एक्सप्लेनर: राम-कृष्ण की तुलना पर क्यों घिरे धीरेंद्र शास्त्री, पहले किन बयानों पर मचा बवाल और कब मांगी माफी?
बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री भगवान राम और श्रीकृष्ण की तुलना को लेकर विवादों में हैं। उनकी टिप्पणी के बाद राजनीतिक नेताओं, संतों और आम लोगों ने विरोध जताया। विवाद बढ़ने पर उन्होंने माफी मांगी। इससे पहले उनकी टिप्पणियों को लेकर विवाद हो चुका है।
विस्तार
बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री एक बार फिर अपने बयान को लेकर विवादों में हैं। एक कथा के दौरान भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण की तुलना को लेकर उनकी टिप्पणी पर बवाल मच गया। विवाद बढ़ने के बाद धीरेंद्र शास्त्री ने माफी मांग ली। हालांकि, ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। इससे पहले भी वो अपने बयानों की वजह से विवादों में पड़ चुके हैं।
ताजा विवाद क्या है? धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी पर क्यों बवाल मचा है? विवाद के बाद उन्होंने क्या सफाई दी है? इससे पहले अपने किन बयानों के कारण धीरेंद्र शास्त्री विवाद में पड़े?
कौन हैं धीरेंद्र शास्त्री?
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर हैं। उन्हें बाबा बागेश्वर और बागेश्वर धाम सरकार के नाम से भी जाना जाता है। उनका जन्म 4 जुलाई 1996 को छतरपुर जिले के गढ़ा गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम रामकृपाल गर्ग और मां का नाम सरोज है। धीरेंद्र शास्त्री धार्मिक कथाओं और प्रवचनों के लिए जाने जाते हैं। वे रामकथा, हनुमंत कथा और श्रीमद्भागवत का पाठ करते हैं।
सबसे पहले जानते हैं कि धीरेंद्र शास्त्री ने क्या बोला?
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने मध्य प्रदेश के शिवपुरी के करैरा में श्रीराम कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण और भगवान राम के बीच तुलना की। उन्होंने कहा,"एक भी फोटो देख लो तुम अपने वाले ठाकुर जी की। एक भी फोटो। बैठे हैं ऐसे, तो ऐसे, कहीं ऐसे। तुम्हारे वाले तो खड़े भी होते हैं तो तीन जगह से टेढ़े। पांव के ऊपर पांव, कमर कहीं लचकाएं, खोपड़िया ऐसी करें, ऐसी खोपड़िया करें, फिर बंसी बजाएं ऐसे टेढ़े करके।"
इसके बाद उन्होंने भगवान राम की तुलना करते हुए कहा- "हमारे वाले तो खड़े भी होते हैं एकदम सीधे। हमारे वाले का नाम भी सीधा। हमारे वाले का चलना भी सीधा, हमारे वाले दिखते भी सीधे। तुम्हारे वालों का नाम भी टेढ़ा, चलते भी टेढ़े, खड़े भी टेढ़े होते हैं।"
शास्त्री ने भगवान कृष्ण की नकल करते हुए टिप्पणी की। उन्होंने फिर तुलना करते हुए बंसी बजाने और धनुष चलाने का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बंसी का बजाना तो खेल है, धनुष चलाना खेल नहीं। इसके साथ ही उन्होंने गाय चराने से लेकर पवर्त उठाने तक की तुलना की।
विवाद कहां से शुरू हुआ?
इस बयान का वीडियो वायरल होने के बाद धीरेंद्र शास्त्री को कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कथावाचक को 'मूर्ख' बताते हुए कहा कि ये कब से बाबा बन गए। इसके साथ ही पूर्व सांसद लक्ष्मण सिंह ने भी धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बयान पर नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने वीडियो जारी कर लोगों से कथावाचक का बहिष्कार करने की अपील की। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने एक्स पर लिखा, "इसके राजनीतिक आकाओं को ये सब मंजूर होगा, हमें अंश मात्र भी स्वीकार्य नहीं है। सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने के अपराध में इसके सभी कार्यक्रम रद्द किये जाएं।"
कंप्यूटर बाबा ने भी शास्त्री पर निशाना साधा। उन्होंने उन्हें 'राजनीतिक बाबा' बताया और कहा कि कुछ लोगों को राजनीति के हिसाब से आगे बढ़ाया जाता है, जबकि उनमें ज्ञान का अभाव है।
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी शास्त्री को लेकर सोशल मीडिया पर लिखा कि कोई तो केमिकल लोचा है। इनकी रेबीज वगैरह की जांच करवाना ठीक होगा। सांसद पप्पू यादव धीरेंद्र शास्त्री के विवादित बयान के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने संसद मार्ग थाने पहुंचे। इस टिप्पणी को लेकर आम लोगों में भी नाराजगी है। देश के अलग-अलग हिस्सों में उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए गए और पुतले फूंके गए। वहीं, यादव समाज के लोग भी विरोध जताने सड़कों पर उतर आए हैं।
कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि लोगों को बांटने से मन नहीं भरा कि आराध्यों को भी बांटने लगे हैं? दोनों ही सत्य और न्याय के पर्याय हैं। ठाकुर जी को टेढ़ा मेढ़ा कहना पाप है। मथुरा के कुछ संतों ने भी इस तरह की तुलना पर आपत्ति जताई और कहा कि दोनों देवताओं के संदर्भ में ऐसी टिप्पणी भक्तों की भावनाओं को ठेस पहुंचा सकती है।
विवाद बढ़ने पर क्या बोले धीरेंद्र शास्त्री?
