव मंदिर में विशेष पूजा कर बारिश के लिए प्रार्थना की थी।
इंदौर के कलेक्टर शुभम वर्मा ने कहा कि शहर पर आने वाली हर विपदा के समय भगवान गणेश से प्रार्थना की जाती है और अल्प वर्षा को लेकर भी इस पर विचार किया जा रहा है। इंदौर आज जो भी है उसमें भगवान खजराना गणेश का आशीर्वाद है और जब भी यहां कोई परेशानी आई है तो भगवान गणेश से प्रार्थना की जाती है।
सुमित्रा महाजन ने भी की थी पूजा
इंदौर में बारिश नहीं होने पर शहर के प्राचीन इंद्रेश्वर महादेव मंदिर में पूजा की परंपरा है। इसी क्रम में पूर्व लोकसभा स्पीकर व पूर्व सांसद सुमित्रा महाजन ने भी बीते शनिवार को मंदिर पहुंचकर विशेष पूजा की थी और शहर में अच्छी बारिश की कामना की थी।
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साल 2000 में पड़ा था सूखा
इंदौर में इस साल मानसून की रफ्तार शुरुआत से ही धीमी रही। 1 जून से 20 अगस्त तक शहर में कुल 17.2 इंच बारिश दर्ज की गई है। अकेले अगस्त में अब तक करीब 2 इंच ही पानी बरसा है। इसी वजह से चर्चा हो रही है कि वर्ष 2000 में जो भीषण सूखा था, कहीं वही समय फिर से तो नहीं आ जाएगा। मौसम विभाग के अनुसार वर्ष 2000 इंदौर के इतिहास के सबसे गंभीर सूखा वर्षों में शामिल रहा था। उस साल पूरे मानसून सीजन में सिर्फ 16.8 इंच बारिश हुई थी, जो सामान्य औसत 37 इंच से करीब 54% कम थी। हालांकि, उसके मुकाबले इस साल स्थिति थोड़ी बेहतर है, इस साल 20 अगस्त तक 17.2 इंच बारिश हो चुकी है। वहीं अभी मानसून सीजन के भी लगभग 40 दिन बचे हुए हैं।
इन वर्षों में भी हुई कम बारिश
1992 में 22.5 इंच
2017 में 24.5 इंच
2021 में 26.4 इंच
सीहोर के आगे नहीं हुई अच्छी बारिश
मौसम वैज्ञानिक अजयकुमार शुक्ला के अनुसार इस बार मध्य प्रदेश में पांच बार बंगाल की खाड़ी में मजबूत सिस्टम सक्रिय हुए थे। मजबूत सिस्टम होने पर भोपाल के आगे तक असर दिखता है, लेकिन इस बार ऐसा कोई भी सिस्टम सीहोर और शाजापुर से आगे नहीं बढ़ पाया। इसी वजह से इंदौर को बंगाल की खाड़ी के सिस्टम से पर्याप्त बारिश नहीं मिली। वहीं, दूसरी तरफ अरब सागर में बने सिस्टम भी महाराष्ट्र से घूमकर मालवा की ओर आना थे, लेकिन वे विदर्भ और झारखंड की तरफ चले गए।
पिछले साल से 6 इंच कम
मौसम विभाग के अनुसार 18 अगस्त तक इंदौर में केवल 17 इंच बारिश दर्ज की गई है जो पिछले साल की तुलना में 6 इंच कम है। मौसम वैज्ञानिक आनंद हरसाना के मुताबिक अगले सप्ताह केवल हल्की बारिश की संभावना है, हालांकि कुछ हिस्सों में येलो अलर्ट जारी किया गया है।
प्राकृतिक तंत्र तबाह : ओपी जोशी
पर्यावरणविद् ओपी जोशी ने बताया कि पिछले कुछ साल में प्रकृति का पूरा सिस्टम ही तबाह हो गया है। पहले मानसून पूरे भारत में एक जैसा आता था और अब कहीं ज्यादा पानी गिरता है और कहीं कम पानी गिरता है। इसका सबसे बड़ा कारण है हर जगह जंगलों का कटना, तालाबों और जल संरचनाओं का सूखना। शहरों से इतनी गर्मी, धुआं और जहरीली गैसें निकलती रहती हैं कि कई बार बारिश गिरने के लिए अनुकूल मौसम ही नहीं बन पाता। इस वजह से हम यह दृश्य देख रहे हैं कि कहीं पर बहुत अधिक बारिश है और कहीं पर सूखा पड़ रहा है।
