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पितृ पक्ष 2026: पितृ पक्ष में भूलकर भी न करें ये काम! जानें श्राद्ध पक्ष के जरूरी नियम
Tue, 22 Sep 2026 10:10 PM IST
शिवानी अवस्थी
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवानी अवस्थी
Updated Tue, 22 Sep 2026 10:10 PM IST
Shradh 2026: पितृ पक्ष से जुड़े नियम क्षेत्र, परिवार और परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए किसी एक मान्यता को सभी के लिए अनिवार्य नियम मानने के बजाय अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय रीति का पालन करना बेहतर है। आइए जानते हैं पितृ पक्ष में किन कामों को करने की परंपरा है और किन चीजों से परहेज किया जाता है।
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पितृ पक्ष में क्या करें और क्या नहीं
- फोटो : Ai
विस्तार
Pitru Paksha 2026: हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष धार्मिक और पारंपरिक महत्व माना जाता है। यह समय पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और स्मरण का माना जाता है। मान्यता है कि इन दिनों पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और दान-पुण्य करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। यही वजह है कि पितृ पक्ष के दौरान परिवार अपनी परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार श्राद्ध कर्म करते हैं।
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पितृ पक्ष के दौरान केवल श्राद्ध या तर्पण करना ही महत्वपूर्ण नहीं माना जाता, बल्कि खान-पान, व्यवहार और दैनिक जीवन में भी कुछ विशेष सावधानियां बरतने की परंपरा है। कई परिवार इन दिनों सात्विक भोजन करते हैं और मांसाहार, शराब तथा कुछ विशेष खाद्य पदार्थों से परहेज रखते हैं। वहीं, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में दिखावे से बचकर जरूरतमंदों की सहायता और दान करना शुभ माना जाता है।
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हालांकि, पितृ पक्ष से जुड़े नियम क्षेत्र, परिवार और परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए किसी एक मान्यता को सभी के लिए अनिवार्य नियम मानने के बजाय अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय रीति का पालन करना बेहतर है। आइए जानते हैं पितृ पक्ष में किन कामों को करने की परंपरा है और किन चीजों से परहेज किया जाता है।
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पितृ पक्ष में क्या करना चाहिए?
1. पितरों का स्मरण और तर्पण करें
पितृ पक्ष में अपने दिवंगत पूर्वजों का श्रद्धापूर्वक स्मरण करने और उनकी आत्मिक शांति के लिए तर्पण करने की परंपरा है। जिन परिवारों में श्राद्ध की विशेष विधि चली आ रही है, वे उसी के अनुसार कर्मकांड करते हैं।
2. सामर्थ्य के अनुसार श्राद्ध करें
श्राद्ध में भव्य आयोजन जरूरी नहीं माना जाता। परिवार अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार भोजन, दान या अन्य धार्मिक कर्म कर सकता है। विधि को लेकर संदेह हो तो परिवार के पुरोहित से सलाह ली जा सकती है।
3. जरूरतमंदों को दान दें
पितृ पक्ष में अन्न, वस्त्र और अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करने की परंपरा कई क्षेत्रों में प्रचलित है। दान करते समय दिखावे के बजाय जरूरतमंद व्यक्ति की वास्तविक जरूरत को प्राथमिकता देना बेहतर है।
4. घर में सात्विक वातावरण रखें
इन दिनों कई परिवार घर में सात्विक वातावरण बनाए रखते हैं। पूजा-पाठ, धार्मिक पाठ और पूर्वजों का स्मरण करने की परंपरा भी निभाई जाती है।
5. पशु-पक्षियों को भोजन कराएं
कई हिंदू परंपराओं में श्राद्ध के अवसर पर कौवे, गाय, कुत्ते और अन्य जीवों को भोजन कराने की परंपरा मिलती है। इसे पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और जीवों के प्रति करुणा से जोड़ा जाता है।
पितृ पक्ष में क्या नहीं करना चाहिए?
1. मांसाहार और शराब से परहेज
कई परिवार पितृ पक्ष के दौरान मांसाहार, शराब और अन्य तामसिक माने जाने वाले भोजन से परहेज करते हैं। यह नियम सभी परिवारों में समान नहीं है, इसलिए अपनी पारिवारिक परंपरा का पालन करना उचित है।
2. अनावश्यक उत्सव और दिखावे से बचें
पितृ पक्ष को पूर्वजों के स्मरण और श्रद्धा का समय माना जाता है। इसलिए कई परिवार इस दौरान भव्य उत्सव, अनावश्यक खर्च और दिखावे से दूरी रखते हैं।
3. किसी का अपमान या अनादर न करें
पितृ पक्ष में केवल धार्मिक कर्मकांड ही नहीं, बल्कि व्यवहार को भी महत्व दिया जाता है। इसलिए किसी व्यक्ति का अपमान करना, झगड़ा करना या जानबूझकर किसी को दुख पहुंचाने से बचना चाहिए।
4. श्राद्ध की तिथि को लेकर लापरवाही न करें
परंपरा में श्राद्ध संबंधित पूर्वज की तिथि के अनुसार करने का विधान माना जाता है। तिथि को लेकर भ्रम हो तो पंचांग या योग्य पुरोहित से जानकारी लेना बेहतर है।
5. अंधविश्वास के नाम पर डरने से बचें
पितृ पक्ष से जुड़ी कई लोकमान्यताएं अलग-अलग क्षेत्रों में प्रचलित हैं। हर बात को डर या अशुभ संकेत से जोड़ना जरूरी नहीं है। धार्मिक परंपराओं का पालन श्रद्धा और समझ के साथ करना चाहिए।