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बंगाल में NEP 2020 लागू करने की तैयारी: सरकार का बड़ा कदम, NCERT से होगा करार; शिक्षकों को मिलेगा प्रशिक्षण
Mon, 24 Aug 2026 03:30 PM IST
Devesh Tripathi
पीटीआई, कोलकाता
पीटीआई, कोलकाता
Published by: Devesh Tripathi
Updated Mon, 24 Aug 2026 03:30 PM IST
पश्चिम बंगाल सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए केंद्र की शैक्षणिक संस्था NCERT का सहयोग लेने जा रही है। प्रस्तावित समझौते के तहत शिक्षकों को प्रशिक्षण देने के साथ स्कूलों में नई शिक्षा व्यवस्था लागू करने के लिए जरूरी मार्गदर्शन मिलेगा। राज्य एनसीएफ के अनुरूप पाठ्यक्रम और किताबें तैयार करेगा, जिन्हें 2028 से लागू करने की योजना है।
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2028 से नई पाठ्यपुस्तकें होंगी लागू
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
पश्चिम बंगाल सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 को पूरी तरह लागू करने की दिशा में काम कर रही है। राज्य जल्द ही शिक्षकों के सहयोग के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) के साथ समझौता करेगा। राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री दीपक बर्मन ने सोमवार को यह जानकारी दी।
न्यू टाउन स्थित बिस्वा बांग्ला कन्वेंशन सेंटर में राज्यभर के जिला विद्यालय निरीक्षकों और शिक्षा विभाग के अन्य अधिकारियों की राज्य स्तरीय कार्यशाला में बर्मन ने कहा कि राज्य एनईपी 2020 लागू करने में कुछ हद तक पीछे है। उन्होंने कहा कि प्रक्रिया को जल्द पूरा करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
NCERT के साथ क्या समझौता करने जा रही बंगाल सरकार?
स्कूल शिक्षा मंत्री ने कहा कि राज्य एनसीईआरटी के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) करने की तैयारी कर रहा है। इसके तहत शिक्षकों के लिए ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे और नई शिक्षा व्यवस्था लागू करने के लिए तकनीकी और शैक्षणिक मार्गदर्शन दिया जाएगा।
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मंत्री ने कहा, "एमओयू के जरिए एनसीईआरटी हमारा मार्गदर्शन करेगा। वे तकनीकी मुद्दों से लेकर इस व्यवस्था को स्कूल स्तर तक लागू करने में आने वाली दिक्कतों को दूर करने में हमारी मदद करेंगे।" बर्मन ने कहा कि राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (एनसीएफ) के आधार पर पाठ्यपुस्तकों और पाठ्यक्रम तैयार किए जाएंगे। इसमें यह तय होगा कि छात्रों को क्या पढ़ाया जाएगा, किस तरह पढ़ाया जाएगा और उनके सीखने का आकलन कैसे किया जाएगा।
पश्चिम बंगाल में कब से लागू होगी राष्ट्रीय शिक्षा नीति?
उन्होंने कहा, "नई रूपरेखा के तहत तैयार की जाने वाली पाठ्यपुस्तकें 2028 के शैक्षणिक सत्र से लागू की जाएंगी। इसके लिए हमें एनसीईआरटी का सहयोग मिलेगा।" उन्होंने कहा कि राज्य की पाठ्यक्रम समिति भी पाठ्यक्रम तैयार करते समय एनसीएफ से मार्गदर्शन लेगी। मंत्री ने यह भी कहा कि राज्य के बड़ी संख्या में निजी स्कूलों ने यूडीआईएसई+ पोर्टल पर छात्रों से जुड़ी जानकारी अपलोड नहीं की है। इससे राज्य में स्कूलों में छात्रों की संख्या की सही तस्वीर सामने नहीं आ रही है।
उन्होंने कहा, "यूडीआईएसई केंद्र सरकार का डेटाबेस है, जिसके जरिए स्कूलों को छात्रों और शिक्षकों की संख्या तथा स्कूल के बुनियादी ढांचे की स्थिति जैसी जानकारी देनी होती है।" बर्मन ने कहा, "कुछ निजी स्कूलों ने अपने छात्रों की संख्या अपलोड नहीं की है। इसके कारण यूडीआईएसई पोर्टल पर बड़ी संख्या में ऐसे स्कूल दिख रहे हैं, जहां छात्र नहीं हैं लेकिन शिक्षक हैं।"
निजी स्कूलों को लेकर क्या बोले मंत्री दीपक बर्मन?
