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Indian Railways: अब रेलवे स्टेशनों पर पीने के पानी की होगी कड़ी निगरानी, सीएजी की रिपोर्ट के बाद उठाए ये कदम
Mon, 24 Aug 2026 02:10 PM IST
जितेंद्र भारद्वाज
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
Published by: जितेंद्र भारद्वाज
Updated Mon, 24 Aug 2026 02:10 PM IST
रेलवे का यह अभियान सीएजी की हालिया रिपोर्ट के बाद अहम है। सीएजी की ऑडिट में 49 में से आठ स्टेशनों के पानी के नमूनों में ई-कोलाई बैक्टीरिया मिला था। रिपोर्ट में पानी की नियमित जांच और क्लोरीन की निगरानी में कमी पर सवाल उठाए गए थे।
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भारतीय रेलवे कैग रिपोर्ट पर सख्त
- फोटो : एआई जेनरेट फोटो
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विस्तार
यात्रियों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए रेलवे ने पूरे नेटवर्क में विशेष स्वच्छता अभियान शुरू किया है। स्टेशनों पर पानी की टंकियों, फिल्ट्रेशन सिस्टम और पेयजल ढांचे की सफाई व डिसइंफेक्शन किया जाएगा। पानी की गुणवत्ता की निगरानी स्रोत से लेकर यात्रियों के पीने के स्थान तक होगी। रेलवे का यह अभियान सीएजी की हालिया रिपोर्ट के बाद अहम है। सीएजी की ऑडिट में 49 में से आठ स्टेशनों के पानी के नमूनों में ई-कोलाई बैक्टीरिया मिला था। रिपोर्ट में पानी की नियमित जांच और क्लोरीन की निगरानी में कमी पर सवाल उठाए गए थे।
रेलवे के द्वारा उठाए जाएंगे ये कदम
वाटर कूलर और आरओ-यूवी सिस्टम की जांच
रेलवे बोर्ड ने मंजूर ओवरहेड और भूमिगत टंकियों के निर्माण व बदलाव के काम में तेजी के निर्देश दिए हैं। जरूरत के अनुसार नए कामों को मंजूरी दी जाएगी। अभियान में मिली कमियों की स्टेशनवार रिपोर्ट तैयार होगी और उनके सुधार की निगरानी की जाएगी। पेयजल व्यवस्था के तहत रेलवे कॉलोनियों और कार्यस्थलों को भी शामिल किया गया है। रेलवे का लक्ष्य नियमित निरीक्षण, सफाई, रखरखाव और पानी की जांच के जरिए यात्रियों और कर्मचारियों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना है।
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रेलवे के द्वारा उठाए जाएंगे ये कदम
- पानी के स्रोत, ट्रीटमेंट-फिल्ट्रेशन प्लांट, भूमिगत व ओवरहेड टैंक, पीवीसी टैंक, वाटर बूथ, नल और वितरण केंद्रों की जांच होगी।
- टंकियों को खाली कर गाद हटाई जाएगी। सफाई और डिसइंफेक्शन के बाद ढक्कन, वेंट और ओवरफ्लो प्वाइंट की भी जांच होगी।
- खराब टैंक, पाइपलाइन और फिल्टर की मरम्मत या उन्हें बदला जाएगा। पेयजल और गैर-पेयजल लाइनों के क्रॉस कनेक्शन की जांच होगी।
- पाइपलाइन में लीकेज दूर कर पानी की बर्बादी रोकी जाएगी। वहीं, हैंडपंप और बोरवेल से मिलने वाले पानी की भी जांच होगी, ताकि वह प्रदूषण मुक्त और पीने योग्य रहे।
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वाटर कूलर और आरओ-यूवी सिस्टम की जांच
- वाटर कूलर की टंकियों की सफाई होगी। कूलर, पाइप और नलों में लीकेज तत्काल ठीक किए जाएंगे।
- आरओ-यूवी सिस्टम की जांच होगी। जरूरत के अनुसार नए सिस्टम लगाए जाएंगे और खराब फिल्टर व अन्य हिस्से बदले जाएंगे।
- वाटर वेंडिंग मशीनों पर भी सफाई और गुणवत्ता के यही मानक लागू होंगे।
- स्रोत, टैंक, कूलर, वेंडिंग मशीन और नलों से पानी के नमूने लेकर भौतिक, रासायनिक और बैक्टीरियोलॉजिकल जांच होगी।
- पानी में अवशिष्ट क्लोरीन की रोजाना निगरानी होगी। जरूरत पड़ने पर दोबारा क्लोरीनेशन किया जाएगा।
रेलवे बोर्ड ने मंजूर ओवरहेड और भूमिगत टंकियों के निर्माण व बदलाव के काम में तेजी के निर्देश दिए हैं। जरूरत के अनुसार नए कामों को मंजूरी दी जाएगी। अभियान में मिली कमियों की स्टेशनवार रिपोर्ट तैयार होगी और उनके सुधार की निगरानी की जाएगी। पेयजल व्यवस्था के तहत रेलवे कॉलोनियों और कार्यस्थलों को भी शामिल किया गया है। रेलवे का लक्ष्य नियमित निरीक्षण, सफाई, रखरखाव और पानी की जांच के जरिए यात्रियों और कर्मचारियों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना है।
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