अपडेट्स: सरकार ने एयरलाइंस को दिए निर्देश- कोहरे के मौसम में योग्य क्रू ही उपलब्ध कराएं
मंत्रालय ने मंगलवार को कोहरे के मौसम की तैयारियों को लेकर विभिन्न पक्षों के साथ बैठक की। इसमें उड़ानों में देरी, रद्द होने या समय में बदलाव जैसी स्थितियों से निपटने के लिए पहले से तैयारी करने, समय पर सूचना देने, बेहतर तालमेल बनाने और यात्रियों को उचित सहायता उपलब्ध कराने पर चर्चा हुई। मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि एयरलाइंस को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि उनके ग्राउंड हैंडलिंग कर्मचारी पर्याप्त संख्या में उपलब्ध हों, सामान का प्रबंधन और विमानों को अगली उड़ान के लिए तैयार करने का काम कुशलता से हो तथा उड़ानों में बाधा आने पर यात्रियों को जरूरी मदद मिले।
बयान में कहा गया, 'एयरलाइंस को निर्देश दिया गया है कि वे कम दृश्यता में उड़ान संचालन के लिए योग्य क्रू और निर्धारित मानकों के अनुरूप विमानों की उपलब्धता सुनिश्चित करें, व्यावहारिक उड़ान शेड्यूल बनाएं और उड़ानों के संचालन को लेकर समय पर फैसले लें।' बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि उड़ानों में बाधा आने पर यात्रियों को देरी, उड़ान रद्द होने और प्रस्थान के बदले हुए समय की जानकारी एसएमएस, मोबाइल ऐप और ईमेल के जरिए समय पर दी जानी चाहिए।
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) को नियामकीय निगरानी सुनिश्चित करने, संबंधित निर्देशों का पालन कराने, विमानों और क्रू की तैयारियों की जांच करने तथा एयरलाइंस की ओर से यात्रियों को प्रभावी सहायता उपलब्ध कराने के उपाय सुनिश्चित करने को कहा गया है।
बच्चों को शोषण पर बढ़ेगी मध्यस्थों की जिम्मेदारी : केंद्र
असम के धुबरी जिले में अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने वाले नौ विदेशी नागरिकों को पकड़कर सीमा सुरक्षा बल (BSF) के हवाले कर दिया गया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार रात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इन लोगों को भारत-बांग्लादेश सीमा के रास्ते निष्कासित करने की प्रक्रिया के लिए BSF को सौंपा गया है। हालांकि, मुख्यमंत्री ने पकड़े गए लोगों की जातीय पहचान या उन्हें किस स्थान से गिरफ्तार किया गया, इस बारे में कोई जानकारी साझा नहीं की। सरमा ने कहा कि अवैध रूप से सीमा पार करने वालों को कानून का सामना करना पड़ेगा और सीमा सुरक्षा के मामले में कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
असम के चार जिले बांग्लादेश सीमा से जुड़े
असम के श्रीभूमि, कछार, धुबरी और दक्षिण सलमारा-मनकाचर जिले बांग्लादेश के साथ 267.5 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करते हैं। श्रीभूमि जिले के सुतारकांडी में एकीकृत चेक पोस्ट (ICP) स्थित है। पूर्वोत्तर भारत में भारत-बांग्लादेश सीमा पर कुल तीन ICP हैं, जिनमें अन्य दो मेघालय के डॉकी और त्रिपुरा के अखौरा में हैं। इसके अलावा, असम के दर्रंगा में भारत-भूटान सीमा पर भी एक ICP मौजूद है।
तमिलनाडु सरकार ग्रामीण महिलाओं को देगी मुफ्त दुधारू गायें
तमिलनाडु सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ग्रामीण इलाकों की 10 हजार पात्र महिलाओं को मुफ्त दुधारू गायें देने की योजना के तहत 57 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। राज्य सरकार ने बजट में इस योजना की घोषणा की थी। इसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को कमाई का नियमित साधन उपलब्ध कराने के साथ राज्य में दूध उत्पादन को बढ़ावा देना है। सरकार के मुताबिक, तमिलनाडु दूध उत्पादन और दुग्ध संग्रह के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। इस योजना के जरिए डेयरी क्षेत्र को और मजबूत करने के साथ ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधारने पर जोर दिया जाएगा। हर साल 10 हजार पात्र महिलाओं को इस योजना का लाभ देने का लक्ष्य रखा गया है। इससे महिलाओं को स्वरोजगार का अवसर मिलेगा और उनकी आय के लिए खेती या मजदूरी पर निर्भरता भी कम हो सकेगी।
