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HIV Prevention: एचआईवी से बचाव के लिए पहली बार लेनाकैपाविर इंजेक्शन को मंजूरी, किन लोगों को मिलेगा फायदा?
HIV Prevention: एचआईवी से बचाव के लिए लेनाकैपाविर इंजेक्शन को भारत में पहली बार मंजूरी मिली है। संक्रमण के ज्यादा खतरे वाले लोगों के लिए यह कितना कारगर होगा और किसे मिलेगा फायदा? जानिए इस रिपोर्ट में।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
देश में पहली बार एचआईवी संक्रमण के ज्यादा खतरे वाले लोगों को बीमारी से बचाने के लिए लेनाकैपाविर इंजेक्शन के इस्तेमाल को मंजूरी मिली है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की विशेषज्ञ समितियों ने इन दवाओं के निर्माण, बिक्री और क्लिनिकल ट्रायल को लेकर अहम सिफारिशें की हैं।
समिति ने लेनाकैपाविर इंजेक्शन को उन वयस्कों और कम से कम 35 किलो वजन वाले किशोरों में एचआईवी-1 संक्रमण का खतरा कम करने के लिए प्री-एक्सपोजर प्रोफाइलेक्सिस के तौर पर इस्तेमाल की जरूरत को पूरा करने वाला विकल्प माना है, जिनमें संक्रमण का खतरा ज्यादा है।
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हालांकि, दवा शुरू करने से पहले एचआईवी जांच निगेटिव होना जरूरी होगा। वहीं त्वचा की एटॉपिक डर्मेटाइटिस बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए रक्सोलिटिनिब क्रीम और पेट-आंत से जुड़ी बीमारी में इस्तेमाल होने वाली रिफैक्सिमिन दवा को सैशे के रूप में उपलब्ध कराने की दिशा में भी कदम बढ़ा है।
रिफैक्सिमिन को 400 और 550 मिलीग्राम के सैशे में बनाने और बेचने की अनुमति देने की सिफारिश की गई है। एटॉपिक डर्मेटाइटिस त्वचा की बीमारी है, जिसमें लंबे समय तक त्वचा से जुड़ी परेशानी बनी रह सकती है। इसके हल्के से मध्यम मामलों में इस्तेमाल के लिए रक्सोलिटिनिब क्रीम 1.5 फीसदी के निर्माण और बिक्री की अनुमति देने की सिफारिश की गई है। यह क्रीम गैर-प्रतिरक्षा-कमजोर वयस्क मरीजों में इस्तेमाल के लिए प्रस्तावित है।
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समिति ने लेनाकैपाविर इंजेक्शन को उन वयस्कों और कम से कम 35 किलो वजन वाले किशोरों में एचआईवी-1 संक्रमण का खतरा कम करने के लिए प्री-एक्सपोजर प्रोफाइलेक्सिस के तौर पर इस्तेमाल की जरूरत को पूरा करने वाला विकल्प माना है, जिनमें संक्रमण का खतरा ज्यादा है।
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हालांकि, दवा शुरू करने से पहले एचआईवी जांच निगेटिव होना जरूरी होगा। वहीं त्वचा की एटॉपिक डर्मेटाइटिस बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए रक्सोलिटिनिब क्रीम और पेट-आंत से जुड़ी बीमारी में इस्तेमाल होने वाली रिफैक्सिमिन दवा को सैशे के रूप में उपलब्ध कराने की दिशा में भी कदम बढ़ा है।
रिफैक्सिमिन को 400 और 550 मिलीग्राम के सैशे में बनाने और बेचने की अनुमति देने की सिफारिश की गई है। एटॉपिक डर्मेटाइटिस त्वचा की बीमारी है, जिसमें लंबे समय तक त्वचा से जुड़ी परेशानी बनी रह सकती है। इसके हल्के से मध्यम मामलों में इस्तेमाल के लिए रक्सोलिटिनिब क्रीम 1.5 फीसदी के निर्माण और बिक्री की अनुमति देने की सिफारिश की गई है। यह क्रीम गैर-प्रतिरक्षा-कमजोर वयस्क मरीजों में इस्तेमाल के लिए प्रस्तावित है।