विवाद बढ़ने पर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने वीडियो जारी कर माफी मांगी। उन्होंने कहा कि उनकी टिप्पणी का उद्देश्य भगवान राम और श्रीकृष्ण में भेद करना या किसी की भावना आहत करना नहीं था। वे एक संत के पद की व्याख्या करते हुए भाव में यह बात कह गए थे। उन्होंने खुद को श्रीकृष्ण का भक्त बताते हुए कहा कि उनकी बात से किसी को ठेस पहुंची है तो वे क्षमा मांगते हैं। हालांकि, इसके बाद भी उनकी आलोचना जारी है।
पहले किन-किन बयानों के लिए माफी मांग चुके हैं शास्त्री?
1. मई 2022: छुआछूत को बढ़ावा देने का आरोप
मई 2022 में धीरेंद्र शास्त्री का एक वीडियो वायरल हुआ था। इसमें वह एक व्यक्ति को अपने पास बुलाते हैं। जब वह व्यक्ति उनके पैर छूने की कोशिश करता है तो वे उसे रोकते हुए कहते हैं, 'बस-बस, छूना नहीं, हमें, अछूत आदमी हैं हम।'
वीडियो का करीब 25 सेकेंड का हिस्सा वायरल हुआ। इसके बाद लोगों ने उन पर छुआछूत को बढ़ावा देने और व्यक्ति को अछूत कहने का आरोप लगाया। इस मामले में ट्विटर पर #ArrestDhirendraShastri भी ट्रेंड हुआ।
सफाई: बागेश्वर धाम सरकार के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से सफाई दी गई कि एडिटेड वीडियो के जरिए भ्रामक प्रचार किया जा रहा है। इसमें कहा गया कि धीरेंद्र शास्त्री ने अछूत शब्द का इस्तेमाल उस व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि खुद के लिए किया था।
2. फरवरी 2023: संत तुकाराम की पत्नी पर टिप्पणी
बयान: कथा के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि संत तुकाराम की पत्नी उन्हें रोज डंडे से मारती थीं।
सफाई और माफी: विवाद होने पर उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि यह कहानी उन्होंने एक किताब में पढ़ी थी। अगर उनके शब्दों से किसी को ठेस पहुंची है तो वे हाथ जोड़कर माफी मांगते हैं और अपने शब्द वापस लेते हैं।
3. अप्रैल 2023: साईं बाबा पर टिप्पणी
बयान: मध्य प्रदेश में कथा के दौरान उन्होंने कहा कि साईं बाबा संत हो सकते हैं, भगवान नहीं। उन्होंने कहा कि गीदड़ की खाल पहनने से कोई शेर नहीं बन सकता।
सफाई और माफी: 5 अप्रैल को उन्होंने कहा कि किसी संत को भगवान मानना लोगों की निजी आस्था है। उन्हें इससे कोई विरोध नहीं है। उनके शब्दों से किसी को ठेस पहुंची हो तो उन्हें दिल से दुख है।
4. अप्रैल 2023: सहस्त्रबाहु अर्जुन पर टिप्पणी
बयान: एक सभा में उन्होंने कहा कि सहस्त्रबाहु अर्जुन के हैहय वंश का राजा बड़ा कुकर्मी था और साधुओं पर अत्याचार करता था। इसी वजह से परशुराम ने फरसा उठाया था।
सफाई और माफी: 28 अप्रैल को सोशल मीडिया पर उन्होंने लिखा कि उनका उद्देश्य किसी समाज की भावनाएं आहत करना नहीं था। फिर भी किसी को ठेस पहुंची हो तो उन्हें खेद है।
5. अप्रैल 2024: अली और बजरंगबली पर टिप्पणी
बयान: एक कथा के दौरान उन्होंने जिन्न से परेशान व्यक्ति का जिक्र किया, जिसने अपना नाम अली बताया था। इस पर धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि हमारे पास बजरंगबली हैं, वे आपके भी पिता हैं।
सफाई और माफी: 5 अप्रैल को वीडियो जारी कर उन्होंने कहा कि मौला अली अहिंसा के पुजारी थे और उनके दिल में उनके लिए सम्मान है। किसी को ठेस पहुंची हो तो उन्होंने माफी मांगी।
6. अप्रैल 2026: छत्रपति शिवाजी महाराज पर टिप्पणी
बयान: 24 अप्रैल को नागपुर में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और मोहन भागवत की मौजूदगी में उन्होंने कहा कि युद्ध से थककर शिवाजी महाराज ने राज्य की जिम्मेदारी छोड़ने का विचार किया था और अपना मुकुट समर्थ रामदास को सौंप दिया था।
सफाई और माफी: 26 अप्रैल को नागपुर में उन्होंने कहा कि उन्होंने सम्मान के भाव से यह बात कही थी, लेकिन उसे गलत समझा गया। शिवाजी महाराज का अपमान करने के बारे में वे सोच भी नहीं सकते।