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इंदौर के कलेक्टर शुभम वर्मा ने कहा कि शहर पर आने वाली हर विपदा के समय भगवान गणेश से प्रार्थना की जाती है और अल्प वर्षा को लेकर भी इस पर विचार किया जा रहा है। इंदौर आज जो भी है उसमें भगवान खजराना गणेश का आशीर्वाद है और जब भी यहां कोई परेशानी आई है तो भगवान गणेश से प्रार्थना की जाती है।
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सुमित्रा महाजन ने भी की थी पूजा
इंदौर में बारिश नहीं होने पर शहर के प्राचीन इंद्रेश्वर महादेव मंदिर में पूजा की परंपरा है। इसी क्रम में पूर्व लोकसभा स्पीकर व पूर्व सांसद सुमित्रा महाजन ने भी बीते शनिवार को मंदिर पहुंचकर विशेष पूजा की थी और शहर में अच्छी बारिश की कामना की थी।
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साल 2000 में पड़ा था सूखा
इंदौर में इस साल मानसून की रफ्तार शुरुआत से ही धीमी रही। 1 जून से 20 अगस्त तक शहर में कुल 17.2 इंच बारिश दर्ज की गई है। अकेले अगस्त में अब तक करीब 2 इंच ही पानी बरसा है। इसी वजह से चर्चा हो रही है कि वर्ष 2000 में जो भीषण सूखा था, कहीं वही समय फिर से तो नहीं आ जाएगा। मौसम विभाग के अनुसार वर्ष 2000 इंदौर के इतिहास के सबसे गंभीर सूखा वर्षों में शामिल रहा था। उस साल पूरे मानसून सीजन में सिर्फ 16.8 इंच बारिश हुई थी, जो सामान्य औसत 37 इंच से करीब 54% कम थी। हालांकि, उसके मुकाबले इस साल स्थिति थोड़ी बेहतर है, इस साल 20 अगस्त तक 17.2 इंच बारिश हो चुकी है। वहीं अभी मानसून सीजन के भी लगभग 40 दिन बचे हुए हैं।
इन वर्षों में भी हुई कम बारिश
1992 में 22.5 इंच
2017 में 24.5 इंच
2021 में 26.4 इंच
सीहोर के आगे नहीं हुई अच्छी बारिश
मौसम वैज्ञानिक अजयकुमार शुक्ला के अनुसार इस बार मध्य प्रदेश में पांच बार बंगाल की खाड़ी में मजबूत सिस्टम सक्रिय हुए थे। मजबूत सिस्टम होने पर भोपाल के आगे तक असर दिखता है, लेकिन इस बार ऐसा कोई भी सिस्टम सीहोर और शाजापुर से आगे नहीं बढ़ पाया। इसी वजह से इंदौर को बंगाल की खाड़ी के सिस्टम से पर्याप्त बारिश नहीं मिली। वहीं, दूसरी तरफ अरब सागर में बने सिस्टम भी महाराष्ट्र से घूमकर मालवा की ओर आना थे, लेकिन वे विदर्भ और झारखंड की तरफ चले गए।
पिछले साल से 6 इंच कम
मौसम विभाग के अनुसार 18 अगस्त तक इंदौर में केवल 17 इंच बारिश दर्ज की गई है जो पिछले साल की तुलना में 6 इंच कम है। मौसम वैज्ञानिक आनंद हरसाना के मुताबिक अगले सप्ताह केवल हल्की बारिश की संभावना है, हालांकि कुछ हिस्सों में येलो अलर्ट जारी किया गया है।
प्राकृतिक तंत्र तबाह : ओपी जोशी
पर्यावरणविद् ओपी जोशी ने बताया कि पिछले कुछ साल में प्रकृति का पूरा सिस्टम ही तबाह हो गया है। पहले मानसून पूरे भारत में एक जैसा आता था और अब कहीं ज्यादा पानी गिरता है और कहीं कम पानी गिरता है। इसका सबसे बड़ा कारण है हर जगह जंगलों का कटना, तालाबों और जल संरचनाओं का सूखना। शहरों से इतनी गर्मी, धुआं और जहरीली गैसें निकलती रहती हैं कि कई बार बारिश गिरने के लिए अनुकूल मौसम ही नहीं बन पाता। इस वजह से हम यह दृश्य देख रहे हैं कि कहीं पर बहुत अधिक बारिश है और कहीं पर सूखा पड़ रहा है।
