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केरल में अपने कार्यकर्ताओं पर हमले को लेकर हिंदुत्व को और धार देगा संघ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Mon, 14 Aug 2017 11:52 AM IST
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केरल में अपने कार्यकर्ताओं पर हो रहे हमले और उनकी हत्याओं के विरोध में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने हिंदुत्व के एजेंडे को और धार देने की तैयारी की है।
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इस सिलसिले में गोष्ठियां आयोजित की जाएंगी जिसमें केरल की घटनाओं का उल्लेख करते हुए लोगों को देश भर में हिंदुत्व और हिंदुओं पर बढ़ते हमलों के पीछे की साजिश के बारे में बताया जाएगा।
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साथ ही लोगों से हिंदुत्व विरोधी शक्तियों की साजिश का मुंहतोड़ जवाब देने का आह्वान भी किया जाएगा। इसी संदर्भ में 22 अगस्त को लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में गोष्ठी रखी गई है। इसे संघ के ही संगठन प्रज्ञा प्रवाह के राष्ट्रीय संयोजक जे. नंद कुमार संबोधित करेंगे।
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दरअसल, लंबे समय से पूर्वोत्तर व दक्षिण में केरल जैसे राज्य में संघ की बढ़ती गतिविधियां कई राजनीतिक, स्थानीय संगठनों तथा ईसाई मिशनरियों की आंख की किरकिरी बन गई हैं।
पिछले डेढ़ दशक में कई जगह संघ के स्वयंसेवकों और प्रचारकों पर हमले व हत्याओं की घटनाएं हुई हैं। त्रिपुरा में 2001 में श्यामल कांति सेन गुप्ता, दीनेन्द्र डे, सुधामय दत्त व शुभंकर चक्रवर्ती के अपहरण व हत्या से शुरू हुआ यह सिलसिला आज केरल तक पहुंच गया है।
पिछले दिनों संघ के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले यह कहते हुए कि केरल में 13 महीने में 14 स्वयंसेवकों की हत्याएं हृदय को हिला देती हैं, इस मुद्दे पर संघ की चिंता को सार्वजनिक कर चुके हैं।
साथ ही इन हत्याओं के पीछे मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी का हाथ और केरल की मौजूदा सरकार की भूमिका पर अंगुली उठाकर यह भी संकेत दे चुके हैं कि संघ अब चुप नहीं बैठेगा।
यह भी है वजह
राजनीतिक समीक्षकों का मानना है कि संघ की इस मुद्दे पर कार्यक्रम करने की योजना यूं ही नहीं है। संघ को पता है कि केंद्र और देश के अधिकतर राज्यों में विचार परिवार से निकले संगठन भाजपा या गठबंधन में शामिल मित्र दलों की सरकार होने के नाते उसके पास हिंदुत्व पर निशाना साधने वालों की जमीन कमजोर करने का बेहतर मौका है। स्वयंसेवकों पर बढ़ रहे हमलों और उनकी हत्याओं को मुद्दा बनाकर वह देश भर में माकपा ही नहीं बल्कि हिंदुओं व हिंदुत्व पर निशाना साधने वालों के खिलाफ माहौल बना सकता है। साथ ही हिंदुत्व के एजेंडे को और धार देकर अधिक लोगों को जोड़ा जा सकता है। इस तरह संघ की जमीन को ज्यादा मजबूती दी जा सकती है।