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कर्नाटक: स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों और गन्ने के दाम को लेकर सड़क पर उतरे किसान, केंद्रीय मंत्री ने क्या कहा?
Tue, 13 Oct 2026 01:48 PM IST
अमन मौर्या
पीटीआई, बंगलूरू, कर्नाटक
पीटीआई, बंगलूरू, कर्नाटक
Published by: अमन मौर्या
Updated Tue, 13 Oct 2026 01:48 PM IST
कर्नाटक में गन्ना किसानों ने गन्ने के अधिक दाम और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की मांग को लेकर कई नेशनल हाईवे जाम कर दिए हैं, जिससे पुणे-बेंगलुरु समेत कई रूटों पर ट्रैफिक बाधित रहा।
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कर्नाटक में किसान आंदोलन
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
कर्नाटक में मंगलवार को गन्ना किसानों ने अपनी उपज के लिए ज्यादा दाम और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की मांग को लेकर कई जगहों पर नेशनल हाईवे जाम कर दिए। बेलगावी, बागलकोट, विजयपुरा और धारवाड़ जिलों से भी विरोध प्रदर्शन की खबरें आईं। इससे पुणे-बेंगलुरु रूट और निडागुंडी के पास नेशनल हाईवे-50 समेत कई अहम हाईवे पर ट्रैफिक बाधित रहा। बेलगावी जिले के हुक्केरी तालुक में हत्तरगी टोल प्लाजा के पास किसानों ने पुणे-बेंगलुरु नेशनल हाईवे की दोनों तरफ की लेन जाम कर दीं। बेलगावी जिले में कुगनौली चेक-पोस्ट और हिरेबागेवाड़ी टोल प्लाजा पर भी विरोध प्रदर्शन की खबरें आईं।
ये भी पढ़ें: तमिलनाडु: एआईएडीएमके विधायकों के इस्तीफे वाले मामले पर विधानसभा अध्यक्ष का फैसला बरकरार, हाईकोर्ट ने क्या कहा?
आंदोलन को लेकर किसानों ने क्या कहा?
किसानों ने कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे। सोमवार को दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों के साथ हुई उनकी बैठक में गन्ने के दाम पर कोई तुरंत फैसला नहीं हो सका। वे न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी, उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) तय करने और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की मांग कर रहे हैं। स्वामीनाथन रिपोर्ट, जिसे आधिकारिक तौर पर राष्ट्रीय किसान आयोग (एनसीएफ) की रिपोर्ट के नाम से जाना जाता है, भारतीय कृषि में संरचनात्मक सुधारों के लिए एक व्यापक ब्लूप्रिंट थी। कृषि वैज्ञानिक प्रो. एम. एस. स्वामीनाथन की अध्यक्षता में यह आयोग 2004 में बनाया गया था।
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किसान नेताओं ने किया आंदोलन का नेतृत्व
नेशनल हाईवे पर किसान नेता आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे। कुछ प्रदर्शनकारी ट्रैफिक रोकने के लिए गाड़ियों के सामने लेट गए। बागलकोट जिले में किसानों ने गोविंदा पट्टी के पास रायचूर-सोलापुर नेशनल हाईवे जाम कर दिया, जिससे ट्रक और दूसरी गाड़ियां रुक गईं। हसिरु सेना (ग्रीन आर्मी) से जुड़े किसानों ने निडागुंडी शहर के बाहरी इलाके में नेशनल हाईवे-50 जाम कर दिया, जिससे विजयपुरा और बेंगलुरु के बीच ट्रैफिक बाधित हुआ।
इस दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की, लेकिन किसान इस बात पर अड़े रहे कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक जाम जारी रहेगा। धारवाड़ में किसान संगठनों ने पालिक्कोप्पा के पास हाईवे जाम करने का आह्वान किया, जिसके बाद पुलिस ने एहतियात के तौर पर अतिरिक्त जवानों (जिनमें कर्नाटक राज्य रिजर्व पुलिस के जवान भी शामिल थे) को तैनात किया।
केंद्रीय खाद्य मंत्री ने क्या कहा?
केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने सोमवार को किसानों से अपना आंदोलन वापस लेने की अपील की थी और उन्हें भरोसा दिलाया था कि केंद्र सरकार उनकी चिंताओं का समाधान करेगी। किसान नेताओं के साथ बैठक के बाद उन्होंने कहा, 'भारत सरकार, यानी मोदी सरकार, आपके साथ है। यह काम अकेले एक या दो मंत्रालयों द्वारा नहीं किया जा सकता; इसमें कई मंत्रालय शामिल हैं। राज्य सरकारों की भी इसमें भूमिका है।' जोशी ने कहा कि उन्होंने और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों की शिकायतें सुनी हैं और इन मुद्दों की जांच के लिए एक समिति गठित की जाएगी।
उन्होंने कहा कि इन कीमतों को तय करने से पहले, हम आधिकारिक तौर पर राज्य सरकारों से जानकारी प्राप्त करते हैं। चूंकि इसमें कई कारक शामिल हैं, इसलिए किसी को भी परेशान होने की जरूरत नहीं है। उन्होंने किसानों से सड़कों पर न उतरने की अपील की।
ये भी पढ़ें: 'झोला उठाने का वक्त आ गया': महंगाई के आंकड़ों को लेकर सरकार पर हमलवार कांग्रेस, आईएमएफ रिपोर्ट पर क्या कहा?
