एक्सप्लेनर: शिष्य की मौत, लोग लापता, विराट को पैसे, प्रेमानंद के आश्रम पर कैसे-कैसे आरोप; क्यों बढ़ा विवाद?
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
शिष्य की मौत से शुरू हुआ विवाद अब कई सवालों तक पहुंच चुका है। वायरल सीसीटीवी, लापता लोगों के मामले और आश्रम पर लगे आरोपों के बीच विराट कोहली का नाम भी सामने आया। आखिर प्रेमानंद महाराज के आश्रम को लेकर ऐसा क्या सामने आया, जिससे विवाद लगातार गहराता गया? आइए जानते हैं।
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
विस्तार
वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज के आश्रम को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। कुछ दिनों पहले उनके एक शिष्य की मौत के बाद अब तक चार सीसीटीवी फुटेज वायरल हो चुके हैं। इसके बाद लापता लोगों के परिजनों के आरोप सामने आए और फिर विराट कोहली को लेकर बड़ा दावा किया गया। इन विवादों के बीच प्रेमानंद महाराज गुरुवार को फिर केली कुंज आश्रम पहुंचे।
ऐसे में आइए जानते हैं कि कौन हैं प्रेमानंद महाराज? उनके शिष्य से जुड़ा मामला क्या है? अब तक क्या-क्या हो चुका है? और कौन-कौन से मामले सामने आए हैं? इस बीच विराट कोहली का नाम कैसे सामने आया है?
कौन हैं प्रेमानंद महाराज?
प्रेमानंद महाराज का जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के सरसौल ब्लॉक स्थित अखरी गांव में एक धार्मिक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनका बचपन का नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे था।
बचपन से ही उनका माहौल पूजा-पाठ और धार्मिक गतिविधियों से जुड़ा रहा। पांचवीं कक्षा से ही वह अपने पिता के साथ पूजा-पाठ में शामिल होने लगे थे। उन्होंने गांव से पढ़ाई की और आठवीं कक्षा तक शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद नौवीं कक्षा में पढ़ाई छोड़कर आध्यात्मिक जीवन अपनाने का फैसला किया।
वृंदावन में उनका श्रीहित राधा केली कुंज आश्रम है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां उनके दर्शन और दीक्षा के लिए पहुंचते हैं। उनके शिष्यों में रसिक दुलारी शरण भी शामिल थे।
उनके शिष्य रसिक दुलारी शरण के साथ क्या हुआ?
25 सितंबर की सुबह प्रेमानंद महाराज के 25 वर्षीय शिष्य रसिक दुलारी शरण ने वृंदावन के वराह घाट क्षेत्र स्थित गो कृपा कुंज की चौथी मंजिल से कूदकर जान दे दी थी।
घटना के बाद उन्हें मथुरा के गोकुल रेस्टोरेंट के पास स्थित सर्वोदय अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार, वह सुबह 11:10 बजे अस्पताल पहुंचे। डॉक्टरों ने उनकी खुली चोटों का इलाज शुरू किया और टांके लगाए। उनके प्राइवेट पार्ट से भी काफी खून बह रहा था। करीब दो घंटे तक इलाज के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। 26 सितंबर को यमुना किनारे उनका अंतिम संस्कार किया गया।
मौत के बाद सीसीटीवी फुटेज क्यों वायरल हुए?
रसिक दुलारी की मौत के बाद घटना से जुड़े वीडियो एक-एक कर सामने आए। अब तक चार सीसीटीवी फुटेज वायरल हो चुके हैं।
सबसे ताजा वीडियो फुटेज में रसिक दुलारी गो कृपा कुंज के कमरे से बाहर निकलते दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने सफेद हाफ कुर्ता और पीली धोती पहनी हुई है। वह अपनी धोती संभालते हुए लड़खड़ाते कदमों से गैलरी की तरफ बढ़ते हैं और फिर सीढ़ियों की ओर मुड़ जाते हैं।
वीडियो में वह करीब 20 कदम चलते दिखाई देते हैं। उनकी चाल सामान्य नहीं लग रही है। इस फुटेज के सामने आने के बाद फिर सवाल उठा कि मौत से पहले उनके साथ क्या हुआ था और ये वीडियो इतने दिनों बाद सोशल मीडिया पर कैसे पहुंच रहे हैं।
कमरे में ग्राइंडर और शरीर पर चोट से क्यों बढ़े सवाल?
मामले में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और कमरे से मिले सामान को लेकर भी सवाल उठे हैं। रिपोर्ट में रसिक दुलारी के प्राइवेट पार्ट पर चोट के निशान बताए गए हैं। वहीं, उनके कमरे से एक ग्राइंडर मिलने की बात भी सामने आई।
पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि मौत से पहले उनके साथ क्या हुआ था। मोबाइल फोन और दूसरे डिजिटल सबूतों की भी जांच की गई है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या फोन से कोई चैट या वीडियो डिलीट किया गया था। हालांकि, इन घटनाओं के पीछे की वजह अभी स्पष्ट नहीं है। पुलिस की जांच जारी है।
रसिक दुलारी के परिवार ने क्या कहा?
