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टीएमसी: चुनाव आयोग ने अंतरिम आदेश नहीं दिया, 16 सितंबर तक मांगे दस्तावेज; किसके उम्मीदवार होंगे वैध?
Sun, 13 Sep 2026 07:59 PM IST
राहुल कुमार
पीटीआई, कोलकाता।
पीटीआई, कोलकाता।
Published by: राहुल कुमार
Updated Sun, 13 Sep 2026 07:59 PM IST
तृणमूल कांग्रेस के संगठनात्मक नियंत्रण विवाद में अहम अपडेट सामने आया है। चुनाव आयोग की ओऱ से इस ममले में कोई अंतरिम आदेश नहीं दिया है। इस मामले को अगली सुनवाई तक के लिए टाल दिया गया है। इस बीच उपचुनाव को लेकर उम्मीदवारों के नामों के एलान पर पेच फंस गया है।
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तृणमूल कांग्रेस संगठनात्मक विवाद।
- फोटो : एआई
विस्तार
णमूल कांग्रेस (टीएमसी) के संगठन पर नियंत्रण को लेकर चल रहे विवाद में चुनाव आयोग ने अभी कोई अंतरिम आदेश नहीं दिया है। पार्टी सांसद कल्याण बनर्जी ने रविवार को यह जानकारी दी। आयोग ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को 16 सितंबर तक अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने का समय दिया है। यदि आवश्यक हुआ तो 17 सितंबर को सुनवाई होगी। तृणमूल कांग्रेस के दो प्रतिद्वंद्वी गुटों ने शनिवार को चुनाव आयोग के अधिकारियों से अलग-अलग मुलाकात की थी। एक गुट की अगुवाई ममता बनर्जी कर रही हैं, जबकि दूसरे की विद्रोही नेता ऋतब्रत बनर्जी।
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कल्याण बनर्जी ने 'एक्स' पर लिखा, चुनाव आयोग ने कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं किया है। उन्होंने बताया कि आयोग ने उन्हें 16 और 17 सितंबर को पेश होने का निर्देश दिया है। इसलिए, उपचुनाव में उनके पार्टी उम्मीदवार पार्टी चिह्न 'घास के साथ दो फूल' पर चुनाव लड़ेंगे। ममता बनर्जी खेमे के सूत्रों ने बताया कि आयोग ने शनिवार की सुनवाई के बाद पार्टी को पत्र लिखा है। इसमें 16 सितंबर को दोपहर 3 बजे तक अतिरिक्त विवरण और दस्तावेज जमा करने की सूचना दी गई है। आयोग ने कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो 17 सितंबर को शाम 4 बजे सुनवाई होगी। यह नया पत्र पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा उपचुनावों के लिए नामांकन दाखिल करने की 16 सितंबर की समय सीमा से पहले आया है। ये उपचुनाव 6 अक्तूबर को होने हैं।
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ऋतब्रत गुट के दस्तावेज और ममता खेमे की प्रतिक्रिया
चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस को भेजे अपने पत्र के साथ ऋतब्रत बनर्जी गुट द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज की प्रतियां भी संलग्न की हैं। इन दस्तावेज में ऋतब्रत बनर्जी का 11 सितंबर का एक पत्र शामिल है। इसमें कोलकाता के अलीपुर की एक अदालत के आदेश के साथ 12 सितंबर का एक ईमेल भी है। पार्टी नेता चंद्रिमा भट्टाचार्य का 12 सितंबर का एक पत्र भी संलग्न है। इसके अलावा, 5 जून को प्रकाशित एक अखबार की कटिंग भी इन दस्तावेज का हिस्सा है। ममता बनर्जी खेमे ने रविवार को कुछ अतिरिक्त दस्तावेज चुनाव आयोग को सौंपे हैं और आयोग द्वारा दिए गए समय के भीतर और दस्तावेज जमा करेगा।
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संगठनात्मक संरचना पर विवाद
पार्टी ने अपने संगठनात्मक इतिहास से संबंधित दस्तावेज जमा किए हैं। इनमें 2015, 2017 और 2026 की संगठनात्मक प्रक्रियाओं से संबंधित दस्तावेज शामिल हैं। तृणमूल कांग्रेस लगातार कहती रही है कि उसकी संगठनात्मक संरचना वैध है। पार्टी ने तर्क दिया है कि कोई वास्तविक संगठनात्मक विवाद नहीं है। उसने हर पांच साल में संगठनात्मक चुनाव कराने की अपनी प्रथा का हवाला दिया है। पार्टी ने 2010 के संविधान के नियम 9(ए) का भी उल्लेख किया है, जो समिति के कार्यकाल को पांच साल बताता है।
विद्रोही गुट का दावा और अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता
ममता बनर्जी खेमे ने यह भी बताया कि प्रतिद्वंद्वी दावे का समर्थन करने वाले कई विधायकों ने इस साल पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर लड़ा था। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने दावा किया है कि पार्टी की संगठनात्मक संरचना अब वैध नहीं है और उसने चुनाव आयोग से मान्यता मांगी है। ऋतब्रत बनर्जी ने 22 जून को विद्रोही नेताओं की बैठक बुलाई थी। उन्होंने एक नई राष्ट्रीय कार्य समिति की घोषणा की थी, जिसमें अरूप रॉय को अध्यक्ष चुना गया था। तृणमूल कांग्रेस सूत्रों ने अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं में हाल के बदलावों की ओर भी इशारा किया। इसमें भट्टाचार्य को हटाकर ओ'ब्रायन और अभिषेक बनर्जी को अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता बनाया गया था।