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जनगणना के नियमों में बदलाव: जनगणना में निजी शिक्षण संस्थानों के शिक्षक भी हो सकेंगे शामिल, क्या-क्या बदला?
Fri, 16 Oct 2026 04:52 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Fri, 16 Oct 2026 04:52 PM IST
गृह मंत्रालय ने जनगणना (संशोधन) नियम, 2026 की अधिसूचना जारी कर गणनाकर्मियों के लिए पात्र लोगों की श्रेणियां स्पष्ट की हैं। अब शिक्षक, सरकारी कर्मचारियों और विभिन्न संस्थानों के अधिकारियों के साथ अन्य उपयुक्त लोगों को भी यह जिम्मेदारी दी जा सकेगी। नियम राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से लागू होंगे। आखिर एन्यूमरेटर कौन बन सकता है? उसकी जिम्मेदारियां क्या होंगी और जनगणना में जुटाई गई जानकारी का क्या महत्व है? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
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जनगणना के नियमों में क्या बदलाव हुआ?
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
केंद्र सरकार ने जनगणना के काम के लिए लोगों की नियुक्ति से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। गृह मंत्रालय ने 16 अक्टूबर 2026 को जनगणना (संशोधन) नियम, 2026 की अधिसूचना जारी की। इसके तहत सरकारी और निजी शिक्षण संस्थानों के शिक्षक, सरकारी विभागों के क्लर्क और अधिकारी तथा दूसरे उपयुक्त लोगों को जनगणना में एन्यूमरेटर यानी गणनाकर्मी की जिम्मेदारी दी जा सकेगी। इस बदलाव का उद्देश्य जनगणना के काम के लिए उपलब्ध लोगों के दायरे को स्पष्ट करना है। नए नियम अधिसूचना के आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित होने की तारीख से लागू हो गए हैं।
नए नियमों में तीन श्रेणियों के लोगों को गणनाकर्मी के रूप में काम करने के लिए शामिल किया गया है। इनमें सरकारी, स्थानीय निकायों, सहायता प्राप्त और बिना सहायता वाले निजी शिक्षण संस्थानों के शिक्षक; केंद्र और राज्य सरकार के विभागों सहित विभिन्न संस्थानों के क्लर्क और अधिकारी; तथा राज्य सरकार या केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन की ओर से उपयुक्त माने जाने वाले व्यक्ति शामिल हैं।
जनगणना में एन्यूमरेटर कौन-कौन बन सकेगा?
जनगणना के नियमों में बदलाव क्यों महत्वपूर्ण है?
जनगणना के दौरान लोगों और परिवारों से जुड़ी जानकारी जुटाने के लिए बड़ी संख्या में गणनाकर्मियों की जरूरत होती है। नए नियमों में अलग-अलग विभागों और संस्थानों से जुड़े लोगों को शामिल करने का प्रावधान है। इससे गणनाकर्मी के रूप में नियुक्त किए जा सकने वाले लोगों की श्रेणियां स्पष्ट होती हैं। शिक्षक अपने काम के दौरान लोगों से संवाद करते हैं, जबकि सरकारी और अन्य संस्थानों के कर्मचारियों को भी इस जिम्मेदारी के लिए चुना जा सकता है। इसके साथ ही राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन को ऐसे अन्य उपयुक्त लोगों को चुनने का विकल्प दिया गया है, जिन्हें वे इस काम के लिए सही मानते हैं। अधिसूचना में हालांकि गणनाकर्मियों की कुल संख्या, नियुक्ति की तारीख या उनके मानदेय के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है।
क्या नए नियम तत्काल लागू हो गए हैं?
अधिसूचना के पहले प्रावधान में कहा गया है कि इन नियमों को जनगणना (संशोधन) नियम, 2026 कहा जाएगा। दूसरे प्रावधान के मुताबिक, ये नियम आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित होने की तारीख से प्रभावी होंगे। अधिसूचना पर 16 अक्टूबर 2026 की तारीख दर्ज है। इसमें जनगणना नियम, 1990 में बदलाव करते हुए क्रम संख्या पांच के तहत लोगों की पात्रता से जुड़ी प्रविष्टियों को नए प्रावधानों से बदलने की बात कही गई है। अधिसूचना भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण के नाम से जारी की गई है। इसमें पहले के नियमों और उनमें 1994, 2009, 2018 और 2022 में किए गए संशोधनों का भी उल्लेख है।
एन्यूमरेटर की जिम्मेदारी क्या होती है?
