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मंत्री नहीं बने तो छलक पड़े आंसू: लोकभवन से कोई मुस्कुराते निकला तो कोई मायूस; सियासत के दिखे अलग-अलग रंग

Wed, 28 Oct 2026 11:14 AM IST
Nikita Gupta अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर Published by: Nikita Gupta Updated Wed, 28 Oct 2026 11:14 AM IST
सार
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उमर अब्दुल्ला सरकार के कैबिनेट विस्तार के बाद मंत्री पद न मिलने पर नेकां विधायक अब्दुल मजीद लारमी की नाराजगी सामने आई। उन्होंने वरिष्ठता और पार्टी के प्रति वफादारी का हवाला देते हुए खुद को मंत्री पद का हकदार बताया।

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Some emerged from Lok Bhawan smiling, while others looked dejected.
आंसू पोंछते विधायक लारमी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उमर सरकार के बहुप्रतीक्षित कैबिनेट विस्तार के बाद मंगलवार को लोकभवन से निकले नेताओं के चेहरों पर खुशी और मायूसी के अलग-अलग रंग देखने को मिले। चश्मा शाही मोड़ पर मीडिया से रूबरू हुए नए मंत्री सरकार की प्राथमिकताओं पर बात करते नजर आए, जबकि मंत्रिपद से वंचित कुछ विधायकों की नाराजगी भी  सामने आई।

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नेकां विधायक अब्दुल मजीद लारमी वरिष्ठता और वफादारी के बावजूद मंत्रिमंडल में जगह न मिलने पर निराश दिखे। इसी बीच, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा के हम आंसू पोछेंगे के बयान ने सियासी पारे को एकाएक गरमा दिया। सुबह 8 बजे से ही चश्मा शाही मोड़ पर पत्रकारों का जमावड़ा था। लोकभवन में शपथ ग्रहण समारोह के बाद करीब 11 बजे से विधायकों ने लौटना शुरू किया। यहां पहुंचे नेकां विधायक अब्दुल मजीद लारमी से मंत्री न बनाए जाने पर सवाल किया गया तो उनका दर्द छलक उठा।

लारमी ने कहा, उन्हें पूरी उम्मीद थी कि इस बार उन्हें कैबिनेट में स्थान मिलेगा। यह पहले अल्लाह का फैसला था और फिर हमारे नेतृत्व का। उन्होंने कहा, जिन चार लोगों को लिया गया है, हम उनका स्वागत करते हैं। आंखों में आंसू पोंछते हुए उन्होंने कहा, मैं पार्टी में वरिष्ठ रहा हूं, ईमानदार रहा हूं, वफादार और समर्पित रहा हूं। इसलिए मंत्री पद का हकदार था। उन्होंने अल्ताफ कालू के चयन को नकारते हुए कहा कि मैं उनसे वरिष्ठ हूं। उनकी जगह मेरा चयन होना चाहिए था। फिर बात को संभालते हुए उन्होंने कहा कि वे पार्टी के सिपाही हैं और संगठन के लिए काम जारी रखेंगे। इसके बाद कुछ विधायक बिना रुके निकल गए।

यहां पहुंचे वन मंत्री जावेद राणा ने प्रदेश के लोगों को बधाई देते हुए कहा कि उमर सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार अब पूरा हो गया है। सरकार का पूरा ध्यान अब जनकल्याण व सुशासन पर रहेगा। जब असंतुष्ट विधायकाें पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, केंद्र शासित प्रदेश के सांविधानिक नियमों के तहत मंत्रिपरिषद की एक सीमित संख्या तय है। सीएम के अलावा 8 ही लोगों को मंत्री बनना था। स्वाभाविक है कि सभी मंत्री बन नहीं सकते। यह पार्टी का निर्णय है। नेतृत्व को पहले ही यह अधिकार सौंप दिया गया था कि वे जो भी फैसला लेंगे, वही सही और अंतिम होगा। राणा ने पार्टी के भीतर किसी भी तरह के बड़े मतभेद को खारिज करते हुए कहा कि संगठन का हर कार्यकर्ता और विधायक नेतृत्व के साथ मजबूती से खड़ा है।

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कैबिनेट में जगह न मिलने पर विधायक बेग का छलका दर्द, बोले-हर निवाला नसीब में नहीं होता
कैबिनेट विस्तार के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक जावेद बेग ने एक भावुक संस्मरण साझा करते हुए 2017 की उस घटना को याद किया जब वह मंत्री बनते-बनते रह गए थे। उन्होंने बताया कि कैसे उस समय उनकी पत्नी, जिन्हें डॉक्टरों ने पूरी तरह बेड रेस्ट की सलाह दी थी, उन्हें जम्मू रवाना करने बाहर आई थीं। उन्हें पक्का भरोसा था कि वह मंत्री बनने जा रहे हैं। अपनी उस पुरानी याद को ताजा करते हुए बेग ने कहा कि राजनीति में हर उम्मीद पूरी नहीं होती और हर निवाला गले से नीचे उतरने के लिए नहीं होता। उनका यह बयान मौजूदा मंत्रिमंडल विस्तार के संदर्भ में राजनीतिक गलियारों में काफी चर्चा बटोर रहा है।

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