सीएम डीके शिवकुमार ने क्या कहा?
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार (जिन्होंने सोमवार रात जोशी के साथ बातचीत भी की थी) ने कहा कि इस मुद्दे पर अन्य राज्यों के साथ भी विचार-विमर्श की आवश्यकता है। उन्होंने यहां पत्रकारों से कहा, किसान गन्ने के लिए बेहतर कीमत की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। हमने इस बात पर चर्चा की कि क्या किया जाना चाहिए। राज्य में किसानों की स्थिति और फैक्ट्रियों की हालत पर बात हुई।' उन्होंने आगे कहा, 'यह मुद्दा केवल हमारे राज्य तक सीमित नहीं है। उन्हें अन्य राज्यों से भी परामर्श करना होगा। उन्होंने कहा है कि वे सभी से बात करेंगे और किसी निर्णय पर पहुंचेंगे।'
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आंदोलन को लेकर किसानों ने क्या कहा?
किसानों ने कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे। सोमवार को दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों के साथ हुई उनकी बैठक में गन्ने के दाम पर कोई तुरंत फैसला नहीं हो सका। वे न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी, उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) तय करने और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की मांग कर रहे हैं। स्वामीनाथन रिपोर्ट, जिसे आधिकारिक तौर पर राष्ट्रीय किसान आयोग (एनसीएफ) की रिपोर्ट के नाम से जाना जाता है, भारतीय कृषि में संरचनात्मक सुधारों के लिए एक व्यापक ब्लूप्रिंट थी। कृषि वैज्ञानिक प्रो. एम. एस. स्वामीनाथन की अध्यक्षता में यह आयोग 2004 में बनाया गया था।
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किसान नेताओं ने किया आंदोलन का नेतृत्व
नेशनल हाईवे पर किसान नेता आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे। कुछ प्रदर्शनकारी ट्रैफिक रोकने के लिए गाड़ियों के सामने लेट गए। बागलकोट जिले में किसानों ने गोविंदा पट्टी के पास रायचूर-सोलापुर नेशनल हाईवे जाम कर दिया, जिससे ट्रक और दूसरी गाड़ियां रुक गईं। हसिरु सेना (ग्रीन आर्मी) से जुड़े किसानों ने निडागुंडी शहर के बाहरी इलाके में नेशनल हाईवे-50 जाम कर दिया, जिससे विजयपुरा और बेंगलुरु के बीच ट्रैफिक बाधित हुआ।
इस दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की, लेकिन किसान इस बात पर अड़े रहे कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक जाम जारी रहेगा। धारवाड़ में किसान संगठनों ने पालिक्कोप्पा के पास हाईवे जाम करने का आह्वान किया, जिसके बाद पुलिस ने एहतियात के तौर पर अतिरिक्त जवानों (जिनमें कर्नाटक राज्य रिजर्व पुलिस के जवान भी शामिल थे) को तैनात किया।
केंद्रीय खाद्य मंत्री ने क्या कहा?
केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने सोमवार को किसानों से अपना आंदोलन वापस लेने की अपील की थी और उन्हें भरोसा दिलाया था कि केंद्र सरकार उनकी चिंताओं का समाधान करेगी। किसान नेताओं के साथ बैठक के बाद उन्होंने कहा, 'भारत सरकार, यानी मोदी सरकार, आपके साथ है। यह काम अकेले एक या दो मंत्रालयों द्वारा नहीं किया जा सकता; इसमें कई मंत्रालय शामिल हैं। राज्य सरकारों की भी इसमें भूमिका है।' जोशी ने कहा कि उन्होंने और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों की शिकायतें सुनी हैं और इन मुद्दों की जांच के लिए एक समिति गठित की जाएगी।
उन्होंने कहा कि इन कीमतों को तय करने से पहले, हम आधिकारिक तौर पर राज्य सरकारों से जानकारी प्राप्त करते हैं। चूंकि इसमें कई कारक शामिल हैं, इसलिए किसी को भी परेशान होने की जरूरत नहीं है। उन्होंने किसानों से सड़कों पर न उतरने की अपील की।
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सीएम डीके शिवकुमार ने क्या कहा?
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार (जिन्होंने सोमवार रात जोशी के साथ बातचीत भी की थी) ने कहा कि इस मुद्दे पर अन्य राज्यों के साथ भी विचार-विमर्श की आवश्यकता है। उन्होंने यहां पत्रकारों से कहा, किसान गन्ने के लिए बेहतर कीमत की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। हमने इस बात पर चर्चा की कि क्या किया जाना चाहिए। राज्य में किसानों की स्थिति और फैक्ट्रियों की हालत पर बात हुई।' उन्होंने आगे कहा, 'यह मुद्दा केवल हमारे राज्य तक सीमित नहीं है। उन्हें अन्य राज्यों से भी परामर्श करना होगा। उन्होंने कहा है कि वे सभी से बात करेंगे और किसी निर्णय पर पहुंचेंगे।'