एन्यूमरेटर यानी गणनाकर्मी का मुख्य काम घर-घर जाकर लोगों से जानकारी जुटाना होता है। वह तय सवालों वाली प्रश्नावली के आधार पर परिवारों या व्यक्तियों से सवाल पूछता है और उनके जवाब सही तरीके से दर्ज करता है। उसे यह सुनिश्चित करना होता है कि जानकारी पूरी और भरोसेमंद हो। जरूरत पड़ने पर वह लोगों को सवाल समझाने में भी मदद कर सकता है, ताकि जवाब सही ढंग से दर्ज किए जा सकें। जुटाए गए आंकड़ों का इस्तेमाल जनगणना और सांख्यिकीय विश्लेषण के लिए किया जाता है। इस तरह गणनाकर्मी जनगणना की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाता है, क्योंकि उसके द्वारा दर्ज की गई जानकारी के आधार पर लोगों से जुड़े आंकड़े तैयार किए जाते हैं।
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नए नियमों में तीन श्रेणियों के लोगों को गणनाकर्मी के रूप में काम करने के लिए शामिल किया गया है। इनमें सरकारी, स्थानीय निकायों, सहायता प्राप्त और बिना सहायता वाले निजी शिक्षण संस्थानों के शिक्षक; केंद्र और राज्य सरकार के विभागों सहित विभिन्न संस्थानों के क्लर्क और अधिकारी; तथा राज्य सरकार या केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन की ओर से उपयुक्त माने जाने वाले व्यक्ति शामिल हैं।
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जनगणना में एन्यूमरेटर कौन-कौन बन सकेगा?
- नए नियमों के मुताबिक, किसी भी सरकारी शिक्षण संस्थान, स्थानीय प्राधिकरण, सहायता प्राप्त या बिना सहायता वाले निजी संस्थान, सोसायटी या ट्रस्ट में काम करने वाले शिक्षक गणनाकर्मी बनाए जा सकते हैं। इसके अलावा केंद्र सरकार, राज्य सरकार, स्थानीय प्राधिकरण या किसी अन्य प्रतिष्ठान में काम करने वाले क्लर्क और अधिकारी भी इस काम के लिए पात्र श्रेणी में रखे गए हैं।
- इसमें सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, वैधानिक निकाय, बैंक, कंपनियां, संस्थान, सोसायटी और ट्रस्ट भी शामिल हैं। तीसरी श्रेणी में ऐसे किसी भी व्यक्ति को शामिल किया गया है, जिसे राज्य सरकार या केंद्र शासित प्रदेश का प्रशासन इस जिम्मेदारी के लिए उपयुक्त समझे। हालांकि, अधिसूचना में इन सभी लोगों की नियुक्ति अपने आप होने की बात नहीं कही गई है, बल्कि उन्हें गणनाकर्मी के रूप में काम के लिए पात्र श्रेणियों में शामिल किया गया है।
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जनगणना के नियमों में बदलाव क्यों महत्वपूर्ण है?
जनगणना के दौरान लोगों और परिवारों से जुड़ी जानकारी जुटाने के लिए बड़ी संख्या में गणनाकर्मियों की जरूरत होती है। नए नियमों में अलग-अलग विभागों और संस्थानों से जुड़े लोगों को शामिल करने का प्रावधान है। इससे गणनाकर्मी के रूप में नियुक्त किए जा सकने वाले लोगों की श्रेणियां स्पष्ट होती हैं। शिक्षक अपने काम के दौरान लोगों से संवाद करते हैं, जबकि सरकारी और अन्य संस्थानों के कर्मचारियों को भी इस जिम्मेदारी के लिए चुना जा सकता है। इसके साथ ही राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन को ऐसे अन्य उपयुक्त लोगों को चुनने का विकल्प दिया गया है, जिन्हें वे इस काम के लिए सही मानते हैं। अधिसूचना में हालांकि गणनाकर्मियों की कुल संख्या, नियुक्ति की तारीख या उनके मानदेय के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है।
क्या नए नियम तत्काल लागू हो गए हैं?
अधिसूचना के पहले प्रावधान में कहा गया है कि इन नियमों को जनगणना (संशोधन) नियम, 2026 कहा जाएगा। दूसरे प्रावधान के मुताबिक, ये नियम आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित होने की तारीख से प्रभावी होंगे। अधिसूचना पर 16 अक्टूबर 2026 की तारीख दर्ज है। इसमें जनगणना नियम, 1990 में बदलाव करते हुए क्रम संख्या पांच के तहत लोगों की पात्रता से जुड़ी प्रविष्टियों को नए प्रावधानों से बदलने की बात कही गई है। अधिसूचना भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण के नाम से जारी की गई है। इसमें पहले के नियमों और उनमें 1994, 2009, 2018 और 2022 में किए गए संशोधनों का भी उल्लेख है।
एन्यूमरेटर की जिम्मेदारी क्या होती है?
एन्यूमरेटर यानी गणनाकर्मी का मुख्य काम घर-घर जाकर लोगों से जानकारी जुटाना होता है। वह तय सवालों वाली प्रश्नावली के आधार पर परिवारों या व्यक्तियों से सवाल पूछता है और उनके जवाब सही तरीके से दर्ज करता है। उसे यह सुनिश्चित करना होता है कि जानकारी पूरी और भरोसेमंद हो। जरूरत पड़ने पर वह लोगों को सवाल समझाने में भी मदद कर सकता है, ताकि जवाब सही ढंग से दर्ज किए जा सकें। जुटाए गए आंकड़ों का इस्तेमाल जनगणना और सांख्यिकीय विश्लेषण के लिए किया जाता है। इस तरह गणनाकर्मी जनगणना की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाता है, क्योंकि उसके द्वारा दर्ज की गई जानकारी के आधार पर लोगों से जुड़े आंकड़े तैयार किए जाते हैं।