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Hindi News ›   India News ›   Jharkhand Exam Controversy: 25-Day Protest, High Court Stay and the Recruitment Crisis Explained

JPSC Exam Row: रांची में 25 दिन आंदोलन, CM के फैसले पर हाईकोर्ट की रोक, अब सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई; अबतक क्या?

Sat, 22 Aug 2026 04:31 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Sat, 22 Aug 2026 04:31 AM IST
सार
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Jharkhand Exam Controversy: झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी को लेकर शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब सरकार और चयनित अभ्यर्थियों के बीच बड़े टकराव में बदल गया है। सरकार ने कई परीक्षाएं रद्द और कुछ स्थगित कर जांच का फैसला किया, लेकिन सफल अभ्यर्थियों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। हाईकोर्ट ने भी कुछ नियुक्तियों को रद्द करने के फैसले पर रोक लगा दी है। ऐसे में क्या इस पूरे विवाद का समाधान अब अदालत के रास्ते निकलेगा? आइए, इस पूरे मामले को शुरू से समझते हैं...

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Jharkhand Exam Controversy: 25-Day Protest, High Court Stay and the Recruitment Crisis Explained
झारखंड भर्ती विवाद में 25 दिन के आंदोलन ने कैसे बदली पूरी तस्वीर? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का आंदोलन करीब 25 दिन पहले तेज हुआ था। रांची के मोरहाबादी मैदान स्थित बापू वाटिका से शुरू हुआ यह आंदोलन धीरे-धीरे पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन गया। छात्रों का आरोप था कि भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया में गड़बड़ियां हुई हैं और योग्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय हो रहा है। आंदोलन आगे बढ़ा तो छात्रों ने सरकार पर परीक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं करने का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन तेज कर दिया। 

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सीएम हेमंत सोरेन की सरकार ने परीक्षाएं रद्द करने का फैसला क्यों लिया?

लगातार प्रदर्शन और कथित अनियमितताओं की जांच के बीच सरकार ने 18 अगस्त को बड़ा फैसला लिया। सरकार ने 2014 के बाद जेपीएससी, जेएसएससी और आउटसोर्स एजेंसी टीडीपीएल की ओर से कराई गई 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला किया। इसके अलावा छह परीक्षाओं को स्थगित किया गया और 17 परीक्षाओं के परिणामों व नियुक्तियों की सीआईडी जांच का आदेश दिया गया। सरकार की ओर से परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट, आंतरिक निगरानी प्रकोष्ठ और परीक्षा सुधार समिति जैसी व्यवस्थाएं बनाने की बात भी सामने आई।

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जेपीएससी-जेएसएससी में सफल अभ्यर्थियों ने अलग मोर्चा क्यों खोल दिया?

सरकार के फैसले से जहां आंदोलन कर रहे छात्रों को बड़ी सफलता मिली, वहीं दूसरी तरफ पहले से चयनित अभ्यर्थियों के सामने नौकरी जाने का संकट खड़ा हो गया। करीब 2,700 सफल अभ्यर्थियों ने इसका विरोध शुरू किया। उनका कहना है कि अगर किसी परीक्षा में गड़बड़ी हुई है तो उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए, लेकिन मेरिट के आधार पर नौकरी पाने वाले उम्मीदवारों को इसकी सजा नहीं मिलनी चाहिए। इनमें जेएसएससी-सीजीएल के चयनित अभ्यर्थी भी शामिल हैं। इन अभ्यर्थियों ने सरकार के फैसले के खिलाफ सड़क से लेकर अदालत तक अपना पक्ष रखने का फैसला किया।

हाईकोर्ट ने सरकार के फैसले पर रोक लगाकर क्या राहत दी?

भर्ती विवाद में झारखंड हाईकोर्ट के आदेश से चयनित अभ्यर्थियों को बड़ी अंतरिम राहत मिली। अदालत ने 11वीं और 13वीं जेपीएससी परीक्षा से हुई नियुक्तियों तथा खाद्य सुरक्षा पदाधिकारियों की नियुक्तियों को रद्द करने वाली अधिसूचनाओं पर रोक लगाई। इसके बाद शुक्रवार को न्यायमूर्ति दीपक रोशन की पीठ ने जेएसएससी-सीजीएल से हुई नियुक्तियों और बाल विकास परियोजना पदाधिकारी यानी सीडीपीओ की भर्तियों को रद्द करने के फैसले पर भी रोक लगा दी। इससे फिलहाल इन अभ्यर्थियों को राहत मिली है, हालांकि यह अंतिम फैसला नहीं है।

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सुप्रीम कोर्ट तक क्यों पहुंचा मामला?

हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद भी विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। परीक्षा रद्द करने और नियुक्तियों को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई है। मामले में याचिका दायर की गई है और सोमवार को सुनवाई होने की बात सामने आई है। ऐसे में आने वाले दिनों में अदालतों के फैसले यह तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं कि जिन परीक्षाओं और नियुक्तियों पर सवाल उठे हैं, उनका भविष्य क्या होगा।

पक्ष ने हेमंत सोरेन सरकार पर क्या आरोप लगाए?

भर्ती परीक्षा विवाद को लेकर विपक्ष लगातार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार को घेर रहा है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने छात्रों पर बल प्रयोग किए जाने का आरोप लगाया। पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने रांची, हजारीबाग और गिरिडीह में छात्रों के खिलाफ कथित कार्रवाई को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और इसे छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़कर सवाल उठाए। बाबूलाल मरांडी ने सरकार पर छात्रों के आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश करने का आरोप लगाया और भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच सीबीआई से कराने की मांग भी पहले उठा चुके हैं।

राहुल गांधी को लेकर सवाल क्यों उठे?

