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Rahul Gandhi: राहुल गांधी का मुस्लिम नेताओं को सीधा संदेश, बोले- मुस्लिम शब्द बोलने से न हिचके कांग्रेस
Sun, 24 May 2026 01:09 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Sun, 24 May 2026 01:09 AM IST
राहुल गांधी ने कांग्रेस के मुस्लिम नेताओं से समुदाय से जुड़े मुद्दों को खुलकर उठाने और पार्टी में मुस्लिम प्रतिनिधित्व बढ़ाने को कहा है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम शब्द इस्तेमाल करने से कांग्रेस को नहीं हिचकना चाहिए। बैठक में राहुल गांधी ने वोट चोरी, पश्चिम बंगाल और असम चुनावों की निष्पक्षता तथा देश की आर्थिक स्थिति को लेकर भी केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सवाल उठाए।
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राहुल गांधी, कांग्रेस नेता
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
राहुल गांधी ने कांग्रेस के मुस्लिम नेताओं से साफ कहा है कि उन्हें अपने समुदाय से जुड़े मुद्दों को खुलकर उठाना चाहिए और पार्टी में मुस्लिम समाज की भागीदारी बढ़ाने के लिए सक्रिय रूप से काम करना चाहिए। नई दिल्ली में कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग की सलाहकार परिषद की बैठक में राहुल गांधी ने यह संदेश दिया। सूत्रों के मुताबिक उन्होंने कहा कि अगर किसी मुस्लिम के साथ अन्याय होता है तो उसकी आवाज केवल ‘अल्पसंख्यक’ कहकर नहीं बल्कि ‘मुस्लिम’ पहचान के साथ उठाई जानी चाहिए। राहुल गांधी का यह बयान ऐसे समय आया है जब विपक्ष लगातार सामाजिक और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोल रहा है।
क्या राहुल गांधी ने कांग्रेस नेताओं को नया राजनीतिक संदेश दिया?
बैठक में राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी को मुस्लिम शब्द इस्तेमाल करने से बचना नहीं चाहिए। सूत्रों के अनुसार उन्होंने कहा कि आजकल लोग सीधे ‘मुस्लिम’ कहने के बजाय माइनॉरिटी यानी अल्पसंख्यक शब्द का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, जबकि समुदाय की असली पहचान को सामने रखना जरूरी है। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि अगर दलित, ओबीसी या सामान्य वर्ग के लोगों पर हमला होता है तो उनकी पहचान के साथ मुद्दा उठाया जाना चाहिए। उनका मानना था कि हर समुदाय की समस्याओं को सीधे उसी नाम से सामने लाने पर ही उसकी आवाज मजबूत होगी। कांग्रेस नेताओं के बीच इस बयान को पार्टी की नई राजनीतिक रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है।
ये भी पढ़ें- ट्रंप से बदला लेने की फिराक में ईरान: इवांका की हत्या की साजिश रचने का दावा, IRGC से जुड़ा आरोपी गिरफ्तार
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मुस्लिम समुदाय की भागीदारी बढ़ाने पर क्या कहा गया?
सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी ने कांग्रेस के अल्पसंख्यक विभाग से कहा कि पार्टी के भीतर ऐसा मंच तैयार किया जाए जिससे मुस्लिम समुदाय की भागीदारी और प्रतिनिधित्व बढ़ सके। उन्होंने कहा कि केवल चुनावी राजनीति नहीं बल्कि संगठन में भी समुदाय की मजबूत मौजूदगी जरूरी है। राहुल गांधी ने इस दौरान यह संकेत देने की कोशिश की कि कांग्रेस को अपने पारंपरिक वोट बैंक के साथ सीधे संवाद बढ़ाना होगा। बैठक में मौजूद नेताओं के अनुसार राहुल गांधी चाहते हैं कि पार्टी के नेता जमीन पर जाकर समुदाय से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाएं और लोगों के बीच भरोसा पैदा करें।
वोट चोरी और चुनाव प्रक्रिया पर राहुल गांधी ने क्या कहा?
बैठक के दौरान राहुल गांधी ने कथित वोट चोरी के मुद्दे का भी जिक्र किया। सूत्रों के अनुसार उन्होंने कहा कि पहले ममता बनर्जी इस मुद्दे पर कांग्रेस के साथ नहीं थीं, लेकिन अब वह भी इसके खिलाफ आंदोलन की बात कर रही हैं। राहुल गांधी ने पश्चिम बंगाल और असम विधानसभा चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि ये चुनाव पूरी तरह स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से नहीं कराए गए। हालांकि उन्होंने इस पर विस्तार से सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की। कांग्रेस के भीतर इस बयान को चुनावी पारदर्शिता के मुद्दे को आगे बढ़ाने की कोशिश माना जा रहा है।
देश की अर्थव्यवस्था और प्रधानमंत्री मोदी पर क्या बोले राहुल?
सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी ने देश की मौजूदा आर्थिक स्थिति का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लंबे समय तक आर्थिक स्थिति को प्रभावी तरीके से संभालने में सक्षम नहीं हैं। राहुल गांधी ने कहा कि बेरोजगारी, महंगाई और आर्थिक चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं और इन मुद्दों पर गंभीर चर्चा की जरूरत है। कांग्रेस अब सामाजिक प्रतिनिधित्व के साथ-साथ आर्थिक मुद्दों को भी बड़े राजनीतिक सवाल के तौर पर उठाने की तैयारी में दिखाई दे रही है।
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क्या राहुल गांधी ने कांग्रेस नेताओं को नया राजनीतिक संदेश दिया?
बैठक में राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी को मुस्लिम शब्द इस्तेमाल करने से बचना नहीं चाहिए। सूत्रों के अनुसार उन्होंने कहा कि आजकल लोग सीधे ‘मुस्लिम’ कहने के बजाय माइनॉरिटी यानी अल्पसंख्यक शब्द का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, जबकि समुदाय की असली पहचान को सामने रखना जरूरी है। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि अगर दलित, ओबीसी या सामान्य वर्ग के लोगों पर हमला होता है तो उनकी पहचान के साथ मुद्दा उठाया जाना चाहिए। उनका मानना था कि हर समुदाय की समस्याओं को सीधे उसी नाम से सामने लाने पर ही उसकी आवाज मजबूत होगी। कांग्रेस नेताओं के बीच इस बयान को पार्टी की नई राजनीतिक रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है।
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मुस्लिम समुदाय की भागीदारी बढ़ाने पर क्या कहा गया?
सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी ने कांग्रेस के अल्पसंख्यक विभाग से कहा कि पार्टी के भीतर ऐसा मंच तैयार किया जाए जिससे मुस्लिम समुदाय की भागीदारी और प्रतिनिधित्व बढ़ सके। उन्होंने कहा कि केवल चुनावी राजनीति नहीं बल्कि संगठन में भी समुदाय की मजबूत मौजूदगी जरूरी है। राहुल गांधी ने इस दौरान यह संकेत देने की कोशिश की कि कांग्रेस को अपने पारंपरिक वोट बैंक के साथ सीधे संवाद बढ़ाना होगा। बैठक में मौजूद नेताओं के अनुसार राहुल गांधी चाहते हैं कि पार्टी के नेता जमीन पर जाकर समुदाय से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाएं और लोगों के बीच भरोसा पैदा करें।
वोट चोरी और चुनाव प्रक्रिया पर राहुल गांधी ने क्या कहा?
बैठक के दौरान राहुल गांधी ने कथित वोट चोरी के मुद्दे का भी जिक्र किया। सूत्रों के अनुसार उन्होंने कहा कि पहले ममता बनर्जी इस मुद्दे पर कांग्रेस के साथ नहीं थीं, लेकिन अब वह भी इसके खिलाफ आंदोलन की बात कर रही हैं। राहुल गांधी ने पश्चिम बंगाल और असम विधानसभा चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि ये चुनाव पूरी तरह स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से नहीं कराए गए। हालांकि उन्होंने इस पर विस्तार से सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की। कांग्रेस के भीतर इस बयान को चुनावी पारदर्शिता के मुद्दे को आगे बढ़ाने की कोशिश माना जा रहा है।
देश की अर्थव्यवस्था और प्रधानमंत्री मोदी पर क्या बोले राहुल?
सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी ने देश की मौजूदा आर्थिक स्थिति का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लंबे समय तक आर्थिक स्थिति को प्रभावी तरीके से संभालने में सक्षम नहीं हैं। राहुल गांधी ने कहा कि बेरोजगारी, महंगाई और आर्थिक चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं और इन मुद्दों पर गंभीर चर्चा की जरूरत है। कांग्रेस अब सामाजिक प्रतिनिधित्व के साथ-साथ आर्थिक मुद्दों को भी बड़े राजनीतिक सवाल के तौर पर उठाने की तैयारी में दिखाई दे रही है।