यूपी में एनआरसी लागू करने का फैसला सर्वे के बाद: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि प्रदेश में ‘राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर’ (एनआरसी) लागू करने का फैसला सर्वे के बाद किया जाएगा। यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला है, इसलिए इसे राजनीतिक चश्मे से नहीं देखना चाहिए। असम में तो इसे लागू कर दिया गया है, लेकिन अन्य राज्यों में इसे चरणबद्ध ढंग से लागू किया जाएगा। इसी कड़ी में यूपी में एनआरसी लागू करने के लिए सर्वे कराया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने बुधवार को यहां एक कार्यक्रम के दौरान सवाल-जवाब में कहा कि देश की सुरक्षा से जुड़े अनुच्छेद 37 व एनआरसी जैसे कई मुद्दे लंबित पड़े थे। आजादी के बाद पहली बार मोदी सरकार ने साहसिक कदम उठाते हुए जहां अनुच्छेद 370 को समाप्त किया, वहीं एनआरसी लागू करने का फैसला किया है। इसे सभी प्रदेशों में लागू किया जाना है। जहां तक यूपी का सवाल है तो यहां पर भी सर्वे चल रहा है। सर्वे के परिणाम आने के बाद प्रदेश में इस पर फैसला किया जाएगा।
अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट के संभावित फैसले से जुड़े सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा है कि प्रदेशवासियों की इच्छा तो यह है कि अयोध्या को उसकी पहचान मिलनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने जिस तरह से अयोध्या जैसे संवेदनशील मामले पर लगातार सुनवाई पूरी की है, उससे जनता के मन में विश्वास पैदा हुआ है कि कोर्ट बड़े से बड़े मुद्दे को तेजी से सुलझा सकती है। अब तो हमें फैसले की प्रतीक्षा है। जो भी फैसला आएगा उसे लागू करेंगे।
योगी तो इतिहास बनाने के लिए आते हैं
मुख्यमंत्री से पूछा गया कि जिस तरह से मुलायम सिंह के कार्यकाल में बाबरी मस्जिद को संरक्षित करने और कल्याण सिंह के कार्यकाल में हुए बाबरी विध्वंस को एक इतिहास के रूप में जाना जाता है, क्या योगी के कार्यकाल में भी कोई इतिहास बनेगा? इस पर मुख्यमंत्री ने सीधा तो कुछ नहीं कहा, बस इतना ही कहा कि योगी तो इतिहास बनाने के लिए आते हैं। समय खुद इतिहास बनाएगा।
न कुछ खोने का भय न कुछ पाने की लालसा
बीते ढाई साल में क्या खोया? इस सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि मैंने तो जब भगवा धारण किया था, तभी इन झंझटों से मुक्त हो गया था। अब तो मुझे न तो कुछ पाने की लालसा है और न ही कुछ खोने का भय सताता है। जनता की सेवा करना है, वह कर रहा हूं।
मायावती खुद को बुजुर्ग मान लें तो उनसे भी लूंगा मार्गदर्शन
पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह और मुलायम सिंह यादव से मुलाकात से जुड़े सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि वह दोनों हमारे बड़े-बुजुर्ग हैं और पूर्व मुख्यमंत्री हैं, इसलिए उनके स्वास्थ्य का हालचाल लेने गए थे। इसका कोई राजनीतिक निहितार्थ नहीं निकाला जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि वैसे भी हमारा संस्कार है कि बडे़-बुजुर्गों से मिलते रहना चाहिए, उनसे मार्ग दर्शन मिलता है। हम ऐसा करेंगे तो आने वाली पीढ़ी सीखेगी। पूर्व मुख्यमंत्री मायावती से नहीं मिलने के सवाल पर उन्होंने हंसते हुए कहा कि अगर वह खुद को बुजुर्ग मान लें तो उनसे भी मिलकर मार्गदर्शन लूंगा।