हर गाय रोजाना कम से कम आठ लीटर दूध देगी
सरकारी अधिकारी के मुताबिक, योजना के तहत प्रत्येक लाभार्थी महिला को अच्छी नस्ल की संकर दुधारू गाय दी जाएगी, जो रोजाना कम से कम आठ लीटर दूध देने में सक्षम होगी। सरकार को उम्मीद है कि इससे महिलाओं की नियमित आमदनी बढ़ेगी और दुग्ध सहकारी समितियों को भी फायदा होगा। योजना में पशुओं की उचित देखभाल, वैज्ञानिक तरीके से डेयरी पालन और बेहतर पशुपालन प्रबंधन को बढ़ावा देने पर भी ध्यान दिया जाएगा। अधिकारी ने बताया कि सही देखभाल और पशु चिकित्सा सुविधाएं मिलने पर प्रत्येक गाय पांच साल में तीन से चार बार बच्चा दे सकती है। इससे ग्रामीण परिवारों को लंबे समय तक आर्थिक लाभ मिलने की संभावना है। सरकार का मानना है कि यह पहल महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के साथ परिवारों के पोषण स्तर में सुधार लाने और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी रोजगार के अवसर बढ़ाने में भी मदद करेगी।
माता-पिता के विरोध के चलते नहीं बचाई जा सकी बच्चे की जान
केरलम की महिला एवं बाल विकास मंत्री बिंदु कृष्णा ने बुधवार को विधानसभा में बताया कि अलाप्पुझा जिले के हरिपाड में कुपोषण से दो साल के बच्चे की मौत से पहले अधिकारियों ने उसे और उसके भाई-बहनों को बचाने की कई बार कोशिश की थी, लेकिन हर बार माता-पिता के विरोध के कारण सफलता नहीं मिली। मंत्री ने CPI विधायक पी. प्रसाद के सवाल के जवाब में बताया कि एक बार एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) के अधिकारियों ने बच्चों को बचाकर पुनर्वास गृह में पहुंचाया था, लेकिन छुट्टियों के दौरान माता-पिता उन्हें वापस घर ले आए और फिर वहां नहीं लौटे। इसके बाद हरिपाड के विधायक और राज्य के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला के हस्तक्षेप से परिवार को कोल्लम जिले के पथनापुरम स्थित गांधीभवन आश्रय गृह ले जाया गया, लेकिन मां ने आत्महत्या करने की धमकी दी और उसी शाम बच्चों को लेकर घर लौट आई। छह अक्टूबर को बच्चों को बचाने की एक और कोशिश की गई, लेकिन माता-पिता के विरोध के चलते वह भी नाकाम रही। मंत्री ने कहा कि घटना के बाद ऐसी परिस्थितियों को दोबारा होने से रोकने के लिए बैठकें की गई हैं और कई योजनाएं तैयार की गई हैं। उन्होंने विधायकों से अपने-अपने क्षेत्रों में ऐसे बच्चों की पहचान करने की अपील की, जिन्हें मदद और सुरक्षा की जरूरत है। गृह मंत्री चेन्निथला ने भी बताया कि परिवार को आश्रय गृह पहुंचाया गया था, लेकिन वहां हंगामे के बाद वे वापस चले गए। जानकारी के मुताबिक, बच्चा 18 अक्टूबर को घर में मृत मिला था। डॉक्टरों ने उसे गंभीर रूप से खून की कमी और कुपोषण से पीड़ित पाया था। उसका वजन महज 7.6 किलोग्राम था, जबकि इस उम्र के बच्चे का सामान्य वजन करीब 12 किलोग्राम होता है। बच्चे के माता-पिता राजेश और तारा के पांच बच्चे हैं, जिनमें एक नवजात भी शामिल है। दंपती के एक अन्य बच्चे की भी कुछ साल पहले कथित तौर पर जमीन पर गिरने से मौत हो गई थी। मंत्री ने भरोसा दिलाया कि सरकार बच्चों की सुरक्षा और पोषण सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाती रहेगी।