मंत्री ने स्पष्ट किया कि वास्तविक स्थिति अलग है। इन स्कूलों में छात्र हैं, लेकिन तकनीकी या अन्य कारणों से उनका डेटा अपलोड नहीं किया गया है। उन्होंने कहा, "हम चाहते हैं कि वे यूडीआईएसई+ पोर्टल पर अपनी पूरी जानकारी अपलोड करें। इसके बाद पश्चिम बंगाल की तस्वीर काफी बेहतर दिखेगी।" बर्मन ने कहा, "समस्या मुख्य रूप से निजी स्कूलों के साथ है।"
कॉलेजों की गवर्निंग बॉडी में विधायकों, सांसदों और मंत्रियों की संभावित भूमिका से जुड़े सवाल पर बर्मन ने कहा कि राज्य अपनी नीतियों और प्रक्रियाओं के अनुसार काम करेगा। उन्होंने कहा, "हम किसी और की जगह नहीं लेना चाहते। हमारी अपनी व्यवस्था, अपनी नीतियां और परंपराएं हैं और काम उसी के अनुसार किया जाएगा। आने वाले दिनों में आपको समझ में आएगा कि हमारे कॉलेज कैसे काम कर रहे हैं।"
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न्यू टाउन स्थित बिस्वा बांग्ला कन्वेंशन सेंटर में राज्यभर के जिला विद्यालय निरीक्षकों और शिक्षा विभाग के अन्य अधिकारियों की राज्य स्तरीय कार्यशाला में बर्मन ने कहा कि राज्य एनईपी 2020 लागू करने में कुछ हद तक पीछे है। उन्होंने कहा कि प्रक्रिया को जल्द पूरा करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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NCERT के साथ क्या समझौता करने जा रही बंगाल सरकार?
स्कूल शिक्षा मंत्री ने कहा कि राज्य एनसीईआरटी के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) करने की तैयारी कर रहा है। इसके तहत शिक्षकों के लिए ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे और नई शिक्षा व्यवस्था लागू करने के लिए तकनीकी और शैक्षणिक मार्गदर्शन दिया जाएगा।
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मंत्री ने कहा, "एमओयू के जरिए एनसीईआरटी हमारा मार्गदर्शन करेगा। वे तकनीकी मुद्दों से लेकर इस व्यवस्था को स्कूल स्तर तक लागू करने में आने वाली दिक्कतों को दूर करने में हमारी मदद करेंगे।" बर्मन ने कहा कि राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (एनसीएफ) के आधार पर पाठ्यपुस्तकों और पाठ्यक्रम तैयार किए जाएंगे। इसमें यह तय होगा कि छात्रों को क्या पढ़ाया जाएगा, किस तरह पढ़ाया जाएगा और उनके सीखने का आकलन कैसे किया जाएगा।
पश्चिम बंगाल में कब से लागू होगी राष्ट्रीय शिक्षा नीति?
उन्होंने कहा, "नई रूपरेखा के तहत तैयार की जाने वाली पाठ्यपुस्तकें 2028 के शैक्षणिक सत्र से लागू की जाएंगी। इसके लिए हमें एनसीईआरटी का सहयोग मिलेगा।" उन्होंने कहा कि राज्य की पाठ्यक्रम समिति भी पाठ्यक्रम तैयार करते समय एनसीएफ से मार्गदर्शन लेगी। मंत्री ने यह भी कहा कि राज्य के बड़ी संख्या में निजी स्कूलों ने यूडीआईएसई+ पोर्टल पर छात्रों से जुड़ी जानकारी अपलोड नहीं की है। इससे राज्य में स्कूलों में छात्रों की संख्या की सही तस्वीर सामने नहीं आ रही है।
उन्होंने कहा, "यूडीआईएसई केंद्र सरकार का डेटाबेस है, जिसके जरिए स्कूलों को छात्रों और शिक्षकों की संख्या तथा स्कूल के बुनियादी ढांचे की स्थिति जैसी जानकारी देनी होती है।" बर्मन ने कहा, "कुछ निजी स्कूलों ने अपने छात्रों की संख्या अपलोड नहीं की है। इसके कारण यूडीआईएसई पोर्टल पर बड़ी संख्या में ऐसे स्कूल दिख रहे हैं, जहां छात्र नहीं हैं लेकिन शिक्षक हैं।"
निजी स्कूलों को लेकर क्या बोले मंत्री दीपक बर्मन?
मंत्री ने स्पष्ट किया कि वास्तविक स्थिति अलग है। इन स्कूलों में छात्र हैं, लेकिन तकनीकी या अन्य कारणों से उनका डेटा अपलोड नहीं किया गया है। उन्होंने कहा, "हम चाहते हैं कि वे यूडीआईएसई+ पोर्टल पर अपनी पूरी जानकारी अपलोड करें। इसके बाद पश्चिम बंगाल की तस्वीर काफी बेहतर दिखेगी।" बर्मन ने कहा, "समस्या मुख्य रूप से निजी स्कूलों के साथ है।"
कॉलेजों की गवर्निंग बॉडी में विधायकों, सांसदों और मंत्रियों की संभावित भूमिका से जुड़े सवाल पर बर्मन ने कहा कि राज्य अपनी नीतियों और प्रक्रियाओं के अनुसार काम करेगा। उन्होंने कहा, "हम किसी और की जगह नहीं लेना चाहते। हमारी अपनी व्यवस्था, अपनी नीतियां और परंपराएं हैं और काम उसी के अनुसार किया जाएगा। आने वाले दिनों में आपको समझ में आएगा कि हमारे कॉलेज कैसे काम कर रहे हैं।"