रसिक दुलारी शरण मूल रूप से मध्य प्रदेश के जबलपुर के रहने वाले थे। उनका मूल नाम दीपक लोधी था। करीब दो साल पहले वह वृंदावन आए और प्रेमानंद महाराज से दीक्षा ली। इसके बाद उन्होंने अपना नाम बदलकर रसिक दुलारी शरण रख लिया।
उन्हें बिजली का काम आता था और आश्रम में उन्हें इसी सेवा से जोड़ा गया था। वह दो भाइयों और एक बहन में दूसरे नंबर पर थे। उनकी मां लौंग बाई ने बताया कि उन्होंने करीब दो साल पहले अपने बेटे से आखिरी बार बात की थी। बेटे के गिरने की सूचना मिलने के बाद परिवार वृंदावन पहुंचा था। उनका कहना था कि परिवार पहले भी बेटे से मिलने आया था, लेकिन मुलाकात नहीं होने दी गई थी। परिवार ने इस मामले की जांच को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं और परिवार ने उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
पुलिस जांच में अब तक क्या सामने आया?
रसिक दुलारी की मौत की जांच के दौरान पुलिस 50 से ज्यादा लोगों से पूछताछ कर चुकी है। मौत से पहले के सीसीटीवी फुटेज की भी जांच की जा रही है। पुलिस के अनुसार, मामले से जुड़े डिजिटल और भौतिक साक्ष्य सुरक्षित हैं और डीवीआर पुलिस की अभिरक्षा में है। इसके बावजूद फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। इसलिए पुलिस इनके स्रोत का पता लगाने की कोशिश कर रही है। उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग ने भी इस मामले का संज्ञान लिया है।
मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट तक क्यों पहुंचा?
दुलारी की मौत की जांच को लेकर मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट भी पहुंच चुका है। एडवोकेट प्रहलाद कृष्ण शुक्ला ने चीफ जस्टिस को लेटर पिटिशन भेजकर हाईकोर्ट की निगरानी में एसआईटी से जांच कराने की मांग की है। इसके अलावा वैकल्पिक तौर पर मजिस्ट्रियल जांच की मांग भी की गई है। उन्होंने मामले से जुड़े सभी सबूत सुरक्षित रखने और जांच के दौरान उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
इसके बाद आश्रम से जुड़ा एक और मामला आया सामने
रसिक दुलारी की मौत की जांच चल ही रही थी कि प्रेमानंद महाराज के आश्रम से जुड़े कुछ लोगों के लापता होने के मामले भी सामने आने लगे।
इनमें हाथरस के सादाबाद क्षेत्र के गांव बरमानी निवासी 17 वर्षीय अनुज चौधरी का मामला प्रमुख रहा। उसके पिता राजवीर के मुताबिक, अनुज ने 26 जून को प्रेमानंद महाराज से दीक्षा ली थी। इसके बाद वह घर लौट आया था।
3 जुलाई को वह दोबारा प्रेमानंद महाराज के दर्शन के लिए आश्रम जाने की बात कहकर घर से निकला। उसके साथ आश्रम से मिली कंठी माला और तीन पुस्तकें थीं। इसके बाद वह घर नहीं लौटा। परिवार ने 5 जुलाई को सादाबाद थाने में उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई थी।
अनुज के परिवार ने आश्रम पर क्या आरोप लगाया?
अनुज के परिवार ने आरोप लगाया कि तीन महीने तक बेटे की तलाश के दौरान उन्हें आश्रम से संतोषजनक जानकारी नहीं मिली। इसी को लेकर परिवार आश्रम के बाहर धरने पर भी बैठा।
हालांकि पुलिस की जांच में सामने आया कि अनुज ने 26 जून को आश्रम में दीक्षा ली थी, लेकिन इसके बाद आश्रम परिसर में उसके ठहरने का रिकॉर्ड नहीं मिला। आश्रम प्रशासन ने भी कहा कि वह जांच में सहयोग कर रहा है।
शनिवार को पुलिस ने अनुज को मथुरा के बरसाना क्षेत्र स्थित एक आश्रम से बरामद कर लिया। अब पुलिस उससे पूछताछ कर रही है कि वह इतने समय तक कहां था और वहां कैसे पहुंचा।
इस बीच दूसरे लापता लोगों के परिजन भी आश्रम पहुंचे
अनुज का मामला सामने आने के बाद दूसरे परिवार भी अपने लापता परिजनों की तलाश में प्रेमानंद महाराज के आश्रम पहुंचे। नोएडा के सेक्टर 65 निवासी उमेश सिंह अपनी 35 वर्षीय बेटी विभा की तलाश में आश्रम पहुंचे। परिवार के मुताबिक, विभा एमबीए की पढ़ाई पूरी कर चुकी हैं और 15 अगस्त को प्रेमानंद महाराज के आश्रम जाने की बात कहकर घर से निकली थीं। इसके बाद वह वापस नहीं लौटीं।
एक अन्य मामला हरियाणा के नजफगढ़ की रहने वाली अनीता चौधरी से जुड़ा है। अनीता आश्रम के पास एक ढाबे पर खाना बनाने का काम करती थीं। उनके अनुसार, वह किसी जरूरी काम से बाहर गई थीं और अपने 10 वर्षीय बेटे को ढाबे पर छोड़ गई थीं। वापस लौटने पर बच्चा वहां नहीं मिला।
इसके अलावा एक अन्य युवक के लापता होने का मामला भी सामने आया, जिसमें परिवार अपने बेटे की तस्वीर लेकर आश्रम के बाहर तलाश करता दिखाई दिया। ऐसे मामलों के सामने आने के बाद आश्रम की व्यवस्था और वहां आने वाले लोगों की जानकारी को लेकर सवाल उठने लगे।
लापता लोगों के परिजनों और आश्रम समर्थकों के बीच क्यों हुआ हंगामा?
