DPI कार्यालय में बवाल: नियुक्ति से वंचित शिक्षक आयुक्त के कक्ष में घुसे, ABVP कार्यकर्ताओं से कर्मियों की झड़प
प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा 2025 में चयनित लेकिन नियुक्ति से वंचित अभ्यर्थियों का डीपीआई कार्यालय में प्रदर्शन हंगामे में बदल गया। डीएलएड डिग्री की वैधता को लेकर करीब एक हजार अभ्यर्थी नियुक्ति की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों और कर्मचारियों में धक्कामुक्की हुई। पुलिस ने स्थिति संभाली। कर्मचारियों ने 21 अगस्त से आंदोलन की चेतावनी दी है।
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प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा 2025 में चयनित होने के बावजूद नियुक्ति से वंचित शिक्षक अभ्यर्थियों का आंदोलन गुरुवार को लोक शिक्षण संचालनालय कार्यालय में हंगामे में बदल गया। करीब 15 दिन से नियुक्ति की मांग को लेकर डीपीआई कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे चयनित शिक्षक शाम को झंडे लेकर कार्यालय की पहली मंजिल पर स्थित आयुक्त के कक्ष तक पहुंच गए। इस दौरान कर्मचारियों और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्कामुक्की हुई। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को कार्यालय से बाहर निकाला।
इसके बाद अभ्यर्थी कार्यालय परिसर में बैठकर नारेबाजी करने लगे। स्थिति को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया। दो जोन के पुलिस उपायुक्त, अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त और सहायक पुलिस आयुक्त समेत वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद रहे।
एबीवीपी कार्यकर्ता भी पहुंचे, जमकर नारेबाजी
शिक्षक अभ्यर्थियों के समर्थन में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता भी डीपीआई कार्यालय पहुंचे। करीब 10 से 20 कार्यकर्ता मुख्य गेट पर धरने पर बैठ गए और नारेबाजी शुरू कर दी। उन्होंने लोक शिक्षण आयुक्त से मुलाकात की मांग की। कार्यालय परिसर में एबीवीपी कार्यकर्ताओं और चयनित शिक्षकों की ओर से अलग-अलग नारेबाजी होती रही। इस दौरान एबीवीपी कार्यकर्ताओं और डीपीआई कर्मचारियों के बीच भी विवाद और धक्कामुक्की हुई। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने हस्तक्षेप किया और प्रदर्शनकारियों को कार्यालय परिसर से बाहर किया।
डीएलएड की डिग्री बनी नियुक्ति में अड़चन
प्रदर्शन कर रहे चयनित शिक्षकों का कहना है कि वे प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा में मेरिट में आने के बावजूद नियुक्ति से बाहर कर दिए गए हैं। उनका दावा है कि दस्तावेज सत्यापन के दौरान उनकी डीएलएड डिग्री को मान्य नहीं माना गया। डीपीआई की ओर से बताया जा रहा है कि भर्ती के लिए निर्धारित नियमों के अनुसार डीएलएड की डिग्री भर्ती का विज्ञापन जारी होने से पहले की होना आवश्यक है। भर्ती प्रक्रिया के दौरान डिग्री हासिल करने वाले अभ्यर्थियों की डिग्री को मान्य नहीं माना जा रहा है। अभ्यर्थियों की मांग है कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान प्राप्त की गई डीएलएड डिग्री को भी मान्य किया जाए और मेरिट में चयनित होने के बावजूद नियुक्ति से वंचित किए गए अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी जाए।
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करीब एक हजार अभ्यर्थी नियुक्ति से बाहर
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों के अनुसार करीब एक हजार चयनित शिक्षक डीएलएड की डिग्री को लेकर नियुक्ति से वंचित हैं। वर्ष 2024 में करीब 10 हजार पदों पर प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती निकाली गई थी। चयनित अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा और मेरिट में चयन होने के बाद दस्तावेज सत्यापन के दौरान उन्हें बाहर किया जा रहा है।
आयुक्त बोले- भर्ती नियमावली का मामला जटिल
लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह ने कहा कि प्रदर्शनकारी शिक्षकों से संवाद किया जा रहा है और उनकी बातें सुनी जा रही हैं। चयनित शिक्षकों से पहले भी बातचीत हो चुकी है और आगे भी संवाद का रास्ता खुला है। उन्होंने कहा कि भर्ती नियमावली से जुड़ा मामला जटिल है।
कर्मचारियों ने 21 अगस्त से आंदोलन की चेतावनी दी
कार्यालय में प्रदर्शनकारियों के प्रवेश और हंगामे के बाद डीपीआई के अधिकारी-कर्मचारी भी लामबंद हो गए। कर्मचारी संगठनों ने अधिकारियों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है। संगठनों ने चेतावनी दी है कि सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित नहीं होने पर 21 अगस्त से लोक शिक्षण संचालनालय के कर्मचारी सांकेतिक कार्य अवज्ञा आंदोलन शुरू करेंगे।
