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यूपी एमएलसी चुनाव नतीजे: भाजपा की बढ़ी चुनौती, शिक्षक-स्नातक मतदाताओं के रुख ने बढ़ाई संगठन समीक्षा की जरूरत
Thu, 29 Oct 2026 06:25 AM IST
दुष्यंत शर्मा
सुधीर कुमार सिंह, लखनऊ
सुधीर कुमार सिंह, लखनऊ
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 29 Oct 2026 06:25 AM IST
भाजपा को सबसे बड़ा झटका रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के प्रभाव वाले लखनऊ स्नातक सीट पर मौजूदा एमएलसी की हार से लगा है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की शिक्षक व स्नातक सीटों पर लगातार दूसरी बार पार्टी की हार ने कई सवाल उठा दिए हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
विस्तार
शिक्षक-स्नातक विधान परिषद चुनाव में भाजपा 11 में 6 सीटें जीतकर 2020 के अपने आंकड़े बरकरार रखने में सफल रही है। हालांकि, दो सीटें बढ़ाकर सपा ने भाजपा के सामने 2027 के लिए चुनौती पेश कर दी है। भाजपा के लिए ये अच्छे संकेत नहीं माने जा सकते। लखनऊ स्नातक खंड से मौजूदा एमएलसी इंजीनियर अवनीश सिंह पटेल की हार ने भाजपा के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। इन नतीजों ने भाजपा के प्रदेश संगठन की रणनीति, मतदाता संपर्क और प्रत्याशी चयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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इस चुनाव को सत्ताधारी दल और प्रत्याशियों के व्यक्तिगत प्रबंधन का चुनाव कहा जाता है लेकिन नतीजों को सत्ताधारी दल की रणनीति की कसौटी पर जरूर कसा जाता है। घोषित परिणाम और निर्णायक रुझान से साफ है कि सत्ता व संगठन की ताकत के बावजूद भाजपा विपक्ष पर निर्णायक बढ़त नहीं बना सकी। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि भाजपा अपना चुनावी संदेश उन वर्गों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने में नाकाम रही, जिनके बीच विपक्ष अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटा रहा।
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भाजपा को सबसे बड़ा झटका रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के प्रभाव वाले लखनऊ स्नातक सीट पर मौजूदा एमएलसी की हार से लगा है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की शिक्षक व स्नातक सीटों पर लगातार दूसरी बार पार्टी की हार ने कई सवाल उठा दिए हैं। पीएम के अलावा इस क्षेत्र से अनिल राजभर, रवींद्र जायसवाल, डॉ. दयाशंकर मिश्र दयालू, दयाशंकर सिंह, संजीव गोंड, गिरीश चंद्र यादव के अलावा सहयोगी दल से केंद्र में अनुप्रिया पटेल और प्रदेश में आशीष पटेल व ओम प्रकाश राजभर मंत्री हैं। इसलिए नेतृत्व के सामने यह सवाल खड़ा हो गया है कि स्थानीय स्तर पर तैयारी कितनी प्रभावी रही?
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जमीनी तैयारी की समीक्षा जरूरी
नतीजे संकेत दे रहे हैं कि सत्ताधारी दल का संगठनात्मक ताकत का दावा पर्याप्त नहीं है। शिक्षक-स्नातक चुनाव में मतदाता सूची तैयार करने, पात्र मतदाताओं को जोड़ने और लगातार संपर्क बनाए रखने की बड़ी भूमिका होती है। यदि किसी क्षेत्र में इन मोर्चों पर अपेक्षित परिणाम नहीं मिले तो संगठन को कारणों की पहचान करनी होगी। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी के नेतृत्व में विधानसभा से पहले सेमी फाइनल के तौर पर जनता से जुड़ा यह पहला चुनाव था।
विधानसभा चुनाव के लिए बड़ा सबक
विधान परिषद चुनाव का मतदाता वर्ग सीमित है, जबकि विधानसभा चुनाव में सामाजिक समीकरण, स्थानीय विकास, विधायकों का कामकाज, टिकट वितरण और कार्यकर्ताओं की सक्रियता जैसे कई कारक प्रभाव डालेंगे। एससी-एसटी कानून, यूजीसी से जुड़े सवालों और स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधियों के प्रति असंतोष की स्थिति भी पार्टी को समझनी होगी। साथ ही संगठन में कार्यकर्ताओं की भागीदारी और उनकी शिकायतों के निस्तारण पर ध्यान देना होगा।
सपा की ताकत बढ़ी
विधान परिषद चुनाव में सपा ने ताकत बढ़ा ली है। वाराणसी शिक्षक क्षेत्र से सपा प्रत्याशी लाल बिहारी यादव और आगरा शिक्षक क्षेत्र से सपा प्रत्याशी डॉ. आकाश अग्रवाल ने जीत हासिल की। सपा अध्यक्ष और पूर्व सीएम अखिलेश यादव की रणनीति इस चुनाव में कारगर साबित हुई। वर्ष 2020 में हुए विधान परिषद चुनाव में सपा को इन 11 सीटों में तीन सीटें मिली थीं।