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Lucknow News: वेंटिलेटर से भी न सुधरे सांस तो ईसीएमओ से मिल सकती है जिंदगी
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लखनऊ। वेंटिलेटर के बावजूद शरीर में पर्याप्त ऑक्सीजन न पहुंचे और सांस लेने में दिक्कत हो तो डॉक्ट ईसीएमओ (एक्स्ट्राकॉरपोरियल मेंब्रेन ऑक्सीजनेशन) का विकल्प अपनाते हैं। यह बेहद गंभीर मरीजों के लिए जीवनरक्षक तकनीक है। ये जानकारी लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. पीके दास ने शनिवार को ईसीएमओ कार्यशाला में दी। उन्होंने बताया कि ईसीएमओ में मरीज के शरीर से खून निकालकर मशीन में भेजा जाता है। मशीन उसमें ऑक्सीजन मिलाकर कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकालती है। इसके बाद ऑक्सीजनयुक्त खून वापस शरीर में पहुंचाया जाता है।
संस्थान के निदेशक डॉ. सीएम सिंह ने बताया कि ईसीएमओ हर मरीज के लिए नहीं होती। गंभीर निमोनिया, एआरडीएस, अचानक फेफड़े फेल होने, हार्ट फेल होने या कार्डियक शॉक के कुछ मरीजों में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। पूर्व निदेशक व एनेस्थीसिया विभाग के अध्यक्ष डॉ. दीपक मालवीय ने बताया कि ईसीएमओ बीमारी को ठीक नहीं करती, बल्कि शरीर को ऑक्सीजन देकर फेफड़ों या दिल को आराम करने का समय देती है। इस दौरान डॉक्टर मूल बीमारी का इलाज करते हैं। कार्यशाला में कुलसचिव डॉ. सुब्रत चंद्रा, कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. भुवन चंद्र तिवारी, डॉ. आशीष झा और चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अरविंद सिंह समेत अन्य चिकित्सक मौजूद रहे।
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