झारखंड के भर्ती परीक्षा विवाद में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की भूमिका को लेकर भी सवाल उठे। आंदोलनकारी छात्रों की ओर से आरोप लगाया गया कि राज्य में इतने बड़े आंदोलन के बावजूद कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की ओर से पर्याप्त प्रतिक्रिया नहीं आई। इसी बीच कांग्रेस सांसद ने 17 अगस्त को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखा। इसके बाद परीक्षा रद्द करने और जांच से जुड़े सरकार के फैसले को लेकर राजनीतिक चर्चा और तेज हुई। देर रात आंदोलन खत्म करने का एलान भी हुआ, लेकिन चयनित अभ्यर्थियों के विरोध ने पूरे मामले को फिर नए मोड़ पर ला दिया।

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10 अगस्त का विधानसभा घेराव क्यों रहा चर्चा में?

आंदोलन के दौरान 10 अगस्त का विधानसभा घेराव भी खासा चर्चा में रहा। बड़ी संख्या में छात्र और युवा अपनी मांगों को लेकर विधानसभा की ओर बढ़े। पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की और इस दौरान तनाव की स्थिति बनी। आंदोलनकारियों ने भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग उठाई। छात्रों पर कथित लाठीचार्ज और बल प्रयोग को लेकर विपक्ष ने सरकार से तीखे सवाल किए। इसके बाद आंदोलन और ज्यादा राजनीतिक चर्चा में आ गया।

रांची के बाद हजारीबाग और गिरिडीह में क्या हुआ?

शुक्रवार को रांची में जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच के प्रदर्शन के दौरान पुलिस और छात्रों के बीच झड़प हो गई। छात्र जेपीएससी कार्यालय की ओर मार्च कर रहे थे। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने निर्धारित रास्ता बदल दिया और यातायात बाधित हुआ, जिसके बाद स्थिति बिगड़ी। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस और सत्तारूढ़ झामुमो के कार्यकर्ताओं ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन रोकने की कोशिश की और महिला प्रदर्शनकारियों के साथ भी दुर्व्यवहार हुआ। हजारीबाग और गिरिडीह में भी छात्रों और झामुमो कार्यकर्ताओं के बीच टकराव की बात सामने आई। झामुमो ने भाजपा पर छात्रों के मुद्दे का राजनीतिक इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।

सीआईडी जांच में अब तक क्या सामने आया?

भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच सीआईडी कर रही है। 2023 की जेएसएससी ग्रेजुएट लेवल संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा से जुड़े मामले में विशेष जांच दल अब तक 37 संदिग्धों से पूछताछ कर चुका है। जांच का दायरा केवल परीक्षा कराने वाली एजेंसी तक सीमित नहीं है। एजेंसी के चयन, टेंडर प्रक्रिया, परीक्षा संचालन और डेटा प्रोसेसिंग से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है। सीआईडी ने शुक्रवार को आम लोगों से भी कथित अनियमितताओं से जुड़ी कोई जानकारी होने पर उसे जांच एजेंसी तक पहुंचाने की अपील की।

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अब आगे क्या होगा और छात्रों के सामने सबसे बड़ा सवाल क्या है?

  • झारखंड का भर्ती परीक्षा विवाद अब दो अलग-अलग पक्षों में बंट गया है। एक तरफ वे छात्र हैं जो कथित गड़बड़ियों की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
  • दूसरी तरफ वे हजारों चयनित अभ्यर्थी हैं, जिन्होंने मेरिट के आधार पर नौकरी हासिल की और अब परीक्षा रद्द होने से अपनी नौकरी बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं।
  • हाईकोर्ट की अंतरिम रोक और सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई इस विवाद की अगली दिशा तय करेगी।
  • वहीं, जेएलकेएम नेता देवेंद्र नाथ महतो ने 24 अगस्त से ‘रिक्रूटमेंट सिस्टम रिफॉर्म्स यात्रा’ शुरू करने का एलान किया है और सरकार ने 15 सितंबर को अदालत में अपना पक्ष मजबूती से नहीं रखा तो मुख्यमंत्री आवास के घेराव की चेतावनी भी दी गई है।
  • यानी सरकार के सामने अब एक साथ परीक्षा व्यवस्था में भरोसा बहाल करने, कथित गड़बड़ियों की जांच कराने और पहले से चयनित अभ्यर्थियों के भविष्य को सुरक्षित रखने की चुनौती है।

सोनम वांगचुक और देवेंद्र नाथ महतो की भूमिका क्यों रही अहम?

झारखंड के छात्र आंदोलन में देवेंद्र नाथ महतो का नाम लगातार सामने आया। उन्होंने लंबे समय तक आमरण अनशन किया और उनकी तबीयत भी बिगड़ी। आंदोलन के दौरान लद्दाख के शिक्षाविद और कॉकरोत जनता पार्टी के मंच पर अनशन करने वाले सोनम वांगचुक ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये महतो का समर्थन किया था। महतो ने सरकार की ओर से परीक्षाएं रद्द करने और जांच की घोषणा के बाद अपना अनशन खत्म किया। हालांकि उन्होंने साफ किया कि छात्रों के हित और भर्ती व्यवस्था में सुधार की लड़ाई जारी रहेगी। जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच ने भी सरकार को दो महीने का समय देकर निष्पक्ष जांच और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग की है।

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