लापता लोगों के परिजन जब आश्रम के बाहर पहुंचे तो वहां विवाद भी हुआ। 3 अक्तूबर की सुबह परिजन आश्रम के गेट पर पहुंचे थे। जब उन्होंने अपनी बात रखनी शुरू की तो वहां मौजूद कुछ समर्थकों ने उनका विरोध किया। महाराष्ट्र से अपने बेटे की तलाश में आई महिला उज्ज्वला के साथ अभद्रता और मारपीट पर आमादा होने का आरोप लगा।
लापता परिजनों के समर्थन में पहुंचीं साध्वी इंदुलेखा के साथ भी खींचतान की बात सामने आई। मीडियाकर्मियों से धक्का-मुक्की की भी बात सामने आई। पुलिस ने हंगामा करने वाले सचिन, अशोक और दिगंबर को पकड़कर शांतिभंग के मामले में कार्रवाई की।
विराट कोहली का नाम कैसे आया?
रसिक दुलारी की मौत और आश्रम से जुड़े दूसरे मामलों के बीच अब विराट कोहली का नाम भी इसमें जुड़ गया है। श्री कृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलाहारी महाराज ने आरोप लगाया कि जब प्रेमानंद महाराज ज्यादा प्रसिद्ध नहीं थे, तब महाराष्ट्र की एक पीआर कंपनी और राजस्थान के एक प्रॉपर्टी ग्रुप ने उनके संदेश को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए उनसे संपर्क किया था।
फलाहारी ने दावा किया कि इसी प्रमोशनल कोशिश के तहत विराट कोहली को पहली बार प्रेमानंद महाराज से मिलवाया गया और इस पूरी कवायद में करीब पांच करोड़ रुपये खर्च किए गए। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि बिल्डर और प्रॉपर्टी से जुड़े लोगों ने आश्रम की लोकप्रियता का इस्तेमाल अपने हितों के लिए किया। इस पूरे दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
आरोप पर विराट कोहली की टीम ने क्या कहा?
यह आरोप सामने आने के एक दिन बाद 7 अक्तूबर को विराट कोहली की टीम ने आधिकारिक बयान दिया। विराट कोहली के प्रवक्ता ने कहा कि उन्हें प्रेमानंद महाराज के आश्रम जाने के लिए पांच करोड़ रुपये दिए जाने का दावा पूरी तरह गलत, निराधार और तथ्यात्मक रूप से गलत है।
टीम ने कहा कि विराट की प्रेमानंद महाराज से मुलाकातें उनकी आस्था और सम्मान के कारण हैं, किसी आर्थिक लेनदेन के कारण नहीं।
विराट और अनुष्का पहली बार प्रेमानंद महाराज से कब मिले?
विराट कोहली और अनुष्का शर्मा पहली बार 4 जनवरी 2023 को वृंदावन पहुंचे थे। दोनों ने प्रेमानंद महाराज से मुलाकात कर आशीर्वाद लिया था।
इसके बाद दोनों कई बार आश्रम पहुंचे। उनकी मुलाकातों के वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आते रहे हैं। 22 जुलाई 2026 को भी दोनों प्रेमानंद महाराज से मिलने वृंदावन पहुंचे थे।
इन विवादों के बीच प्रेमानंद महाराज फिर केली कुंज आश्रम पहुंचे
रसिक दुलारी की मौत के 14 दिन बाद गुरुवार को प्रेमानंद महाराज फिर वृंदावन के केली कुंज आश्रम पहुंचे। वह सुबह करीब पांच बजे मांट के जहांगीरपुर खादर स्थित यमुना विहार कुंज आश्रम से गाड़ियों के काफिले के साथ केली कुंज पहुंचे। आश्रम में रुकने के बाद वह वराह घाट स्थित अपने गुरु श्री हित गोविंद शरण महाराज के आश्रम पहुंचे।
गुरु के दर्शन करने के बाद वह फिर यमुना विहार कुंज आश्रम के लिए रवाना हो गए। उन्हें आश्रम में देखकर भक्तों में खुशी की लहर दौड़ गई और भक्त श्री हरिवंश व राधे-राधे का जाप करने लगे।